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जीरा चला सोने की चाल, महंगा इतना की किचन में रखने से पहले 10 बार सोचेंगे

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 27, 2023, 04:17 PM IST

Cumin (Jeera) Price In India: देश की सबसे बड़ी मंडियों में से एक गुजरात की ऊंझा मंडी में मंगलवार (27 जून) को जीरें की कीमतें 56000 रुपये पर थी। इसके पहले राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता कृषि उपज मंडी में जीरे का भाव 59 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया ।

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जीरे की कीमतों में लगी आग

Cumin (Jeera) Price In India:मसाला इतना महंगा हो जाय कि सोना याद आ जाय, यह यकीन करना मुश्किल है। लेकिन जीरे की चाल ने ऐसा कर दिया है। इस समय जीरे की कीमत का ऐसा हाल है कि गृहणियां किचन में जीरा खरीदने से पहले 10 बार सोचेंगी। देश की प्रमुख मंडियों में जीरे की कीमत इस समय 58-59 हजार रुपये के करीब पहुंच गई है। यानी मंडी में एक क्विंटल जीरा खरीदने के लिए 59 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। और जब कारोबारी इतने महंगे रेट पर खरीदेगा तो आम आदमी को तो कहीं ज्यादा रेट पर ही मिलेगा। पिछले दो हफ्तों से जैसा ट्रेंड बना हुआ है उसे देखते हुए जीरा 60,000 रुपये का भी आंकड़ा छू सकता है। NCDEX पर हाजिर में जीरे की कीमत 27 जून को 58,638 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई थीं।

चीन से भारी मांग

देश की सबसे बड़ी मंडियों में से एक गुजरात की ऊंझा मंडी में मंगलवार (27 जून) को जीरें की कीमतें 56000 रुपये पर थी। इसके पहले राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता कृषि उपज मंडी में जीरे का भाव 59 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया । मंडियों में पिछले दो हफ्ते में जीरे के कीतम में 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। कीमतों में तेजी की बड़ी वजह चीन से बड़ी मात्रा में भारत से जीरे का आयात है। बढ़ती मांग की वजह से कारोबारी ऊंचे दाम पर जीरे की बिक्री कर रहे हैं। इस कारण कीमतों में तेजी बनी हई है। वहीं अगर इस साल औसत कीमत को देखा जाय, तो जीरे की कीमत 30-35 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रही है। राजस्थान और गुजरात जीरे के बड़े उत्पादक हैं।

भारत दुनिया में नंबर वन

भारत जीरा उत्पादन में दुनिया में पहले नंबर पर है। भारत में साल 2019-20 में 9.12 लाख टन जीरे का उत्पादन देश में हुआ था। जबकि 2020-21 में 7.95 लाख टन और 2021-22 में 7.25 लाख टन उत्पादन हुआ था। जबकि बीते साल 2022-23 में देश में जीरा उत्पादन और घटने का अनुमान है। इसकी वजह से भी कीमतों पर असर दिखा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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