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ट्रेड यूनियंस 1 अप्रैल को मनाएंगे ‘काला दिवस', लेबर कोड्स के खिलाफ करेंगे विरोध प्रदर्शन

Central Trade Unions Black Day: केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने सरकार की चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 के खिलाफ विरोध स्वरूप 1 अप्रैल 2026 को ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया।

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श्रम सुधारों के खिलाफ केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने ’काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया (तस्वीर-istock)

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Central Trade Unions Black Day: केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने 1 अप्रैल 2026 को देशभर में ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया है। यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) के खिलाफ होगा। इन संहिताओं में वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं। सरकार ने इन चारों श्रम संहिताओं को 21 नवंबर 2025 से लागू किया है।

विरोध का कारण

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों ने कहा कि ये श्रम संहिता श्रमिक विरोधी और नियोक्ता समर्थक हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों का मकसद केवल ‘व्यापार सुगमता’ को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके लिए देश के श्रमिक वर्ग के हितों को नजरअंदाज किया गया है। संगठन लगातार इन कानूनों का विरोध करते रहे हैं और इन्हें रद्द करने की मांग करते रहे हैं।

संगठनों ने कहा कि 12 फरवरी 2026 को हुई ऐतिहासिक आम हड़ताल के बावजूद सरकार ने इन श्रम संहिताओं को वापस लेने या इस मुद्दे पर किसी सार्थक बातचीत के लिए बैठक बुलाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। उनका कहना है कि सरकार ने मसौदा तैयार करने के दौरान श्रमिक संगठनों से कोई परामर्श नहीं किया और इस तरह के गंभीर मुद्दों पर कोई भारतीय श्रम सम्मेलन नहीं बुलाया गया। यह अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के उल्लंघन के समान है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों पर हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए इस तरह का कदम विवादास्पद है।

श्रमिकों पर बढ़ रहा दबाव

श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इन श्रम संहिताओं का असली उद्देश्य देश के श्रमिक वर्ग को ब्रिटिश औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों की ओर वापस धकेलना है। उनका कहना है कि श्रमिक देश की संपदा का निर्माण करते हैं, लेकिन इन कानूनों के जरिए उनकी मेहनत और अधिकारों को कमतर किया जा रहा है। संगठनों ने यह भी कहा कि ये कानून श्रमिकों के संगठन बनाने के अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस विरोध कार्यक्रम का समर्थन करें ताकि श्रमिक अपने वैध अधिकारों की रक्षा कर सकें।

’काला दिवस’ कैसे मनाया जाएगा

केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने बताया कि 1 अप्रैल को देशभर के सभी कार्यस्थलों पर ‘काला दिवस’ मनाया जाएगा। इस दिन श्रमिक काले बैज पहन सकते हैं, बांह या माथे पर काली पट्टी बांध सकते हैं और लंच के समय नारेबाजी कर सकते हैं। जहां संभव हो वहां धरना, जुलूस, साइकिल या मोटरसाइकिल रैली जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा सकती हैं। संगठनों ने यह भी कहा कि राज्य इकाइयों के पास स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की सुविधा होगी और विरोध प्रदर्शन विभिन्न रूपों में आयोजित किया जा सकता है। इस विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) भी अपना समर्थन देगा।

विरोध प्रदर्शन में शामिल संगठन

इस संयुक्त मंच में देश के प्रमुख श्रमिक संगठन शामिल हैं। इनमें एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी प्रमुख हैं। संगठन का कहना है कि यह एक संयुक्त प्रयास है और सभी श्रमिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस आंदोलन में भाग लेना चाहिए। यह ’काला दिवस’ सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताओं के खिलाफ एक व्यापक विरोध प्रदर्शन का रूप ले रहा है। संगठनों का संदेश है कि यह केवल कानूनों का विरोध नहीं है, बल्कि श्रमिकों के मौलिक अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा का मुद्दा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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