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कैश में दें किराया या ऑनलाइन ट्रांसफर करें? मकान मालिक को पेमेंट करने का क्या है सबसे सही तरीका

किराए के मकान में रहते हैं, तो हर महीने मकान मालिक को पेमेंट करने का सही तरीका जानना बेहद जरूरी है। कैश या ऑनलाइन ट्रांसफर दोनों के अपने नियम हैं। तो आपके लिए कौन सा फायदेमंद है आइए जानते हैं?

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Cash Vs Online

भारत में करोड़ों लोग किराए के मकानों में रहते हैं, और हर महीने की शुरुआत में उनके सामने सबसे बड़ा काम होता है मकान मालिक को किराया (Rent) चुकाना। अमूमन लोग अपनी सहूलियत या मकान मालिक की डिमांड के हिसाब से कैश (नकद) या फिर ऑनलाइन माध्यमों जैसे UPI, नेट बैंकिंग या चेक के जरिए पेमेंट कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कानूनी और टैक्स के नजरिए से किराया (Rent) देने का सबसे सही तरीका क्या है? दरअसल, किराए के लेनदेन का सीधा असर आपके बैंक रिकॉर्ड और आपके टैक्स पर पड़ता है।

एक छोटी सी लापरवाही या गलत तरीके से किया गया पेमेंट भविष्य में आपको कानूनी पचड़े में डाल सकता है या फिर टैक्स छूट के बड़े फायदे से महरुम कर सकता है। इसलिए, किराएदारों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कैश और ऑनलाइन पेमेंट में से कौन सा विकल्प उनके लिए सबसे सुरक्षित और फायदेमंद है।

कैश में किराया देने के नुकसान

सबसे पहले बात करते हैं कैश यानी नकद में किराया देने की। भारत में आज भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो मकान मालिक के कहने पर या अपनी आदत के मुताबिक कैश में रेंट देना पसंद करता है। हालांकि, कानूनी तौर पर कैश में किराया देना गलत नहीं है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा जोखिम सबूत (Proof) का होता है। अगर आप मकान मालिक को हाथ में कैश दे रहे हैं और वह आपको उसकी रसीद (Rent Receipt) नहीं दे रहा है, तो आपके पास इस बात का कोई कानूनी प्रमाण नहीं बचता कि आपने उस महीने का किराया चुका दिया है।

कल को अगर मकान मालिक और आपके बीच कोई विवाद होता है या वह पैसे मिलने की बात से मुकर जाता है, तो आपको अपनी बात साबित करने में बहुत मुश्किल होगी। इसके अलावा, आयकर नियमों के मुताबिक अगर आप 2 लाख रुपये से अधिक का कोई भी नकद लेनदेन करते हैं, तो वह गैर-कानूनी माना जाता है। हालांकि किराए की रकम आमतौर पर इससे कम होती है, फिर भी कैश का रिकॉर्ड रखना हमेशा एक सिरदर्द बना रहता है।

ऑनलाइन किराया देने के फायदे

ऑनलाइन मोड (जैसे- Google Pay, PhonePe, Paytm, IMPS, NEFT या चेक) से किराया देना हर मायने में सबसे सुरक्षित और आधुनिक तरीका माना जाता है। जब आप ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो आपके बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट में उसकी एक पक्की एंट्री दर्ज हो जाती है, जो डिजिटल सबूत के तौर पर हमेशा मौजूद रहती है। इस स्थिति में मकान मालिक कभी भी यह दावा नहीं कर सकता कि उसे किराया नहीं मिला है। इसके अलावा, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पूरी तरह से पारदर्शी (Transparent) होते हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार दोनों का रिकॉर्ड साफ रहता है। टैक्स एक्सपर्ट्स भी हमेशा यही सलाह देते हैं कि पैसों का लेन-देन हमेशा बैंकिंग चैनल के माध्यम से ही किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह के वेरिफिकेशन के समय कोई समस्या न खड़ी हो।

कैसे टैक्स में मिलेगी छूट?

अब बात करते हैं सबसे महत्वपूर्ण पहलू की, जो है इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट यानी एचआरए (HRA - House Rent Allowance)। अगर आप नौकरीपेशा (Salaried Person) हैं और अपनी कंपनी से एचआरए क्लेम करके टैक्स बचाना चाहते हैं, तो आपके लिए पेमेंट का तरीका बहुत मायने रखता है। टैक्स विभाग से एचआरए की छूट पाने के लिए आपके पास वैलिड रेंट एग्रीमेंट और मकान मालिक के दस्तखत वाली रेंट रसीद होना अनिवार्य है। यदि आप कैश में किराया देते हैं और टैक्स विभाग को आपके दावे पर कोई शक होता है, तो वे आपसे बैंक स्टेटमेंट की मांग कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में अगर आपके बैंक खाते से किराया कटने का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखता, तो आपका एचआरए क्लेम खारिज हो सकता है और आपको भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, ऑनलाइन पेमेंट का रिकॉर्ड देखकर टैक्स अधिकारी आपके दावे को तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।

इस नियम को न करें नजरअंदाज

आयकर नियमों के अनुसार, यदि आपका सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है (यानी लगभग 8,333 रुपये प्रति महीना से ज्यादा), तो एचआरए का लाभ लेने के लिए आपको अपने मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर अपनी कंपनी या टैक्स विभाग को देना होगा। इसके अलावा, यदि आपका मासिक किराया 50,000 रुपये से अधिक है, तो किराएदार की जिम्मेदारी होती है कि वह किराए की रकम में से 5% का टीडीएस (TDS) काटे और उसे सरकार के पास जमा करे। ये सारे नियम और प्रक्रियाएं तभी सुचारू रूप से पूरी हो सकती हैं जब आपका पूरा लेन-देन ऑनलाइन और पारदर्शी हो। कैश में बड़े अमाउंट का भुगतान करने पर इन नियमों का पालन करना बेहद जटिल हो जाता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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