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BMW के एक फैसले से कॉर्पोरेट जगत में हलचल, बिना डिग्री 19 साल के लड़के को दी नौकरी

बीएमडब्ल्यू ने एक 19 वर्षीय कॉलेज ड्रॉपआउट को नौकरी देकर कॉर्पोरेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। यह साबित करता है कि आज के दौर में पारंपरिक डिग्रियों से ज्यादा 'स्किल' और 'पर्सनल ब्रांडिंग' का महत्व बढ़ रहा है।

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कॉर्पोरेट जगत में डिग्री की अहमियत को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है, लेकिन हाल ही में बीएमडब्ल्यू (BMW) द्वारा उठाए गए एक कदम ने इस बहस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। कंपनी ने 19 साल के एक ऐसे युवा को नौकरी पर रखा है, जिसके पास कोई कॉलेज डिग्री नहीं है। यह खबर इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गई है और सोशल मीडिया, विशेषकर लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। लोगों का सवाल है कि क्या वाकई अब कंपनियां पारंपरिक डिग्री के बजाय उम्मीदवार के 'पर्सनल ब्रांड' और उसके हुनर को ज्यादा प्राथमिकता देने लगी हैं?

क्या है यह पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल लिंक्डइन पोस्ट के अनुसार, यह 19 वर्षीय युवक अपनी स्किल्स और सोशल मीडिया पर अपनी 'पर्सनल ब्रांडिंग' के जरिए कंपनी की नजरों में आया। उसने कॉलेज जाने के बजाय अपने काम के पोर्टफोलियो को इतना मजबूत बनाया कि उसे सीधे बीएमडब्ल्यू जैसे दिग्गज ब्रांड में काम करने का मौका मिल गया। यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि आज के दौर में कंपनियां ऐसे लोगों की तलाश में हैं जो न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हों, बल्कि जिनकी सोच क्रिएटिव हो और जो अपनी बात को प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने रख सकें।

बदल रहा है कॉर्पोरेट जगत का नजरिया

पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि गूगल, एप्पल और टेस्ला जैसी कई दिग्गज कंपनियां अपनी हायरिंग पॉलिसी में बदलाव ला रही हैं। अब फोकस 'क्या पढ़ा है' से हटकर 'क्या कर सकते हो' पर शिफ्ट हो रहा है। कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं जिन्होंने डिग्री हासिल करने में चार साल गंवाने के बजाय, उन चार सालों का उपयोग कोडिंग, डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग या डेटा एनालिसिस जैसे प्रैक्टिकल स्किल्स सीखने में किया है। बीएमडब्ल्यू का यह फैसला इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल है। यह संदेश साफ है कि अगर आप में काबिलियत है और आपने खुद को एक 'ब्रांड' के रूप में पेश करना सीख लिया है, तो डिग्रियां रास्ते की बाधा नहीं बनेंगी।

पर्सनल ब्रांडिंग का बढ़ता महत्व

इस पूरी बहस के केंद्र में 'पर्सनल ब्रांडिंग' है। 19 साल के इस युवा की सफलता का राज उसकी लिंक्डइन एक्टिविटी और उसका काम है। आज के डिजिटल युग में, आप इंटरनेट पर क्या पोस्ट करते हैं, आप किन मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं और आप अपनी फील्ड के बारे में कितनी जानकारी साझा करते हैं, यही आपकी नई 'डिजिटल डिग्री' है। रिक्रूटर्स अब रिज्यूमे (Resume) से ज्यादा उम्मीदवार के पोर्टफोलियो, ब्लॉग, सोशल मीडिया कंटेंट और उसके प्रोजेक्ट्स को देखना पसंद कर रहे हैं। पर्सनल ब्रांडिंग का मतलब केवल खुद का दिखावा करना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि आप अपने काम के प्रति कितने गंभीर और जानकार हैं।

डिग्री का क्या होगा?

क्या इसका मतलब यह है कि कॉलेज जाना बेकार है? बिल्कुल नहीं। डिग्री अभी भी एक महत्वपूर्ण आधार है और कई क्षेत्रों में इसकी आज भी सख्त जरूरत है। लेकिन बीएमडब्ल्यू जैसे ब्रांडों का यह कदम यह संकेत जरूर देता है कि डिग्री अब इकलौता पैमाना नहीं रही। छात्रों के लिए अब चुनौती यह है कि वे डिग्री के साथ-साथ अपने 'प्रैक्टिकल हुनर' पर भी काम करें। केवल क्लासरूम की पढ़ाई अब नौकरी दिलाने के लिए काफी नहीं है। आपको खुद को बाजार में एक 'प्रोडक्ट' की तरह पेश करना होगा, जिसकी वैल्यू उसकी काबिलियत से तय होती है।

यह घटना उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में खुद को फिट नहीं पाते। अगर आप में सीखने का जज्बा है और आप अपने काम से अपनी पहचान बना सकते हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स आपके लिए दरवाजे खोलने के लिए तैयार हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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