सरकारी बैंकों के विलय पर वित्त मंत्रालय इस दिन करेगा बैठक, अहम मीटिंग में शामिल होंगे बैंकों के अधिकारी
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 21, 2026, 12:19 PM IST
Banks Merger Meeting: वित्त मंत्रालय 30 जनवरी को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के चेयरपर्सन के साथ बैठक करेगा। इसमें आरआरबी के विलय के बाद उनके प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू करेंगे, जिसमें नाबार्ड, सिडबी और आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विलय के बाद प्रदर्शन की समीक्षा (तस्वीर-Canva)
Banks Merger Meeting: वित्त मंत्रालय 30 जनवरी 2025 को सरकारी बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के चेयरपर्सन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में आरआरबी के हालिया विलय के बाद उनके कामकाज और वित्तीय प्रदर्शन की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि एक मई से लागू आरआरबी के एकीकरण के चौथे चरण के बाद यह पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव करेंगे बैठक की अध्यक्षता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा ने सूत्रों के अनुसार बताया कि इस बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू करेंगे। बैठक में नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) के चेयरमैन, सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संबंधित कार्यकारी निदेशक भी शामिल हो सकते हैं। बैठक का मकसद यह समझना है कि विलय के बाद आरआरबी कितनी प्रभावी तरीके से काम कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं कितनी बेहतर हुई हैं।
विलय के बाद आरआरबी की संख्या हुई कम
एक मई से प्रभावी चौथे चरण के एकीकरण के बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की संख्या 43 से घटकर 28 रह गई है। इस चरण में 11 राज्यों के 15 आरआरबी का विलय किया गया, जिसके बाद हर राज्य में एक ही राज्य-स्वामित्व वाला आरआरबी अस्तित्व में आया। सरकार का मानना है कि इस कदम से बैंकों की परिचालन दक्षता बढ़ेगी और खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी।
वित्तीय प्रदर्शन और कर्ज वितरण पर होगी चर्चा
सूत्रों ने बताया कि बैठक में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के विलय के बाद उनके वित्तीय प्रदर्शन की गहन समीक्षा की जाएगी। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि बैंकों की आय, मुनाफा, लागत नियंत्रण और परिसंपत्ति गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है। इसके साथ ही प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों जैसे कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण गरीबों को दिए जा रहे ऋण की प्रगति पर भी चर्चा होगी। आरआरबी द्वारा शुरू की गई विभिन्न सरकारी और वित्तीय योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।
आरआरबी एकीकरण का लंबा सफर
आरआरबी का एकीकरण कोई नया कदम नहीं है। इसका पहला चरण वित्त वर्ष 2005-06 से 2009-10 के बीच हुआ था, जब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की संख्या 196 से घटाकर 82 कर दी गई थी। दूसरे चरण में, जो वित्त वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक चला, आरआरबी की संख्या 82 से घटकर 56 कर दी गई। इसके बाद तीसरे चरण में यह संख्या 56 से घटकर 43 रह गई। अब चौथे चरण के बाद आरआरबी की कुल संख्या 28 हो गई है।
एनपीए में आई बड़ी गिरावट
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए एक सकारात्मक संकेत यह है कि उनके गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) में लगातार सुधार हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2019 में आरआरबी का सकल एनपीए अनुपात 10.8 प्रतिशत था, जो मार्च 2025 तक घटकर 5.4 प्रतिशत रह गया है। यह सुधार बेहतर ऋण प्रबंधन, सख्त वसूली प्रक्रिया और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल का नतीजा माना जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
सरकार का उद्देश्य आरआरबी को और मजबूत बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना है। विलय के जरिए बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और ग्राहकों के लिए अधिक उपयोगी बनाना लक्ष्य है। 30 जनवरी की यह बैठक इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे यह तय होगा कि आने वाले समय में आरआरबी किस तरह ग्रामीण भारत के विकास में और बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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