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बिहार में सरकार ने क्यों शुरू की बैंकों की रैंकिंग? बेहतर प्रदर्शन वाले को क्या फायदा

Bihar Banks Ranking: बिहार में अब बैंकों की प्रदर्शन आधारित रैंकिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। बेहतर प्रदर्शन वाले बैंकों में ही सरकार अपना जमा करेगी। राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने SLBC की बैठक में कहा कि बैंकों की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता विकास आयुक्त करेंगे। साथ ही उन्होंने बैंकों से बिहार के विकास में सक्रिय योगदान देने को कहा है।

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बिहार में बैंकों की प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग शुरू, बेहतर प्रदर्शन पर सरकार रखेगी अपना पैसा (तस्वीर-istock)

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Bihar Banks Ranking: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकों की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य में प्रदर्शन-आधारित बैंक रैंकिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। इसके तहत जो बैंक अच्छा प्रदर्शन करेंगे, राज्य सरकार अपना पैसा उन्हीं बैंकों में जमा करेगी। खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सरकार की सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। यह जानकारी गुरुवार को राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में दी।

बैंकों की निगरानी के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त मंत्री ने बताया कि बैंकों के कामकाज की लगातार निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त करेंगे। समिति यह देखेगी कि बैंक सरकार की योजनाओं और राज्य के विकास में किस तरह का योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे केवल औपचारिकता न निभाएं, बल्कि बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कृषि क्षेत्र में बैंकों की अनदेखी चिंता का विषय

वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बैंकों की भूमिका बेहद कमजोर रही है, जो राज्य के लिए गंभीर चिंता की बात है। बिहार की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों को समय पर और पर्याप्त लोन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार का साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इससे साफ है कि बिहार में जमा धन का बड़ा हिस्सा राज्य के बाहर इस्तेमाल हो रहा है।

बिहार का सीडी अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार का सीडी अनुपात करीब 58 प्रतिशत है, जबकि देश का औसत 77 प्रतिशत के आसपास है। इसका मतलब यह हुआ कि बिहार में बैंकों में जो पैसा जमा होता है, उसका बड़ा हिस्सा बिहार में कर्ज के रूप में नहीं लगाया जा रहा। वित्त मंत्री ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि बिहार के लोगों की जमा पूंजी का दूसरे राज्यों में जाना राज्य के विकास के लिए नुकसानदायक है। बैंकों को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

खराब रैंकिंग पर बैंकों को चेतावनी

वित्त मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर बैंक अपनी रैंकिंग में सुधार नहीं करते हैं, तो सरकार उन्हें कई तरह की सुविधाओं से वंचित कर सकती है। सरकार चाहती है कि बैंक राज्य में अधिक निवेश करें और लोगों को रोजगार और लोन की बेहतर सुविधा दें।

केवल 11 बैंक ही 40 अंक से ऊपर

वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर ने बैंक रैंकिंग की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 100 अंकों के पैमाने पर सिर्फ 11 बैंक ही 40 अंक या उससे अधिक हासिल कर सके हैं। वहीं 23 बैंक ऐसे हैं, जो 40 अंक से भी कम पर रह गए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि अधिकांश बैंकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है।

किसान क्रेडिट कार्ड वितरण पर सवाल

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के कम वितरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों को केसीसी के तहत केवल 3 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलता है, फिर भी बैंक लक्ष्य के अनुसार केसीसी नहीं बांट पा रहे हैं। उन्होंने बैंकों से किसानों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की।

उद्योग नीति अच्छी, बैंकों का सहयोग जरूरी

उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार की उद्योग नीति देश की सबसे बेहतर नीतियों में से एक है। अब निवेशक बिहार में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन उद्योगों के विकास के लिए बैंकों का सहयोग बेहद जरूरी है।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक सहित कई बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य साफ था, बिहार के विकास में बैंकों की भूमिका को और मजबूत बनाना।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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