Bhopal: भोपाल- इंदौर में मेयर की चेयर के लिए सीधा मुकाबला, 13 सीटों पर कांग्रेस-भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर

Bhopal local Body Election 2022 : शहर की सरकार के चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। इसी से आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों का भविष्य तय होगा। अगर 16 निकायों के मेयर पद की बात करें तो प्रदेश की 13 सीटों पर बीजेपी- कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। इधर, राजधानी भोपाल व इकोनॉमिक सिटी इंदौर में दोनों पार्टियों के बीच चुनावी जंग परवान पर है।

Bhopal local Body Election 2022
मेयर की चेयर को लेकर दोनों दिग्गज पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला  
मुख्य बातें
  • नाम वापसी के बाद शहर की सरकार बनने की तस्वीर साफ
  • राजधानी भोपाल व इंदौर में दोनों पार्टियों के बीच चुनावी जंग परवान पर
  • प्रदेश की 13 सीटों पर बीजेपी- कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर

Bhopal local Body Election 2022 : मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर नाम वापसी के बाद शहर की सरकार बनने की तस्वीर साफ हो गई है। वहीं राज्य के 16 नगर निगमों में मेयर की चेयर को लेकर दोनों दिग्गज पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला है। जिसमें सीधे तौर पर 11 महापौर पदों के लिए कांग्रेस-भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है।

शहर की सरकार के चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। इसी से आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों का भविष्य तय होगा। अगर 16 निकायों के मेयर पद की बात करें तो प्रदेश की 13 सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। इधर, राजधानी भोपाल व इकोनॉमिक सिटी इंदौर में दोनों पार्टियों के बीच चुनावी जंग परवान पर है।

ऐसे दिख रहे हैं राजनीतिक समीकरण

मेयर की 11 सीटों पर कांटे की टक्कर है। राजधानी में बीजेपी की केंडिडेट मालती राय के कद को देखें तो वे तीन एमएलए कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा व सांसद प्रज्ञासिंह ठाकुर की पसंद हैं। इनके प्रचार की कमान इन्हीं नेताओं ने थाम रखी है। इधर कांग्रेस की विभा पटेल पार्टी के ट्रेडिशनल वोटों के भरोसे इस बार अपनी नैया पार होने की आस में हैं। जिसमें मुस्लिम व किरार वोट की एकजुटता को अपनी जीत का आधार मान रही हैं। 

सबसे बड़े निगम में कमल और पंजे के बीच सीधी चुनौती

प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाला इंदौर महापालिका निगम प्रदेश का सबसे बड़ा निगम है। यहां पर भी कांग्रेस भाजपा में सीधा मुकाबला है। ब्राह्मण वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों पार्टियों ने ब्राह्मण चेहरों को टिकटें दी हैं। यहां बीजेपी के लिए क्षत्रपों की एकता खतरा बन रही है। वहीं कांग्रेस का बिखराव समेट कांग्रेस उम्मीदवार संजय शुक्ला अपने दम पर चुनावी मुकाबले को अंजाम दे रहे हैं। पेशे से वकील भाजपा के पुष्य भार्गव भी चुनावी रण में जोर से शंख फूंक रहे हैं।

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