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भारत में कौन-से कार रंग सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं? जो आप सोच रहे वो नहीं

कई लोग कार का फीचर्स और मॉडल पसंद आने के बावजूद मन मुताबिक रंग न होने के वजह से उसे रिजेक्ट कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में सबसे ज्यादा किस कलर की गाड़ियां लोग सबसे ज्यादा खरीदते हैं? अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बताते कि सबसे ज्यादा किस कलर की गाड़ियां बिकती हैं?

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Cars 2026

भारत में जब कोई परिवार नई कार खरीदने शोरूम जाता है, तो सबसे ज्यादा चर्चा इंजन या माइलेज के बाद उसके रंग पर होती है। कार का रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होता, बल्कि यह खरीदार की पसंद, पर्सनालिटी को भी दर्शाता है। अक्सर देखा गया है कि लोग कार के फीचर्स और मॉडल को पसंद करने के बावजूद सिर्फ इसलिए हाथ पीछे खींच लेते हैं क्योंकि उनका मनपसंद रंग उपलब्ध नहीं होता। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि भारतीय सड़कों पर सफेद रंग की कारों का सैलाब क्यों नजर आता है? या भारत में सबसे ज्यादा किस कलर की गाड़ियां बिकती हैं आइए जानते हैं?

सबसे ज्यादा किस कलर की गाड़ियां बिकती हैं?

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो BASF कलर रिपोर्ट 2025 की रिपोर्ट से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। साल 2025 में भारत में जितनी भी कारें बिकीं, उनमें से लगभग 42.2% कारें सिर्फ सफेद रंग की थीं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर दूसरी कार लगभग सफेद ही खरीदी जा रही है। सफेद के बाद लोगों की पसंद में दूसरा स्थान ब्लैक (काले) रंग का है, जिसकी हिस्सेदारी 15.50% रही, और तीसरा सबसे लोकप्रिय रंग ग्रे (धूसर) रहा, जिसे 13.30% लोगों ने चुना। दिलचस्प बात यह है कि कभी शान समझे जाने वाले सिल्वर, ब्लू और रेड जैसे रंग अब लोकप्रियता की दौड़ में काफी पीछे छूट गए हैं।

सफ़ेद ही क्यों है पहली पसंद?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण 'वेटिंग पीरियड' है। दरअसल, कार डीलर बाजार की मांग को समझते हुए सफेद रंग की कारों का स्टॉक सबसे ज्यादा रखते हैं। अगर आप कोई अलग या हटकर रंग चुनते हैं, तो आपको कार की डिलीवरी के लिए हफ्तों या महीनों इंतज़ार करना पड़ सकता है, जबकि सफेद रंग की कार अक्सर 'रेडी टू डिलीवरी' मिल जाती है। समय की बचत और तुरंत कार घर ले जाने की चाहत ग्राहकों को सफेद रंग की ओर खींचती है।

ये भी है बड़ा कारण

इसके अलावा, सुरक्षा और रखरखाव (मैंटेनेंस) के मामले में भी सफेद रंग को एक्सपर्ट्स सबसे बेहतर मानते हैं। सुरक्षा के नजरिए से देखें तो रात के अंधेरे में सफेद रंग की विजिबिलिटी सबसे अच्छी होती है, जिससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है। वहीं, रखरखाव की बात करें तो भारत की धूल-भरी सड़कों पर सफेद कार सबसे ज्यादा व्यावहारिक है। इस पर धूल, मिट्टी या छोटे-मोटे खरोंच (डेंट) गहरे रंग की कारों के मुकाबले बहुत कम दिखाई देते हैं। साथ ही, तेज धूप के कारण कारों का रंग फीका पड़ने (कलर फेडिंग) की समस्या सफेद रंग में लगभग न के बराबर होती है।

तापमान का विज्ञान भी सफेद कारों की बिक्री में बड़ी भूमिका निभाता है। भारत एक गर्म देश है और विज्ञान कहता है कि हल्के रंग गर्मी को कम सोखते हैं। गहरे रंग की कारें (जैसे काली या नीली) धूप में बहुत जल्दी गर्म हो जाती हैं, जबकि सफेद कारें सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट कर देती हैं। इससे गर्मियों में कार के अंदर का केबिन कम गर्म रहता है और एयर कंडीशनिंग (AC) को कार ठंडी करने में कम मशक्कत करनी पड़ती है, जो अंततः बेहतर माइलेज में भी मदद करता है। यही कारण है कि हुंडई और मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी अपनी बिक्री में सफेद रंग की मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है।

ये कलर भी हैं पहली पसंद

हालांकि, रंग का चुनाव केवल व्यावहारिक कारणों पर ही नहीं, बल्कि कार के डिजाइन पर भी निर्भर करता है। मारुति सुजुकी के अनुसार, छोटे साइज की कारों यानी हैचबैक (जैसे ऑल्टो या स्विफ्ट) में लोग आज भी लाल जैसे चटकीले रंगों को पसंद करते हैं। वहीं, बड़ी कारों जैसे सेडान या एसयूवी (SUV) में लोग अब ब्लैक, डार्क ब्लू और ग्रे जैसे गहरे रंगों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं क्योंकि ये रंग गाड़ी को एक 'प्रीमियम' और 'मजबूत' लुक देते हैं। इन सब के अलावा कंपनियों के विज्ञापन भी ग्राहकों के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं; जिस रंग में कार को टीवी पर चमकते हुए दिखाया जाता है, शोरूम में अक्सर उसी रंग की डिमांड सबसे ज्यादा होती है और बिकती भी है.

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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