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देश में पुरानी कारों की कितनी बढ़ी डिमांड? क्या कहती है ताजा रिपोर्ट

देश में पुरानी कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इस वित्त वर्ष में इसके 60 लाख यूनिट को पार कर जाने की उम्मीद है। शुक्रवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

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भारत में पुरानी कारों का बढ़ रहा है बाजार (फोटो क्रेडिट - AI)

मुंबई: भारत का पुरानी कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इस वित्त वर्ष में इसके 60 लाख यूनिट को पार कर जाने की उम्मीद है। इसकी वजह वैल्यू के प्रति सचेत खरीदारों की बढ़ती मांग, डिजिटल तकनीक अपनाने में तेजी और फंडिंग की आसान पहुंच है। शुक्रवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पुरानी कारों की बिक्री 8-10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो नई कारों की बिक्री की वृद्धि दर से दोगुनी से भी ज्यादा है। यूज्ड कार मार्केट में इस तेजी ने पुरानी कारों की तुलना में नई कारों की बिक्री के अनुपात को इस साल 1.4 तक पहुंचा दिया है, जो पांच साल पहले 1 से भी कम था, जो उपभोक्ता व्यवहार में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

पुरानी कारों का अनुमानित बाजार मूल्य अब लगभग 4 लाख करोड़ रुपए

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरानी कारों का अनुमानित बाजार मूल्य अब लगभग 4 लाख करोड़ रुपए है, जो देश में नई कारों की बिक्री के मूल्य के लगभग बराबर है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा कि पुरानी कारों और नई कारों का बढ़ता अनुपात खरीदारों की प्राथमिकताओं में दीर्घकालिक बदलाव का संकेत देता है।

पुरानी कारों की औसत आयु अब घट रही है

उन्होंने आगे कहा कि पुरानी कारों की औसत आयु अब घट रही है और लगभग 3.7 वर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है, जो दर्शाता है कि लोग अपने वाहनों को तेजी से अपग्रेड कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे एक मुख्य कारण यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा बेहतर पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करने के कारण है जिससे अब ज्यादा लोग पुरानी कारें खरीदने में विश्वास दिखा रहे हैं।

नई कारों की डिलीवरी में देरी भी एक कारण

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल और सेमीकंडक्टर की कमी के कारण नई कारों की डिलीवरी में देरी के कारण, कई खरीदार तेज पहुंच के लिए पुरानी कारों की ओर रुख कर रहे हैं। क्रिसिल द्वारा छह प्रमुख ऑनलाइन पुरानी कार प्लेटफॉर्म, जिनमें निर्माताओं द्वारा समर्थित प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं, के विश्लेषण से पता चलता है कि ये कंपनियां, जो संगठित पुरानी कारों के बाजार का लगभग आधा हिस्सा बनाती हैं, तेजी से विस्तार कर रही हैं।

पुरानी कारों के बाजार में अभी भी विकास की काफी गुंजाइश

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल पुरानी कारों की बिक्री में इन प्लेटफॉर्म की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पुरानी कारों के बाजार में अभी भी विकास की काफी गुंजाइश है। पुरानी कारों की बिक्री में वृद्धि का एक अन्य कारक वित्तपोषण की बढ़ती उपलब्धता है। क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय ने कहा कि उच्च लागत के कारण मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, लेकिन निरीक्षण, घर-घर डिलीवरी, बीमा और फाइनेंस जैसी एकीकृत सेवाओं की पेशकश का चलन समय के साथ कंपनियों को अपने मुनाफे में सुधार करने में मदद करेगा।

उपाध्याय ने कहा, "लागत नियंत्रण और निरंतर मांग के साथ, इस क्षेत्र की अधिकांश कंपनियों के जल्द ही परिचालन स्तर पर लाभदायक होने की उम्मीद है।"

(IANS इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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