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'Unknown Gunmen' का खौफ: पाकिस्तान में 'रहस्यमय तरीके' से मिट रहा आतंकियों का नामो-निशान

पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में भारत के 'मोस्ट वांटेड' आतंकियों की रहस्यमय मौतों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस पूरे मामले को 'अज्ञात हमलावरों' (Unknown Gunmen) की थ्योरी के रूप में देखा जा रहा है।

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मिट रहा आतंकियों का नामो-निशान (AI Image)
Authored by: Ravi Vaish
Updated May 2, 2026, 07:18 IST

पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में भारत के लिए मोस्ट वांटेंड आतंकियों (Most Wanted Terrorist) का सफाया एक बड़े रहस्य का केंद्र बन गया है। 2022 से अप्रैल 2026 तक, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के कई प्रमुख चेहरे अज्ञात हमलावरों की गोलियों का शिकार हुए हैं। आखिर कौन हैं ये 'अज्ञात हमलावर' (Unknown Gunmen) और क्यों पाकिस्तान के सुरक्षित ठिकानों में छिपे इन मास्टरमाइंड्स के बीच मौत का खौफ पसरा है?

खास बात यह है कि उनके मारे जाने का पैटर्न (Killing Pattern) करीब-करीब एक सा ही है। एक अनुमान के मुताबिक यह सिलसिला 2022 से शुरू हुआ जो अब 2026 में अपने चरम पर दिखाई दे रहा है, जिससे पाकिस्तान के सुरक्षित ठिकानों में छिपे भारत के 'मोस्ट वांटेड' आतंकियों के बीच भारी डर का माहौल है

वहीं इस क्रम में ताजा मामला आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर अहमद सज्जाद से जुड़ा है। जिसकी पाकिस्तान में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जानकारी मिली है। अहमद सज्जाद जम्मू-कश्मीर के बारामूला का रहने वाला था और लंबे समय से पाकिस्तान में छिपकर गतिविधियां चला रहा था। बताया जा रहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी घटनाओं से जुड़ा रहा है, जिनमें कई निर्दोष लोगों की जान भी गई थी।

मौत का तरीका (Modus Operandi) करीब-करीब एक सा!

ज्यादातर मामलों में एक ही पैटर्न देखा गया है वो ऐसा है कि आतंकी जब मस्जिद से नमाज पढ़कर निकल रहे होते हैं या अपने घर के बाहर टहल रहे होते हैं, तब बाइक पर सवार 'अज्ञात हमलावर' (Unknown Gunmen) आते हैं और उन्हें गोलियों से भून देते हैं। इन हमलावरों का कभी पता नहीं चलता और पाकिस्तानी एजेंसियां भी इन्हें पकड़ने में नाकाम रही हैं।

साल 2022 से 2026 के बीच मारे गए मारे गए कुछ प्रमुख आतंकियों की बात करें तो-

2022 में मिस्त्री जहूर इब्राहिम

जहूर मिस्त्री जो 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक करने वाले 5 हाईजैकर्स में से एक था और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य था। 1 मार्च, 2022 को कराची में कुछ अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावरों ने बहुत करीब से गोली चलाई और फिर वहां से फरार हो गए।

हंजला अदनान

6 दिसंबर 2023 को कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हंजला अदनान को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। वह 2016 में सीआरपीएफ काफिले पर हमले की साजिश में शामिल था और हाफिज सईद का करीबी माना जाता था।

तारिक रहीम

12 नवंबर 2023 को जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मौलाना तारिक रहीम उल्लाह को कराची में गोली मार दी गई। वह मसूद अजहर का करीबी माना जाता था और भारत के खिलाफ गतिविधियों में सक्रिय था। घटना के वक्त वह एक सभा को संबोधित करने जा रहा था, तभी हमलावरों ने उसे निशाना बना लिया।

अकरम खान

9 नवंबर 2023 को बाजौर में अकरम खान उर्फ अकरम गाजी की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। वह भारत में वांछित था और 2018 से 2020 के बीच लश्कर के भर्ती नेटवर्क का नेतृत्व कर चुका था। पाकिस्तान में वह अपने भड़काऊ भारत विरोधी भाषणों के कारण भी चर्चित था।

दाऊद मलिक

20 अक्तूबर 2023 को उत्तरी वजीरिस्तान में दाऊद मलिक मारा गया, जो मसूद अजहर का करीबी बताया जाता था। वह जैश-ए-मोहम्मद के अलावा लश्कर-ए-जब्बर और लश्कर-ए-जांगवी जैसे संगठनों से भी जुड़ा हुआ था।

मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज

11 अक्तूबर 2023 को बलूचिस्तान के केच इलाके में आईएसआई से जुड़े एजेंट मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस पर आरोप था कि उसने कुलभूषण जाधव के अपहरण में भूमिका निभाई थी।

शाहिद लतीफ

11 अक्तूबर 2023 को सियालकोट में पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ की मस्जिद के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह भारत में सजा काट चुका था और 2010 में रिहा होने के बाद पाकिस्तान भेजा गया था।

अबु कासिम

8 सितंबर 2023 को पीओके में एक मस्जिद के अंदर अबु कासिम की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह हाफिज सईद का करीबी था और राजौरी के ढांगरी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी।

खालिद रजा

28 फरवरी 2023 को कराची में अल-बद्र के पूर्व कमांडर खालिद रजा की घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह कश्मीर में सक्रिय रहा था और बाद में पाकिस्तान में रहकर भर्ती अभियान चला रहा था।

परमजीत सिंह पंजवड़

6 मई 2023 को पाकिस्तान के लाहौर में खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवड़ की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वह लंबे समय से पाकिस्तान में छिपकर रह रहा था और वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था।

सैयद खालिद रजा

26 फरवरी, 2023 को पाकिस्तान में सैयद खालिद रजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रजा अल बद्र का पूर्व कमांडर था, जो आतंकियों को ट्रेंड कराता था

मार्च 2024

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के सचिव और आतंकी कमांडर शेख जमील-उर-रहमान मरा हुआ मिला था। उसे किसने मारा यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। भारत ने उसे अक्तूबर 2022 में आतंकी घोषित किया था।

15 अप्रैल 2024

अमीर सरफराज तांबा को गोलियों से भून डाला गया था। पाकिस्तान के लाहौर में अज्ञात हमलावरों ने इसे अंजाम दिया था। अमीर सरफराज तांबा लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के बेहद करीबियों में शामिल था। उस पर पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की हत्या करने का आरोप था।

30 अप्रैल 2025

बीते साल इसी महीने की आखिरी तारीख को पाकिस्तान में कारी एजाज आबिद को मौत के घाट उतार दिया गया था। खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय राजधानी पेशावर में 'अज्ञात लोगों'ने गोली मारकर हत्या कर दी गई। आबिद प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी और रिश्तेदार था। कारी एजाज आबिद अहले-ए-सुन्नत वल जमात (एएसडब्ल्यूजे) का हिस्सा था और इंटरनेशनल खतम-ए-नबुवत का प्रांतीय प्रमुख था।

31 मार्च 2025

कराची में लश्कर से जुड़े और फंड जुटाने वाले अब्दुल रहमान की अज्ञात हमलावरों ने हत्या की।

15 मार्च 2025

लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख आतंकवादी और इसके सबसे वांटेड आतंकवादियों में से एक फैजल नदीम उर्फ अबू कताल की हत्या कर दी गई थी। कताल को भी सेट पैटर्न को फॉलो करते हुए झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया था। वह 2023 के राजौरी हमले और 2024 के रियासी बस हमले के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में अन्य घातक हमलों में शामिल था।

7 मार्च, 2025

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) के आतंकवादी मुफ्ती शाह मीत की पाकिस्तान के तुरबत में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

17 फरवरी, 2025

एलईटी के पॉलिटिकल विंग के प्रमुख मौलाना काशिफ अली की गोली मारकर हत्या।

22 जनवरी 2025

जैश ए मोहम्मद और विश्विद्यालय ए तैयबा के लॉन्च पैड कमांडर फारुख की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या ।

16 अप्रैल 2026

हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में से एक आतंकवादी आमिर हमजा को लाहौर में कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी। फिलहाल आतंकी हमजा की हालत गंभीर बनी हुई है।आमिर हमजा ने आतंकवादी हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना की थी। उसका नाम कई आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है, जिनमें भारत में हुए कई हमले भी शामिल हैं।

30-31 मार्च 2026

बीते महीने की आखिरी तारीख को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की पाकिस्तान में मौत हो गई थी, हालांकि उनकी मौत की वजह अभी तक साफ नहीं है। वह जैश-ए-मोहम्मद के फाउंडर मेंबर्स में शामिल था। इसके अलावा, कहा जाता है कि वह मसूद अजहर का राइट हैंड और चीफ सलाहकार माना जाता था।

21 मार्च 2026

इसी साल मार्च में ही लश्कर ए तैयबा के गढ़ मुरीदके में खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या कर दी गई थी। सलाफी लश्कर के मरकज से ईद की नमाज के बाद बाहर निकल रहा था। तभी उसे पहले चाकुओं से गोद दिया गया, फिर उसे गोली मार दी गई।

इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

जानकार विशेषज्ञों की राय के मुताबिक इस रहस्यमय सिलसिले के पीछे तीन प्रमुख सिद्धांत (Theories) चर्चा में हैं-

1-आंतरिक गुटबाजी (Internal Rivalry): आतंकी संगठनों के बीच फंड और पावर को लेकर चल रही आपसी लड़ाई का परिणाम।

2-पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारत की खुफिया एजेंसियां अब अपनी रणनीति बदलकर विदेश में बैठे दुश्मनों को निशाना बना रही हैं, हालांकि भारत सरकार ने इन दावों को हमेशा खारिज किया है और इन्हें पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा बताया है।

3-ISI का 'क्लीनअप' ऑपरेशन: ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान पर जब FATF या अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, तो उसकी खुफिया एजेंसी ISI खुद ही उन आतंकियों को रास्ते से हटा देती है जो 'बोझ' बन चुके होते हैं।

पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंक के आकाओं की नींद उड़ी

मस्जिद के बाहर हो या घर के आंगन में, 'अज्ञात हमलावरों' की गोलियों ने पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंक के आकाओं की नींद उड़ा दी है। इन आतंकियों के खात्मे के साथ ही एक दौर का अंत होता दिख रहा है, जहां यह खुद को सुरक्षित समझते थे। यह रहस्यमयी सिलसिला फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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