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रूस में 'सेक्स मंत्रालय' बनाने जा रहे राष्ट्रपति पुतिन, गर्लफ्रेंड को डेट करने से लेकर होटल का खर्च भी उठाएगी सरकार; क्या है वजह?

Ministry of sex in Russia: तीन साल से यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहे रूस में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है और देश की जनसंख्या भी तेजी से घट रही है। अब रूस के सामने जन्मदर बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में इस देश में सेक्स मंत्रालय बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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रूसी राष्ट्रपति पुतिन।

Photo : AP

Ministry of sex in Russia: रूस में घटती जनसंख्या से निपटने के लिए नया मंत्रालय बनाने पर विचार किया जा रहा है। मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन जन्मदर बढ़ाने के लिए 'मिनिस्ट्री ऑफ सेक्स' (सेक्स मंत्रालय) बनाने पर विचार कर रहे हैं। इस मंत्रालय का काम रूस की घटती जन्मदर को बढ़ाने और नए कपल्स को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने संबंधी नीतियां बनाना होगा।

रूस में यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है, जब रूसी अधिकारी घटती जनसंख्या को रोकने के लिए नई पॉलिसी बना रहे हैं। दरअसल, तीन साल से यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहे रूस में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है और देश की जनसंख्या भी तेजी से घट रही है। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की वफादार और रूसी संसद की पारिवारिक सुरक्षा, पितृत्व, मातृत्व और बचपन समिति की अध्यक्ष, 68 वर्षीय नीना ओस्टेनिना, ऐसे मंत्रालय की मांग करने वाली याचिका की समीक्षा कर रही हैं।

रात 10 से सुबह 2 बजे तक बंद रहेगी लाइट और इंटरनेट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपल्स को संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रात 10 बजे से सुबह 2 बजे तक लाइट और इंटरनेट बंद करने का सुझाव दिया गया है। इतना ही नहीं घर पर रहने वाली माताओं को घर के काम के बदले भुगतान करने का भी सुझाव भी है। यहां तक कि सरकार को रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए पहली डेट के लिए 5,000 रूबल (£40) तक का फंड देने का भी सुझाव दिया गया है।

प्रेग्नेंट होने के लिए भी मिलेंगे रुपये

एक अन्य प्रस्ताव में, शादी की रात कपल्स को होटल में ठहरने और गर्भधारण करने के लिए 26,300 रूबल (£208) देने का प्रस्ताव है। क्षेत्रीय स्वास्थ्य मंत्री येवगेनी शेस्टोपालोव ने यहां तक सुझाव दिया कि रूस के लोग काम के दौरान कॉफी और लंच ब्रेक का उपयोग भी प्रजनन के लिए करें।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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