दुनिया

पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं अहमदिया मुसलमान, अहमदियों के 80 साल पुराने धर्मस्थल को पुलिस और चरमपंथियों ने किया ध्वस्त!

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को अक्सर उसकी धार्मिक मान्यताओं की वजह से निशाना बनाया जाता है। अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुसलमान मानते हैं, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था।

Image

पाकिस्तान में अहमदियों के 80 साल पुराने धर्मस्थल को पुलिस और चरमपंथियों ने किया ध्वस्त (फोटो- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस और एक इस्लामी पार्टी के सदस्यों ने अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के 80 साल पुराने पूजा स्थल को कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह घटना शुक्रवार को लाहौर से लगभग 100 किलोमीटर दूर सियालकोट के दसका कलां में घटी।

अहमदिया पूजा स्थल ध्वस्त

जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान (जेएपी) के मुताबिक स्थानीय प्रशासन ने धार्मिक कट्टरपंथियों के दबाव में अहमदिया पूजा स्थल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। जेएपी ने बताया कि इस धार्मिक स्थल का निर्माण भारत के विभाजन से पहले पाकिस्तान आंदोलन के सदस्य और स्वतंत्र राष्ट्र के पहले विदेश मंत्री सर जफरुल्लाह खान द्वारा कराया गया था। जेएपी ने बताया, ‘‘शुक्रवार की रात को अधिकारियों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया और अहमदिया लोगों को उनके धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकार से वंचित किया। ऐसा लगता है कि अहमदिया धार्मिक स्थल पर एक सुनियोजित हमला किया गया।’’

होते रहा है हमला

अहमदिया समुदाय के संगठन ने बताया कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के सदस्यों ने अहमदिया धार्मिक स्थल को ध्वस्त किए जाने के दौरान धार्मिक नारे लगाए। उसने बताया कि पिछले साल अहमदिया समुदाय के 22 धार्मिक स्थलों को अपवित्र किया गया था।

पाकिस्तान नहीं मानता अहमदिया समुदाय को मुस्लिम

पिछले साल सितंबर में पंजाब के विभिन्न हिस्सों में अहमदिया समुदाय के कब्रिस्तानों में भी तोड़-फोड़ की गई थी। पुलिस और टीएलपी के सदस्यों ने कब्रों पर लिखे पवित्र शिलालेखों पर काला रंग पोत दिया था। पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को अक्सर उसकी धार्मिक मान्यताओं की वजह से निशाना बनाया जाता है। अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुसलमान मानते हैं, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। गैर मुस्लिम घोषित किये जाने के एक दशक बाद उन्हें न केवल स्वयं को मुसलमान कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, बल्कि इस्लाम के विभिन्न परपंराओं का पालन करने पर भी रोक लगा दी गई।

भाषा की रिपोर्ट

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

और पढ़ें
End of Article