PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK की सड़कों एवं चौराहों पर लोगों का प्रदर्शन बेहद तीव्र हो चुका है। लोग पाकिस्तान के जुल्म एवं अत्याचार से आजादी की मांग करते हुए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन इतने तेज और हिंसक हो गए हैं कि इसकी गूंज दुनिया भर में सुनाई दे रही है। पाकिस्तान के खिलाफ लंदन हाई कमीशन के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया है। पीओके में 'पाक आर्मी गो बैक' के नारे लग रहे हैं। कई जगहों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के साथ प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत हुई है। 'आजादी' की मांग कर रहे निहत्थे एवं निर्दोष लोगों की आवाज दबाने के लिए पाकिस्तानी फौज उन पर गोलियों की बौछार कर रही है।
अब तक 30 लोगों की मौत, 200 घायल
अलग-अलग सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मौत का यह आंकड़ा सैकड़ों के पार जा चुका है। पीओके में विद्रोह की आग से रावलपिंड़ी से लेकर इस्लामाबाद तक हुक्मरान डर-सहम गए हैं। लोगों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सेना को खुली छूट दे दी है। पाकिस्तानी सुरक्षाबल की सख्ती और दमनपूर्ण कार्रवाइयों के आगे लोग झुक नहीं रहे हैं।
आर-पार की लड़ाई के मूड में लोग
विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें भंग करने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब आजादी की मांग तक पहुंच गया है। पीओके की सड़कों पर बस एक ही आवाज गूंज रही है वह है पाकिस्तान से आजादी। लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। POJK के नेता आदिल रजा ने कहा है कि अब लोग पाकिस्तान से अपनी आजादी लेकर रहेंगे।
'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’को प्रतिबंधित किया
इस बीच, एचआरसीपी ने स्थानीय सरकार के उस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसके तहत 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है। अधिकारियों ने जन व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए शुक्रवार को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। आयुक्त सरदार वाहीद खान के मुताबिक, पीओके के रावलाकोट में रविवार को पुलिस और जेएएसी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कम से कम सात नागरिक और चार पुलिसकर्मी मारे गए। उन्होंने बताया कि झड़प से पहले और बाद में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।
व्यापारी की मौत को लेकर तनाव भड़क उठा
पुलिस के अनुसार, हिंसा की शुरुआत तब हुई, जब एक व्यापारी की मौत को लेकर तनाव भड़क उठा, जिसे कथित तौर पर शुक्रवार रात कानून प्रवर्तन कर्मियों के साथ टकराव में गोली मार दी गई थी। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि रविवार को प्रदर्शनकारियों ने रावलाकोट के सैन्य अस्पताल पर हमला किया। सोमवार को जारी बयान में एचआरसीपी ने नागरिकों और पुलिसकर्मियों दोनों की मौत, बल प्रयोग और संचार सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी निंदा की। आयोग ने कहा, 'संवाद जरूरी है, लेकिन जब तक इस क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक अधिकार से वंचित रखा जाएगा, तब तक यह संवाद सार्थक नहीं हो सकता। शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।’
संचार सेवाएं बंद किए जाने की निंदा
आयोग ने केंद्र और स्थानीय सरकार दोनों से अपील की कि वे 'तनाव और न बढ़ाएं, लोगों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और वास्तविक, समावेशी वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हों।’ एचआरसीपी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एक तथ्यान्वेषण दल भेजने की भी घोषणा की। आयोग ने जेएएसी के नौ जून को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले उसे आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित किए जाने के सरकारी फैसले पर सवाल उठाए। साथ ही अशांति के दौरान सूचनाओं को दबाने के लिए इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद किए जाने की भी निंदा की। पिछले साल भी पीओके में बिजली के अत्यधिक बिल और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें तीन पुलिस अधिकारियों समेत कम से कम नौ लोगों की जान गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे।
