भले ही गहरे आर्थिक संकट में घिरे पाकिस्तान में लोगों को खाने-पीने की भारी दिक्कतें हो रही हों, लेकिन रक्षा से जुड़ी साजों-सामान जुटाने में उसकी चाहत बरकरार है। भारत को नंबर 1 दुश्मन मानने वाला पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय सीमा से केवल 58 किलोमीटर दूर छोर कैंट (Chorr Cantt) में एक टीपीएस-77 रडार साइट विकसित कर रहा है। बादिन में इसी तरह के रडार साइट की सफल तैनाती के बाद 400 किलोमीटर से अधिक की रेंज वाली इस नई साइट को विकसित किया जा रहा है।
लॉकहीड मार्टिन का उत्पाद है TPS-77 Radar
लॉकहीड मार्टिन की टीपीएस-77 उत्पाद श्रृंखला में मल्टी-रोल रडार (TPS-77 Radar) शामिल है, जिसे अल्ट्रा-लो पावर की खपत के लिए डिजाइन किया गया है। यह अपनी उच्च पोर्टेबिलिटी के लिए जाना जाता है। यानि इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस उपकरण की निगरानी क्षमताओं में लंबी दूरी के मिशनों के लिए 463 किमी और यूएवी, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों जैसे कम उड़ान निगरानी मिशनों के लिए 150 किमी की रेंज शामिल है। लंबी और मध्यम दूरी के दोनों लक्ष्यों का पता लगाने की इसकी क्षमता के कारण ही इसका यह नाम रखा गया है।
TPS-77 MRR रडार पोर्टेबल होने के कारण इसे C-130 कार्गो विमानों, हेलीकाप्टरों, ट्रकों और ट्रेनों सहित परिवहन के विभिन्न साधनों से ले जाया जा सकता है। TPS-77 रडार परिवार में TPS-77 MRR, AN/TPS-77, और AN/TPS-117 रडार शामिल हैं। TPS-77 MRR परिवहन के लिए सबसे आसान है। रडार में एक बहुउद्देश्यीय एकल स्कैन तकनीक है जो ऑपरेटरों को रडार के लिए विशेष कामों को चुनने में सक्षम बनाती है, जैसे किसी खास इलाके में कम ऊंचाई या मध्यम दूरी उड़ानों की निगरानी। यह रडार को किसी भी परिस्थिति के लिए उपयुक्त बनाता है।
भारत पर क्या असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में दूसरी TPS-77 MRR रडार साइट में भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को प्रभावित करने की क्षमता है। यह आधुनिक युद्ध में एडवांस रडार प्रणालियों से भी लैस है। इस पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार TPS-77 MRR में विश्व स्तर पर सेनाओं के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल क्षमता है और हालात के मुताबिक महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
नवंबर 2021 में अपनी वायु रक्षा निगरानी बढ़ाने के लिए पाकिस्तान वायु सेना (PAF) ने TPS-77 MRR सहित दो नए रडार सिस्टम तैनात किए थे। यह एक मल्टी-रोल रडार प्रणाली है जिसमें कम ऊंचाई की उड़ान निगरानी, समुद्री और जमीन आधारित निगरानी और सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल चेतावनी का पता लगाने की क्षमता है।
