इजरायल में पिछले सप्ताह हुए संसदीय चुनावों के प्रमाणित नतीजों को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बुधवार को कानूनी रूप से बाध्यकारी स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श बैठकें शुरू कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस कदम को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उन कोशिशों के लिए झटका माना जा रहा है, जिनके जरिए वह चुनाव नतीजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे थे। चुनाव में नेतन्याहू और उनके सहयोगी दल संसद यानी नेसेट में अपना बहुमत गंवा चुके हैं, जबकि अरब नेतृत्व वाले दलों ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। हर्जोग ने कहा, ''चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब वास्तविकता का सामना करने का समय है।''
चुनाव आयोग को नहीं मिले धांधली के सबूत
इजरायल के चुनाव आयोग ने बुधवार को कहा कि चुनाव में धांधली के सभी आरोपों की विस्तृत जांच की गई, लेकिन उसे ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो या नतीजे बदले हों। आयोग के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहल्बर्ग ने कहा कि फिलहाल विदेशी हस्तक्षेप के आरोप केवल संदेह हैं। अगर ये आरोप सही भी साबित होते हैं, तब भी उनके चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की संभावना सीमित है। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव परिणामों पर संदेह पैदा करना खतरनाक है। जनता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा तोड़ना आसान, लेकिन उसे दोबारा कायम करना बेहद मुश्किल है।
नई सरकार के गठन के लिए दलों से बातचीत
27 अक्टूबर को हुए चुनाव में न तो नेतन्याहू के गठबंधन को और न ही उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एवं विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के सहयोगी दलों को स्पष्ट बहुमत मिला। इससे नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक समीकरण जटिल हो गए हैं। ऐसी संभावना भी बन रही है कि आइजेनकोट अरब नेतृत्व वाले कुछ दलों के साथ गठबंधन कर सकते हैं। बुधवार को तीन दलों ने नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की, जबकि एक अन्य दल ने आइजेनकोट का समर्थन किया। गुरुवार को आठ और दलों के राष्ट्रपति से मिलने का कार्यक्रम है। इनमें अरब नेतृत्व वाले दो दल भी शामिल हैं।
सभी दलों से बातचीत के बाद राष्ट्रपति हर्जोग उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके पास गठबंधन बनाने की सबसे अधिक संभावना होगी। इसके बाद सरकार गठन के लिए कई सप्ताह तक बातचीत चल सकती है। यदि दोनों में से कोई भी नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता है, तो अगले साल की शुरुआत में दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं।
