Iran US Talks Suspended: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच जारी ऐतिहासिक कूटनीतिक वार्ता सोमवार को उस समय अचानक गहरे संकट में आ गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद आक्रामक और धमकी भरी टिप्पणी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक से वॉकआउट (Walkout) कर दिया। हालांकि, इस भारी तनाव के बीच राहत की बात यह रही कि वार्ता को अस्थायी रूप से स्थगित करने से पहले दोनों देश एक महत्वपूर्ण प्रारूप समझौते पर सहमति बनाने में कामयाब रहे।
क्या थी ट्रंप की धमकी, जिससे भड़का ईरान?
स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता सोमवार सुबह तक जारी रहने की उम्मीद थी। लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए इंटरव्यू में एक ऐसी चेतावनी दे डाली जिसने बातचीत की मेज पर बारूद का काम किया। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि 'यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत दोबारा नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान पर बमबारी कर सकता है और यहां तक कि ईरानी वार्ताकारों का अपहरण भी कर सकता है।'
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस अपमानजनक संदेश और धमकी भरी टिप्पणियों के सार्वजनिक होते ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल का पारा चढ़ गया और उन्होंने विरोध स्वरूप चतुष्कोणीय बैठक को आगे बढ़ाने से साफ इनकार करते हुए वॉकआउट कर दिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने माना कि अमेरिकी रुख के कारण वार्ता एक बेहद कठिन दौर में पहुंच गई है।
वॉकआउट से पहले 'प्रारूप समझौते' पर बनी सहमति?
तनाव के बावजूद, वार्ता स्थल छोड़ने से ठीक पहले ईरान और अमेरिका के बीच प्रतिबंधों में राहत को लेकर एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmail Baghaei) ने आधिकारिक बयान जारी कर समझौते के सकारात्मक पहलुओं की जानकारी दी:
तेल निर्यात और फंसी संपत्ति पर प्रगति: इस्माइल बघाई ने बताया कि वार्ता के दौरान ईरानी तेल की बिक्री के लिए जरूरी परमिट जारी करने और विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों (Assets) को मुक्त कराने को लेकर गंभीर चर्चा हुई, जिसमें काफी अच्छी प्रगति हुई है। जल्द ही तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों में बड़ी छूट मिल सकती है।
अंतिम समझौते का खाका तैयार: प्रवक्ता के अनुसार, 'अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू करने की जमीन तैयार कर ली गई है। इस ज्ञापन (MoU) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जो भी तकनीकी मुद्दे जरूरी हैं, उन पर दोनों देशों की तकनीकी टीमें कल भी अपना काम जारी रखेंगी। इस स्तर पर मुख्य राजनयिक प्रतिनिधिमंडल का काम पूरा हो चुका है।'
युद्ध रोकने की शर्त: ईरान ने साफ किया है कि इस फाइनल कूटनीति के शुरू होने के लिए लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी युद्ध का पूरी तरह से अंत होना अनिवार्य है।
अब आगे क्या?
ट्रंप की धमकी ने इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर अनिश्चितता के बादल जरूर मंडरा दिए हैं, लेकिन ईरान की तरफ से तकनीकी टीमों को काम जारी रखने की अनुमति देना यह दिखाता है कि वह भी पूरी तरह दरवाजे बंद करने के मूड में नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका अपने कड़े रुख में थोड़ी नरमी लाएगा ताकि इस अस्थायी रूप से स्थगित हुई वार्ता को दोबारा शुरू किया जा सके।
