Iran Missile Tunnel Reopens: अमेरिकी फाइटर जेट्स और इजरायली हमलों का दम ईरान की खुफिया 'मिसाइल सिटी' के आगे बेअसर साबित होता दिख रहा है। हालिया संघर्ष के दौरान जिन अंडरग्राउंड (भूमिगत) मिसाइल ठिकानों और बंकरों को अमेरिकी और इजरायली बमबारी ने मलबे में तब्दील कर दिया था, ईरान ने सीजफायर (युद्धविराम) की आड़ में उन्हें युद्धस्तर पर दोबारा चालू कर लिया है। हाल ही में सामने आईं ताजा सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Images) से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि हमलों में बंद हो चुके कुल 69 टनल गेट्स (सुरंग के रास्तों) में से 50 गेट्स को ईरान ने फिर से एक्टिवेट कर लिया है।
सिर्फ बुलडोजर और ट्रकों के सहारे खड़ी की 'अंडरग्राउंड दुनिया'
रक्षा विशेषज्ञों को सबसे ज्यादा हैरान ईरान की रफ्तार ने किया है। बिना किसी भारी तामझाम के, सिर्फ साधारण बुलडोजर, कंस्ट्रक्शन ट्रकों और स्थानीय मजदूरों के सहारे तेहरान ने अपने सबसे बड़े भूमिगत मिसाइल बेस का पुनर्निर्माण कर लिया है। सैटेलाइट इमेज से साफ पता चलता है कि ईरान ने सबसे पहले इन मिसाइल ठिकानों को जोड़ने वाली रणनीतिक सड़कों को सुधारा, ताकि भारी मिसाइलों और सैन्य साजो-सामान की आवाजाही तुरंत शुरू की जा सके। मलबे को साफ करके टनल के रास्तों को दोबारा मिसाइल लॉन्चिंग के लिए तैयार कर दिया गया है।
69 में से 50 टनल गेट फिर से हुए चालू
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दिनों हुए भीषण हवाई हमलों में ईरान के इस सबसे बड़े अंडरग्राउंड नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद लगभग 69 टनल एंट्रियों (सुरंग के द्वारों) को ब्लॉक या तबाह घोषित कर दिया गया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं और सैटेलाइट ट्रैकिंग के अनुसार, ईरान ने बेहद चालाकी से इनमें से 50 एंट्री पॉइंट्स को दोबारा पूरी तरह आपरेशनल (चालू) कर लिया है। यह इस बात का सबूत है कि ईरान का मिसाइल कमांड ढांचा हमलों के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित और एक्टिव है।
सीजफायर का फायदा उठाकर मजबूत की कंक्रीट की दीवारें
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता और अस्थायी सीजफायर के समय का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को री-बिल्ड (दोबारा मजबूत) करने में किया है। बंकरों और टनल के मुहानों को और अधिक मजबूत कंक्रीट से दोबारा ढाला जा रहा है ताकि भविष्य में होने वाले 'बंकर बस्टर' मिसाइल हमलों को भी झेला जा सके। अमेरिका और इजरायली खुफिया एजेंसियां ईरान की इस त्वरित रीकंस्ट्रक्शन स्पीड को देखकर हैरान हैं और इसे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा के लिए एक नया खतरा मान रही हैं।
