बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के ब्रिक्स समिट से पहले भारत दौरे की संभावना 'बहुत कम' है और यह मामला भारतीय नेतृत्व की 'सोच में बदलाव' पर निर्भर करेगा; यह बात रहमान के एक करीबी सहयोगी ने कही है। प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने सरकारी समाचार एजेंसी BSS को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर दोनों देशों के बीच 'आम सहमति से सही माहौल' बनता है, तो बांग्लादेश ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए 'सकारात्मक रवैया' दिखाएगा।
कबीर की ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत इस महीने भारत की संभावित द्विपक्षीय यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय यात्रा और बिम्सटेक (BIMSTEC) समूह के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने, दोनों के लिए आमंत्रित किया है।
बंगाली में छपे एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट होना जरूरी है कि भारत, बांग्लादेश की उस चुनी हुई सरकार के साथ किस तरह के संबंध बनाना चाहता है जिसे जनता का दो-तिहाई जनादेश मिला है। राष्ट्रीय हितों से हटकर जल्दबाजी में शिखर सम्मेलन के लिए यात्रा करने का कोई औचित्य नहीं है।' 'जब तक खास मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति और सम्मानजनक निमंत्रण के आधार पर सही माहौल नहीं बनता, तब तक आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री के भारत दौरे की संभावना बहुत कम है।'
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भारतीय मीडिया में चल रही 'अटकलों' का जिक्र किया
कबीर ने 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले रहमान के दौरे के बारे में भारतीय मीडिया में चल रही 'अटकलों' का जिक्र किया और कहा कि बांग्लादेश ने 'फिलहाल जल्दबाजी न करने और अपने खास राष्ट्रीय हितों को बनाए रखने की नीति अपनाई है।' उन्होंने आगे कहा, 'हालांकि, अगर दोनों देशों की सहमति से सही माहौल बनता है, तो ढाका आने वाले ब्रिक्स समिट में शामिल होने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाएगा।' कबीर, जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में अंतरराष्ट्रीय मामलों के संयुक्त महासचिव भी हैं, ने कहा कि रहमान की यात्रा के बारे में भारतीय मीडिया में आई खबरें 'बेबुनियाद और अटकलों पर आधारित' हैं।
जिनकी वजह से शेख हसीना की सरकार गिर गई थी
कहा, 'दोनों देशों के बीच संबंध और बांग्लादेश सरकार के प्रमुख की हाई-लेवल यात्रा, भारत के मौजूदा नेतृत्व की सोच या नजरिए में बदलाव पर निर्भर करती है। पड़ोसी देश को जुलाई में बांग्लादेश में हुए उस बड़े जन-आंदोलन की सच्चाई को सही ढंग से समझना चाहिए, जिसमें करीब 1,500 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी।' उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए उन विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र किया, जिनकी वजह से शेख हसीना की सरकार गिर गई थी।
बांग्लादेश ने उनके प्रत्यर्पण की मांग फिर से दोहराई है
अगस्त 2024 में ढाका से भागने के बाद से हसीना भारत में स्वेच्छा से निर्वासित जीवन बिता रही हैं। भारत में उनकी मौजूदगी और भारतीय धरती से BNP सरकार की आलोचना करने वाले उनके बयानों ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है। बांग्लादेश ने उनके प्रत्यर्पण की मांग फिर से दोहराई है, जबकि भारत का कहना है कि इस मामले की जांच कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
