कोरोना संकट : WHO ने वैक्‍सीनेशन को लेकर कही बड़ी बात, सितंबर तक हर मुल्‍क में 10 फीसदी टीकाकरण को बताया जरूरी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 2, 2021, 06:55 AM IST

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रसेयस ने कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए सितंबर तक हर देश में कम से कम से 10 फीसदी आबादी के टीकाकरण को जरूरी बताया है।

कोरोना संकट : WHO ने वैक्‍सीनेशन को लेकर कही बड़ी बात, सितंबर तक हर मुल्‍क में 10 फीसदी टीकाकरण को बताया जरूरी
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लंदन : दुनियाभर में कोरोना महामारी के बीच टीकाकरण का काम जोरशोर से जारी है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रसेयस ने कहा है कि वैक्‍सीनेशन इस महामारी को काबू करने और अर्थव्‍यस्‍था में नई जान फूंकने के लिए बेहद अहम है। उन्‍होंने सितंबर तक दुनिया के प्रत्‍येक देश में कम से कम 10 फीसदी आबादी के टीकाकरण को जरूरी बताया है।

वर्चुटल तरीके से आयोजित आयोजित इंडिया ग्लोबल फोरम में डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने टीके तक विभिन्‍न देशों की पहुंच में असमानता का जिक्र करते हुए कहा कि इससे महामारी का जोखिम बढ़ रहा है। उन्‍होंने कहा, 'कुछ देश टीकाकरण में काफी आगे निकल गए हैं, जबकि कई अन्य देशों के पास अपने स्वास्थ्य कर्मियों, वृद्ध लोगों और अत्यधिक जोखिमग्रस्त समूहों के लिए भी टीके नहीं हैं।'

'स‍ितंबर तक 10 फीसदी टीकाकरण है जरूरी'

उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ देशों में टीकाकरण नहीं हो पाने से अन्‍य देशों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। उन्‍होंने इस साल के सितंबर तक प्रत्‍येक देश में कम से कम 10 फीसदी आबादी के टीकाकरण और अगले साल के मध्य तक 70 प्रतिशत आबादी के टीकारकण को जरूरी बताया और विभिन्‍न देशों से इस दिशा में वैश्विक पहल करने की अपील की।

डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख ने कहा कि न्यायसंगत तरीके से टीकाकरण के जरिये ही महामारी को काबू किया जा सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी जा सकती है। उन्‍होंने कहा कि जब तक हर जगह से इस महामारी को खत्म नहीं कर दिया जाता, इसे कभी खत्‍म नहीं किया जा सकेगा। 

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रमपुख का यह बयान ऐसे समय में आया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के विभिन्न देशों में कोविड टीकारण की दर असमान है और कई देशों में आबादी के एक प्रतिशत से भी कम हिस्से का टीकाकरण हुआ है, जबकि कुछ देशों में यह 60 प्रतिशत से अधिक है।

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