यूक्रेन से रूस और फ्रांस से पुर्तगाल तक, जानिए भारतीय विदेश नीति ने कैसे हासिल की UNGA में जबरदस्त तारीफ

दुनिया
किशोर जोशी
Updated Sep 26, 2022 | 10:13 IST

संयुक्त राष्ट्र महासभा के चालू सत्र में भारत की विदेश और आर्थिक नीतियों की जमकर तारीफ की गई है। कई देशों ने खुले मंच से भारत का समर्थन किया।

From Ukraine to Russia to France, Modi's India wins global praise at UNGA
यूएन के चालू सत्र में भारत की जमकर हुई तारीफ 
मुख्य बातें
  • यूएन के चालू सत्र में भारत की जमकर हुई तारीफ
  • रूस ने एक बार फिर किया भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन
  • कोरोना काल में भारत की वैक्सीन मैत्री अधिकांश देशों ने किया समर्थन

न्यूयॉर्क : संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के चालू सत्र में  कई विकासशील और विकसित देशों  भारत की आर्थिक और विदेश नीति की जमकर प्रशंसा की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित विश्व के दिग्गज नेताओं ने एक सुर में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को सकारात्मक रूप में संदर्भित किया है।

यूएन ने की तारीफ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी स्वीकार किया कि भारत सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फ्रांस, जमैका और पुर्तगाल जैसे देशों ने भी भारत की जमकर तारीफ की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए पीएम मोदी की टिप्पणी का जिक्र करते हुए फ्रांस के राष्ट्रप मैक्रो ने भारत की जमकर तारीफ की। दरअसल पुतिन के साथ मुलाकात में पीए मोदी ने कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है

फ्रांस ने कही ये बात

समरकंद में हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान पीएम मोदी और पुतिन की बातचीत का जिक्र करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने  कहा, 'यह पश्चिम से बदला लेने या पूर्व के खिलाफ पश्चिम का विरोध करने के लिए नहीं है। यह हमारे समान संप्रभु राज्यों के लिए सामूहिकता का समय का समय है। चुनौतियों का सामना करने के लिए हम बैठे हैं।'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने 'इंडिया-यूएन पार्टनरशिप इन एक्शन' की प्रदर्शनी पर एक विशेष 'इंडिया@75' कार्यक्रम के लिए अपने संदेश में रेखांकित किया कि इतिहास में सबसे बड़ी युवा पीढ़ी के घर के रूप में, भारत सतत विकास लक्ष्य की सफलता में निर्णायक होगा।  गुटेरेस ने कहा 'भविष्य में भारत इतिहास में सबसे बड़ी युवा पीढ़ी का घर होगा और सतत विकास लक्ष्यों की सफलता में निर्णायक होगा।'

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रूस ने किया स्थायी सदस्यता का समर्थन

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात के एक घंटे के भीतर भारत का यूएन में स्थायी सीट के लिए "स्पष्ट रूप से" समर्थन किया। यूएनजीए सत्र को संबोधित करते हुए, रूसी एफएम सर्गेई लावरोव ने कहा कि उनका देश भारत को 'प्रमुख वैश्विक साझीदार' के रूप में देखता है और एक परिषद के भीतर स्थायी सदस्यता के लिए योग्य उम्मीदवार मानता है।'

जमैका ने कही ये बात

भारत की प्रशंसा करने वालों में अन्य उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि जमैका की विदेश मंत्री कामिना जे स्मिथ थीं, जिन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान सहायता के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। स्मिथ ने कहा कि किंग्स्टन महामारी के दौरान टीकों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार और उसके लोगों का आभारी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक विश्वसनीय भागीदार है। उन्होंने कहा, 'शुरू से ही, भारत एक विश्वसनीय भागीदार था जिसकी सहायता महामारी से निपटने के लिए महत्वपूर्ण थी। भारत ने अन्य देशों को वैक्सीन देने वाली कूटनीति रणनीति को अपनाया। जमैका भारत से अपनी पहली जीवन रक्षक टीके हासिल करने में सक्षम हुआ था।'

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गुयाना के विदेश मंत्री ह्यूग हिल्टन टॉड ने भी UNGA में भारत की सराहना की। उन्होंने कहा, 'गुयाना जैसे छोटे देशों को भारत के विकास पथ से अत्यधिक लाभ हुआ होगा क्योंकि यह हमेशा एक ऐसी अर्थव्यवस्था रही है जो मानव विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, मनुष्य को विकास के किसी भी अन्य रूप से आगे रखती है।'

पुर्तगाल ने की तारीफ

गुरुवार को पुर्तगाली प्रधान मंत्री एंटोनियो कोस्टा ने यूएनएससी सुधार का आह्वान किया जिसमें कहा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत, ब्राजील और अफ्रीका महाद्वीप का प्रतिनिधित्व शामिल होना चाहिए। महासभा को संबोधित करते हुए, कोस्टा ने एक सुरक्षा परिषद की वकालत करते हुए कहा कि जिसमें सुरक्षा का व्यापक दृष्टिकोण शामिल हो और छोटे देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

संयुक्त राष्ट्र सुधारों के लंबे समय से लंबित मुद्दों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच संयुक्त राष्ट्र सुधारों के मुद्दे पर एक बदलाव आया है। जयशंकर ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुधारों के मुद्दे पर बदलाव को महसूस किए हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हर किसी ने एक बदलाव महसूस किया।'

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