'एक दिन में 10-15 पुरुषों से बनाने पड़ते थे शारीरिक संबंध', जानिए 'सेक्स स्लेव्स' की अंतहीन कहानी

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों के लिए सेक्स स्लेव के रूप में काम करने के लिए हजारों की संख्या में महिलाओं को अगवा किया गया था।

South Korean victims of wartime sexual slavery Seoul Court Orders Japan to Compensate Sex Slaves
'एक दिन में 10-15 पुरुषों से बनाने पड़ते थे शारीरिक संबंध' 

मुख्य बातें

  • दक्षिण कोरिया की सेक्स स्लेव की अंतहीन कहानी जानकर आप भी हो जाएंगे भावुक
  • 1930 के शुरूआती दशक से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने तक अगवा की गई हजारों महिलाएं और लड़कियां
  • हाल ही में दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने दिया है अपना अनूठा फैसला

नई दिल्ली: कांग चुल 16 साल की थी, जब जापानी सैन्य पुलिस के जवान दक्षिण कोरिया स्थित उसके घर पहुंची और इसके बाद वह कांग को चीन लेकर चले गए। अपने साथ हुए खौफनाक मंजर को याद करते हुए कांग बताती हैं, "मुझे एक छोटे से कमरे के अंदर रखा गया और एक दिन में 10 से 20 सैनिकों के साथ सोने के लिए मजबूर किया गया। जापानियों ने सब कुछ ले लिया; वह सब कुछ जो हमारे कीमती था, यहां तक की चावल भी।  उस समय चावल मूल्यवान था क्योंकि हमारे पास खाने तक का भोजन नहीं था। उन्होंने हर कुछ नष्ट कर दिया।'

द्वितीय विश्व युद्ध तक हजारों महिलाओं का हुआ शोषण
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, ये कहानी हैं कांग चुल की जो अब 92 साल की हो गई हैं। 1930 के शुरूआती दशक से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने तक जापान के कब्जे वाले क्षेत्रों में जापान की इंपीरियल आर्मी द्वारा दक्षिण कोरिया की हजारों महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए वेश्यालय में रहने के लिए मजबूर किया गया। इनमें एशिया प्रांत की हजारों महिलाएं और लड़किया शामिल थीं जिन्हें सेक्स के लिए मजबूर किया जाता था और इन्हें 'कंफर्ट वुमन' कहा जाता था। 92 साल की कांग 'द हाउस ऑफ शेयरिंग' के कॉम्प्लेक्स के भीतर स्थित अपने घर के एक कोने में बैठकर अपने अनुभव याद करती हैं।

बनाया था सेक्स दासी

 पिछले दो दशक में वो कई बार अपने अनुभव याद करते हुए भावकु हो जाती हैं। विश्व युद्ध के कई वर्षों तक सेक्स स्लेव के इस पहलू को तब तक छिपाया गया था। इन सेक्स दासियों में से अब केवल 16 ही बचे हैं जिनमें से पांच वर्तमान में 'हाउस ऑफ शेयरिंग' में रहते हैं। इस हफ्ते, 8 जनवरी को, सियोल की एक अदालत ने फैसला सुनाया कि इन सेक्स दासियों को मुआवजा दिया जाए। गौर करने वाली बात ये है कि 16 में से 12 की मौत अदालत के फैसले के इंतजार में पहले ही हो चुकी है।

वेश्यावृत्ति के लिए किया गया मजबूर

 94 वर्षीय ली सियोन, ’हाउस ऑफ शेयरिंग’ के भीतर एक पुराने बिस्तर पर लेटी हैं। वो बताती हैं। 'मुझे उल्सान से अगवा कर लिया गया और चीन ले जाया गया। मुझे जापानी सैनिकों द्वारा सेक्स स्लेव बनने के लिए मजबूर किया गया।'  जिस समय ली को वेश्यावृत्ति के मजबूर किया गया तब उनकी उम्र महज 14 साल की थी।  द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद भी उसे जबरन वहां रखा गया। ली 2000 में कोरिया लौटी। ली बताती हैं, 'जन्म के बाद से मुझे हर कुछ याद है। जापानी सैनिकों द्वारा चीन जाने के लिए ट्रेन में रखा गया था। यह कठिन समय था। मैंने सैनिकों से कहा कि मुझे घर जाने दो, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। मुझे नहीं पता था कि मुझे सेक्स स्लेव बनाया जा रहा है। जब मुझे पता चला, मैं मरना चाहती थी।'

एक दिन में 10-15 पुरुषों के साथ संबंध

ली कहती हैं कि मुझे 1945 में छुड़ाए जाने तक तीन साल तक हर दिन 10 से 15 पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने को मजबूर किया जाता था। मुझे नहीं पता कि कितने पुरुषों ने मेरे साथ यौन संबंध बनाए होंगे।  1945 के बाद ली वापस घर जाना चाहती थी लेकिन ऐसा हो ना सका। ली जैसी ना जाने कितनी और महिलाएं हैं जो अब इस दुनिया में हैं ही नहीं।

कोर्ट ने दिया है फैसला

आपको बता दें कि दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने शुक्रवार को जापान को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों के लिए सेक्स स्लेव के रूप में काम करने के लिए मजबूर हुई 12 दक्षिण कोरियाई महिलाओं को आर्थिक रूप से क्षतिपूर्ति करने का आदेश दिया है। सियोल की एक अदालत ने जापान सरकार को मुआवजे के रूप में युद्धकालीन हर यौन दासियों को 100 मिलियन डॉलर (91,340 अमेरिकी डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है।इस फैसले के बाद एशियाई पड़ोसियों के बीच दुश्मनी फिर से बढ़ने की उम्मीद है। जापान ने तुरंत फैसले का विरोध किया और कहा कि 1965 की संधि के तहत सभी युद्धकालीन मुआवजे के मुद्दों को हल किया जा चुका है।

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