Al-Zawahiri : जानें अलजवाहिरी के खात्मे की इनसाइड स्टोरी,  CIA की नजरों से बच नहीं पाया, लादेन जैसा हुआ हाल 

Al Zawahiri dead : अलकायदा के सरगना अलजवाहिरी का खात्मा हो गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपने ऑपरेशन में काबुल में उसे मार गिराया। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक सेफ हाउस में वह अपने परिवार के साथ छिपा हुआ था।

 Know inside story of Alzawahiri's end Couldn't escape eyes of CIA
सीआईए के ऑपरेशन में मारा गया अलजवाहिरी। 
मुख्य बातें
  • अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया अलकायदा का सरगना अलजवाहिरी
  • अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक सेफ हाउस में छिपा हुआ था
  • सीआईए ने बेहद सफलतापूर्वक इस कठिन ऑपरेशन को दिया अंजाम

Al Qaeda leader Ayman al-Zawahiri : आतंकवादी संगठन अलकायदा (Al Qaeda)का सरगना अलजवाहिरी (Ayman al-Zawahiri) अमेरिकी ड्रोन हमले (America Drone strike) में मारा गया है। वह अपने परिवार के साथ अफगानिस्तान की राजधानी काबुल (Kabuk) में एक सेफ हाउस (Safe House) में छिपा हुआ था। हालांकि, लाख कोशिशों के बावजूद वह अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) की नजरों से बच नहीं पाया और उसका भी हश्र अपने आका ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden) की तरह हुआ। 9/11 और 2011 में लादेन के मारे जाने के बाद वह छिपा फिर रहा था। कभी उसे पाकिस्तान एवं कभी अफगानिस्तान में देखे जाने की बातें सामने आती रहीं। काबुल स्थित इस सेफ हाउस को भी दुनिया की नजरों से बचाकर रखने का पूरा इंतजाम किया गया था। घर की गतिविधियां बाहर से नजर न आएं, इसके लिए इमारत को हरे रंग की तिरपाल से ढंका गया था। 

कभी पाकिस्तान तो कभी अफगानिस्तान में देखे जाने की बात
जवाहिरी को मारने वाले अभियान के बारे में जानकारी रखने वाले अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कई बातें बताई हैं। अधिकारी ने बताया है कि जवाहिरी को ट्रैक करने और उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए सीआईए सहित खुफिया एजेंसियों ने बारीकी एवं गोपनीयता से काम किया। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारी ने बताया कि अपने सिर पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित होने से पहले ही जवाहिरी छिपता फिर रहा था। उसके ठिकाने की तलाश के लिए सीआईए के एजेंट्स दिन रात एक किए हुए थे। इस दौरान उसके ठिकानों को लेकर मीडिया में अलग अलग दावे किए जाते रहे। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि वह पाकिस्तान के कबायली इलाकों में देखा गया तो कुछ में कहा गया कि वह अफगानिस्तान में है।  

सेफ हाउस पर सीआईए की नजर महीनों से थी
वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अफगानिस्तान से निकलने के बाद खुफिया एजेंसियों के अधिकारी देश में अल कायदा की मौजूदगी एवं उसके नेटवर्क पर लगातार करीबी नजर रखे हुए थे। इसी साल अधिकारियों ने जवाहिरी की पत्नी, उसकी बेटी और बच्चों की पहचान की। काबुल के इसी सेफ हाउस में आतंकी सरगना का परिवार छिपा हुआ था। बाद में पता चला कि जवाहिरी भी इसी घर में रहता है। 

अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने बाइडेन को ब्रीफ किया
नाम उजागर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि पिछले कई महीनों से खुफिया एजेंसी के अधिकारी इस घर पर करीबी नजर बनाए हुए थे और उन्होंने इस ठिकाने के बारे में और पुख्ता जानकारी जुटाई। अप्रैल की शुरुआत में खुफिया जानकारियों से यह पुख्ता हो गया कि इस घर में जवाहिरी अपने परिवार के साथ रहता है। इसके बाद से ही जेक सुलिवन, एनएसए सहित अन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को ब्रीफ करना शुरू कर दिया। 

इमारत को नुकसान नहीं पहुंचे इसका ध्यान रखा गया 
अधिकारी ने कहा कि काबुल स्थित इस सेफ हाउस में जवाहिरी के आ जाने पर अधिकारियों ने कई मौकों पर बालकनी में उसकी पहचान सुनिश्चित की। एक बार यह तय हो जाने पर कि घर में जवाहिरी और उसका परिवार है, अधिकारियों ने इस सेफ हाउस के निर्माण के बारे में पूरी जानकारी जुटाई। अभियान की प्लानिंग करते समय इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि इमारत और आतंकी सरगना के परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। 

गत एक जुलाई को सिचुएशन रूम में बैठक
अधिकारी ने आगे बताया कि हाल के सप्ताहों में अभियान के सबसे बेहतर विकल्प एवं तरीके पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति ने अपने मुख्य सलाहकारों एवं कैबिनेट के सहयोगियों के साथ बैठकें एवं चर्चा की। गत एक जुलाई को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में सीआईए के डायरेक्टर विलियम बर्न्स सहित कैबिनेट के सदस्यों ने प्रस्तावित ऑपरेशन की जानकारी बाइडेन को दी। इस बैठक में राष्ट्रपति ने ऑपरेशन को लेकर कई तरह के सवाल किए। उन्होंने सेफ हाउस के मॉडल को बारीकी से देखा। 

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बाइडेन ने सटीक एयरस्ट्राइक की मंजूरी दी
गत 25 जुलाई को राष्ट्रपति ने अपनी कैबिनेट के अहम सदस्यों एवं सलाहकारों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्हें अभियान के बारे में फाइनल ब्रीफिंग दी गई। इस बैठक में बाइडेन को जवाहिरी को मारने वाले अभियान के बारे में जानकारी दी गई। बैठक में बाइडेन ने एक सटीक एयर स्ट्राइक की इजाजत दी। साथ ही उन्होंने शर्त रखी कि इस अभियान में कम से कम नागरिकों के हताहत होने का जोखिम होना चाहिए। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सीआईए ने 30 जुलाई की रात नौ बजकर 48 मिनट पर हमले को अंजाम दिया। 

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