वायरल न्यूज़

पुरी जगन्नाथ मंदिर के ऊपर नीलचक्र पर दिखी चील, वायरल हुआ VIDEO

ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र पर एक चील के बैठने का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। सभी इस वीडियो को लेकर अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

Image

पुरी जगन्नाथ मंदिर के ऊपर नीलचक्र पर दिखी चील (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)

नई दिल्ली: ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र पर किसी चील के बैठने की बात एक दुर्लभ और अप्रत्याशित घटना है। पंडितों और कुछ जानकारों का मानना है कि यह एक अपशकुन नहीं, बल्कि जगन्नाथ महाप्रभु की लीला का ही एक हिस्सा है, जो शुभ माना जाता है। जबकि अन्य इसे एक संकेत या संयोग के रूप में देख रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार पक्षी कुछ देर तक भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपर उड़ता रहा और फिर उड़ने से पहले पतितपावन बाना पर कुछ देर विश्राम किया। इस दौरान उत्साही भक्त इस असामान्य घटना की तस्वीरें लेने से नहीं चूके।

यद्यपि श्रीमंदिर से संबंधित ऐसी घटनाओं को ओडिशा में व्यापक रूप से अशुभ माना जाता है, लेकिन भगवान जगन्नाथ के कुछ भक्तों का मानना है कि यह भगवान का संकेत है कि और वे रक्षा के लिए वहां मौजूद हैं। जानकारो के मुताबिक यदि पतितपावन ध्वज पर चील बैठी हो तो भगवान जगन्नाथ मंदिर के दैनिक अनुष्ठान प्रभावित नहीं होते।

इससे पहले इसी साल अप्रैल में एक चील को जगन्नाथ मंदिर का पतितपावन बाना (ध्वज) लेकर उड़ते देखा गया था। बताया जा रहा है कि तब वह वीडियो वायरल हो गया था।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

और पढ़ें
End of Article