BHU: विरोध के बाद VC ने हॉस्पीटल में छात्रों को मुफ्त में इलाज कराने की दी अनुमति, महामना पर की थी ये टिप्पणी

बीएचयू के वीसी ने छात्रों को यूनिवर्सिटी हॉस्पीटल में मुफ्त में इलाज करवाने का आदेश दे दिया है। उन्होंने महामना पर विवादित टिप्पणी की थी जिसके बाद छात्रों ने इसका विरोध किया था इसके बाद VC ने ये आदेश जारी किया।

BHU
बीएचयू 

मुख्य बातें

  • बीएचयू के वीसी ने छात्रों को अस्पताल में मुफ्त में इलाज कराने की दी अनुमति
  • उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय पर की थी विवादित टिप्पणी
  • एक छात्र के साथ टेलीफोनिक वार्ता का ऑडियो वायरल होने पर हुआ था विरोध

वाराणसी : बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राकेश भटनागर ने छात्रों को यूनिवर्सिटी हॉस्पीटल में मुफ्त में इलाज करवाने की अनुमति दे दी। दरअसल बीएचयू के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय के ऊपर विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद छात्र समूह ने भारी विरोध किया था। इसी के बाद गुरुवार देर शाम बीएचयू के वीसी ने छात्रों को हॉस्पीटल के ओपीडी में मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करवाने की अनुमति दे दी।

वीसी ने ये भी कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंचा है। बीएचयू मेरी कर्मभूमि है और महामना मेरे आदर्श हैं। मैं उनके आदर्शों और मूल्यों का अनुकरण करता हूं और उनके लिए मेरे मन में काफी सम्मान है।

उन्होंने आगे कहा कि अपनी स्थापना के साथ ही बीएचयू ने देश निर्माण में एक बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने छात्रों से महामना के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान भी किया साथ ही ये भी कहा कि वैसे छात्र जो दूसरे छात्र के हितों की रक्षा करते हैं वे यूनिवर्सिटी का कर्तव्य निभा रहे हैं।

इससे पहले वीसी के एक छात्र के साथ टोलीफोनिक बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद एबीवीपी और एनएसयूआई के छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में जगह-जगह जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और वीसी के इस्तीफे की मांग की थी।  

ऑडियो क्लिप के मुताबिक स्टूडेंट के साथ बातचीत में वीसी को कहते हुए सुना गया कि महामना ने कैंपस में अनगिनत आम के पेड़ लगाए। अगर उन्होंने पैसों के पेड़ लगाए होते तो हमें सब कुछ मुफ्त में मिल जाता। दरअसल छात्र ने यूनिवर्सिटी हॉस्पीटल में छात्रों के मुफ्त इलाज के लिए वीसी से अनुमति आदेश जारी करने का अनुरोध किया था।

इस पर वीसी ने कहा था कि बजट की कमी के कारण मुफ्त में इलाज संभव नहीं है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी का बिजली बिल सलाना 66 करोड़ का आता है जबकि यूजीसी से 60 करोड़ फंड के तौर पर मिलता है।

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