भारत का अनोखा गांव , जहां नाम नहीं, सिर्फ धुनों से होती है पहचान

Kongthong Meghalaya: अगर आप यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो मेघालय के कोन्थोंग गांव आपकी ट्रैवल बकेटलिस्ट में शामिल हो सकता है। अपनी अनोखी परंपरा के लिए ये गांव जाना जाता है।

Kongthong Meghalaya: इस आर्टिकल के माध्यम से आज आप जानेंगे मेघालय में मौजूद अनोखे गांव कोन्थोंग (Kongthong) के बारे में जिसकी कहानी किसी फिल्म जैसी लगती है। इस गांव की अनोखी परंपरा है यहां लोगों के नाम शब्दों में नहीं बल्कि धुनों में होते हैं। इसलिए इस गांव को व्हिसलिंग विलेज भी कहते हैं। यहां हर इंसान की एक खास धुन होती है, जिसे उसकी मां जन्म के समय बनाती है। यहां की सादगी और अनोखी परंपरा हर यात्री को याद रह जाती है।

Kongthong Meghalaya

भारत का अनोखा गांव

धुनों से बसती है पहचान

इस गांव में लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं बुलाते, बल्कि उनकी खास धुन बजाकर पुकारते हैं। जब कोई किसी को बुलाना चाहता है, तो वह उसकी पहचान वाली धुन गुनगुनाता या सीटी में बजाता है। यहां हर व्यक्ति की एक यूनिक धुन होती है, और मजेदार बात ये है कि दो लोगों की धुन कभी एक जैसी नहीं होती। मतलब हर इंसान की पहचान पूरी तरह अलग और खास होती है।

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