टेक एंड गैजेट्स

मोबाइल रिपेयर कराने जा रहे हैं? कहीं दुकानदार आपसे ज्यादा पैसे तो नहीं वसूल रहा, इन 5 बातों का रखें ध्यान!

मोबाइल खराब होने पर लोकल दुकान पर रिपेयर कराना कई बार महंगा पड़ सकता है। ओरिजिनल पार्ट के नाम पर दूसरा पार्ट लगाने या ज्यादा पैसे वसूलने का खतरा रहता है। फोन ठीक कराने से पहले इन जरूरी बातों को जान लें।

Image

Mobile Repair

आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जरूरत बन गया है। फोन गिरने से स्क्रीन टूट जाए या सॉफ्टवेयर में खराबी आ जाए, तो उसे ठीक कराना जरूरी होता है। ऐसे में कई लोग पैसे बचाने के लिए लोकल रिपेयरिंग शॉप पर चले जाते हैं। लेकिन यहां कभी-कभी ग्राहकों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। दुकानदार ओरिजिनल पार्ट के नाम पर दूसरी क्वालिटी का पार्ट लगा सकता है या रिपेयरिंग के लिए ज्यादा पैसे मांग सकता है। इसलिए फोन ठीक कराने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

ओरिजिनल और कंपैटिबल पार्ट का अंतर समझें

मोबाइल रिपेयरिंग के दौरान दुकानदार आपको ओरिजिनल और कंपैटिबल पार्ट के विकल्प दे सकता है। कंपैटिबल पार्ट का मतलब ऐसा पार्ट है, जिसे फोन के साथ काम करने के लिए बनाया गया है, लेकिन वह जरूरी नहीं कि कंपनी का असली पार्ट हो। दोनों की कीमत में अंतर हो सकता है। इसलिए दुकानदार से साफ पूछें कि फोन में कौन-सा पार्ट लगाया जाएगा। अगर वह ओरिजिनल पार्ट के पैसे ले रहा है, तो उसकी पुष्टि करने के लिए बिल या पार्ट की जानकारी मांगें।

रिपेयरिंग का खर्च पहले ही पूछ लें

फोन ठीक कराने से पहले पता करें कि पार्ट बदलने और उसे लगाने का कुल खर्च कितना होगा। लोकल दुकानों पर हर काम की कीमत एक जैसी नहीं होती। इसलिए संभव हो तो दो-तीन दुकानों से कीमत की तुलना करें। रिपेयरिंग शुरू करने से पहले दुकानदार से कुल खर्च तय कर लें, ताकि फोन लेने के समय अचानक ज्यादा पैसे न देने पड़ें।

कम कीमत के लालच में न आएं

अगर कोई दुकानदार बहुत कम कीमत में महंगी रिपेयरिंग करने का दावा करता है, तो तुरंत भरोसा न करें। कम कीमत का मतलब हमेशा खराब पार्ट नहीं होता, लेकिन पार्ट की क्वालिटी और उसकी वारंटी के बारे में पूछना जरूरी है। सस्ता पार्ट जल्दी खराब हो गया, तो आपको दोबारा रिपेयरिंग पर पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

रिपेयरिंग की वारंटी जरूर पूछें

फोन में नया पार्ट लगवाते समय पूछें कि उस पर कितने दिनों की वारंटी मिलेगी। यह भी स्पष्ट करें कि पार्ट खराब होने पर उसे मुफ्त में बदला जाएगा या दोबारा पैसे देने होंगे। दुकानदार से वारंटी की जानकारी बिल पर लिखवाना बेहतर है। इससे बाद में कोई समस्या आने पर आपके पास सबूत रहेगा।

फोन ठीक होने के बाद बिल लें और जांच करें

रिपेयरिंग पूरी होने पर फोन की स्क्रीन, टच, कैमरा, स्पीकर और चार्जिंग जैसी सुविधाएं चेक करें। अगर डिस्प्ले या बैटरी बदली गई है, तो देख लें कि वह ठीक से काम कर रही है। दुकानदार से बिल जरूर लें, जिसमें रिपेयरिंग और लगाए गए पार्ट की जानकारी हो। फोन की मरम्मत के लिए जमा करने से पहले उसकी मौजूदा स्थिति की तस्वीरें लेना भी उपयोगी हो सकता है।

ऑफिशियल सर्विस सेंटर पर जाना बेहतर है?

अगर फोन वारंटी में है या उसमें महंगा पार्ट बदलना है, तो कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर से कीमत और रिपेयरिंग की शर्तें पता करना अच्छा विकल्प है। वहां रिपेयरिंग की तय प्रक्रिया और उपलब्ध पार्ट्स की जानकारी मिल सकती है। हालांकि, फोन की टूट-फूट हमेशा वारंटी में कवर नहीं होती। इसलिए रिपेयरिंग से पहले खर्च और वारंटी की शर्तें जरूर समझें। थोड़ी-सी सावधानी से आप अपने पैसे और स्मार्टफोन को संभावित नुकसान से बचा सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article