इंटरनेट आज के समय में हमारी एक बेसिक जरूरत बन चुका है। घर हो या ऑफिस हम हर जगह पर इंटरनेट से जुड़े रहते हैं। हमारे डेली रूटीन के कई सारे काम इंटरनेट पर ही निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में अगर इंटरनेट की ग्लोबल आउटेज हो जाए या फिर कनेक्टिविटी पूरी तरह बंद हो जाए तो यह न सिर्फ हमारे लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद कठिन हालात हो जाएंगे। आपको बता दें कि यही खतरा इस समय पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है। दरअसल हाल ही में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC की तरफ से एक हैरान करने वाली चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से गुजरने वाली अंडरसी इंटरनेट डेटा को काटा या फिर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। अगर किसी भी हालात में इस तरह के कदम उठाए जाते हैं तो इससे दुनियाभर के लिए कम्यूनिकेशन का एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।
UAE भौगोलिक रूप से एक ऐसी जगह स्थित है जो पूर्व (एशिया) और पश्चिम (यूरोप) को जोड़ती है। इस क्षेत्र से लगभग 17 प्रमुख सबमरीन केबल्स गुजरती हैं या यहां आकर मिलती हैं। इन्हें आधुनिक युग का "सिल्क रोड" कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं कि अंडरसी केबल्स क्या हैं और कैसे पूरे वर्ल्ड के लिए यह एक लाइफलाइन की तरह हैं।
अंडरसी केबल्स क्या होती हैं?
समुद्र के नीचे बिछीं इंटरनेट केबल्स को अंडरसी केबल्स या फिर Submarine Communications Cables कहा जाता है। ये समुद्र के तल पर बिछाई गईं फाइबर ऑप्टिकल केबल्स होती हैं जिनसे दुनियाभर में इंटरनेट डेटा का करीब 95% हिस्सा ट्रांसमिट होता है। ये अंडरसी इंटरनेट केबल्स एक महाद्वीप को दूसरे महाद्वीप से जोड़ती है जिसकी वजह से हाई स्पीड इंटरने, ईमेल भेजना, फोटो वीडियो डेटा ट्रांसफर करना और अंतर्राष्ट्रीय कॉल कर पाना संभव होता है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि ये अंडरसी केबल्स वैश्विक इंटरनेट और टेलीकम्यूनिकेशन के लिए रीढ़ की हड्डी के समान हैं।
17 अंडरसी केबल्स का जाल
आपको बता दें कि इस समय भारत समेत दुनियाभर के कई सारे देश इस समय समंदर के नीचे बिछीं 17 प्रमुख अंडरसी केबल्स पर निर्भर हैं। लाल सागर में मुख्य रूप से 17 केबल सिस्टम मौजूद हैं जो पूरे एशिया और यूरोप को जोड़ते हैं। आइए आपको इन 17 केबल्स के बारे में बताते हैं।
- SEA-ME-WE-3
- SEA-ME-WE-4
- SEA-ME-WE-5
- SEA-ME-WE-6
- AAE-1 (Asia-Africa-Europe 1)
- Falcon
- Gulf Bridge International (GBI)
- Tata TGN-Gulf
- Asia-America Gateway (AAG)
- Asia Pacific Gateway (APG)
- Asia Submarine-cable Express (ASE)
India Asia Xpress (IAX)- Asia Direct Cable (ADC)
- PEACE Cable
- MIST
- Bifrost
- EAC-C2C
UAE को यूरोप से जोड़ने वाली 17 केबल्स में से कुछ सबसे महत्वपूर्ण ये हैं:
| केबल का नाम | कहाँ से कहाँ तक | महत्व |
| AAE-1 | हांगकांग से फ्रांस (UAE के माध्यम से) | 25,000 किमी लंबी, कम लेटेंसी वाला कनेक्शन। |
| SEA-ME-WE 5 | दक्षिण पूर्व एशिया - मध्य पूर्व - पश्चिमी यूरोप | यह केबल 24Tbps की विशाल क्षमता प्रदान करती है। |
| EIG (Europe India Gateway) | भारत से यूके (UAE में लैंडिंग) | यूरोप और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक डेटा लिंक। |
| 2Africa | वैश्विक महाद्वीप | दुनिया की सबसे लंबी केबल प्रणालियों में से एक, जो अफ्रीका, यूएई और यूरोप को जोड़ती है। |
भारत को दुनिया से जोड़ने वाली प्रमुख अंडरसी केबल्स
भारत में इस समय 17 बड़े अंतरराष्ट्रीय अंडरसी (समुद्र के नीचे बिछे) केबल हैं। ये केबल मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों के जरिए भारत को दुनिया के इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। इनका संचालन दूरसंचार विभाग (DoT) करता है और ये भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं।
- SEA-ME-WE (1, 2, 3, 4, 5): यह केबल सीरीज दक्षिण-पूर्व एशिया,मध्य पूर्व और पश्चिमी यूरोप को जोड़ती है।
- BBG (Bay of Bengal Gateway): यह केबल भारत को सिंगापुर और मलेशिया से जोड़ती है।
- IAX (India Asia Xpress): यह एक उच्च क्षमता वाली केबल है जो भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र (सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया) से जोड़ती है।
- IEX (India
Europe Xpress): यह केबल भारत को मध्य पूर्व और यूरोप (फ्रांस, इटली, ग्रीस) के देशों से जोड़ती है। - AAE-1 (Asia-Africa-Europe 1): यह केबल दक्षिण-पूर्व एशिया को यूरोप के साथ जोड़ती है और भारत इसके प्रमुख केंद्रों में से एक है।
- FLAG (Fiber-Optic Link Around the Globe): यह दुनिया की सबसे लंबी केबल प्रणालियों में से एक है जो भारत के मुंबई और चेन्नई से होकर गुजरती है।
- EIG (Europe India Gateway): यह केबल प्रणाली भारत को सीधे यूरोप से जोड़ने का काम करती है।
- MENA (Middle East North Africa): यह केबल भारत को मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ती है।
- SMW-6 (SEA-ME-WE 6): यह नवीनतम पीढ़ी की केबल प्रणाली है जो भारत को सिंगापुर और फ्रांस के बीच उच्च गति डेटा प्रदान करती है।
- Falcon: यह केबल मध्य पूर्व के देशों को भारत से जोड़ती है।
- IMEWE (India-Middle East-Western Europe): यह केबल प्रणाली विशेष रूप से भारत और यूरोप के बीच डेटा ट्रैफिक के लिए है।
- TGN (Tata Global Network - Gulf): यह टाटा कम्युनिकेशंस द्वारा प्रबंधित केबल है जो खाड़ी देशों को जोड़ती है।
- 2Africa Pearls: यह आगामी बड़ी परियोजनाओं में से एक है जो भारत को अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से जोड़ेगी।
केबल्स की कहानी: यह कैसे काम करती हैं?
समुद्र की गहराइयों में बिछाई गईं ये हैवी अंडरसी केबल्स सिर्फ तार ही नहीं हैं बल्कि ये दुनियाभर के लिए हाई स्पीड डेटा के लिए एक प्रमुख राजमार्ग हैं। अगर इनमें किसी भी तरह की दिक्कत आती है तो पूरी दुनिया का काम मिनटों में ठप पड़ सकता है। इन सबमरीन केबल्स के अंदर पतले ऑप्टिकल फाइबर होते हैं, जिनके चारों ओर स्टील के तार, कॉपर और प्लास्टिक की कई परतें होती हैं। ये इंटरनेट केबल्स पूरी दुनिया में रोशनी की गति से डेटा को ट्रांसफर करती हैं।
विशेष केबल-लेइंग जहाजों के जरिए इन्हें समुद्री तट में बिछाया जाता है। ये जहाज एक दिन में 60 से 90 किलोमीटर तक केबल को बिछा सकते हैं। समुद्री तट के पास इन केबल्स को जमीन में खुदाई करके गाड़ दिया जाता है लेकिन समुद्र के अंदर ये सीधे तल पर ही पड़ी रहती हैं।