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टीवी से लेकर स्मार्टफोन तक सब होने जा रहा है महंगा, समझिए क्या है नया ग्लोबल 'चिप संकट'?

पिछले दो-तीन महीने में भारतीय बाजार में कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन महंगे हुए हैं, लेकिन अब बारी आईफोन की है। एपल के सीईओ टिम कुक ने कहा है कि यदि चिप संकट बरकरार रहा है तो एपल के कई प्रोडक्ट्स महंगे होंगे। आइए समझते हैं कि आखिर चिप को लेकर पूरी दुनिया में संकट क्यों पैदा हो गया है।

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आखिर क्यों हो रहा है मेमोरी चिप का संकट? ये हैं 5 बड़े कारण
Authored by: Pradeep Pandey
Updated Jun 18, 2026, 12:17 IST
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दुनियाभर में इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार एक नए संकट का सामना कर रहा है। मेमोरी चिप की कमी और बढ़ती कीमतों का असर अब मोबाइल फोन, टीवी, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर दिखाई देने लगा है। कई बड़ी टेक कंपनियां संकेत दे चुकी हैं कि अगर चिप की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो ग्राहकों को आने वाले समय में महंगे प्रोडक्ट खरीदने पड़ सकते है। हाल ही में कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन महंगे हुए हैं।

अब Apple के CEO टिम कुक ने भी कहा है कि मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत का असर कंपनी के प्रोडक्ट्स की कीमतों पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि कंपनियां बढ़ती लागत को कम करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति लगातार बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। अब यहां एक सवाल पैदा हो रहा है कि आखिर पूरी दुनिया में मेमोरी चिप का संकट क्यों हो रहा है?

AI की रफ्तार ने बढ़ाई मेमोरी चिप की मांग, कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव

AI की रफ्तार ने बढ़ाई मेमोरी चिप की मांग, कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव

आखिर क्यों हो रहा है मेमोरी चिप का संकट? ये हैं 5 बड़े कारण

1. AI की बढ़ती मांग ने चिप सप्लाई पर बनाया दबाव

मेमोरी चिप संकट का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज रफ्तार से बढ़ती मांग को माना जा रहा है। दुनिया भर में AI सर्वर और डेटा सेंटर तेजी से बनाए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में हाई-पावर मेमोरी चिप की जरूरत होती है। AI कंपनियां हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) जैसी एडवांस चिप्स की बड़ी मात्रा में खरीद कर रही हैं। इसके कारण सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए मेमोरी चिप की उपलब्धता कम हो रही है।

2. चिप बनाने वाली कंपनियों की सीमित उत्पादन क्षमता

मेमोरी चिप बनाना बेहद महंगा और जटिल काम है। इसके लिए अरबों डॉलर की फैक्ट्रियां और अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत होती है। दुनिया में कुछ ही बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर मेमोरी चिप का उत्पादन करती हैं। जब मांग अचानक बढ़ती है तो ये कंपनियां तुरंत उत्पादन नहीं बढ़ा पातीं, जिससे सप्लाई और डिमांड के बीच अंतर बढ़ जाता है।

3. स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग

मोबाइल फोन, स्मार्ट टीवी, गेमिंग डिवाइस, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स में लगातार ज्यादा स्टोरेज और बेहतर परफॉर्मेंस की मांग बढ़ रही है। आज के स्मार्टफोन में पहले की तुलना में ज्यादा RAM और स्टोरेज दी जा रही है। 5G और AI फीचर्स वाले नए डिवाइस में भी ज्यादा मेमोरी की जरूरत होती है। इससे चिप की खपत बढ़ गई है।

4. ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव

कोरोना महामारी के बाद पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। हालांकि हालात सुधरे हैं, लेकिन सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री अभी भी कई चुनौतियों से जूझ रही है। कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन लागत, देशों के बीच व्यापार नियम और भू-राजनीतिक तनाव भी चिप सप्लाई को प्रभावित करते हैं।

5. कंपनियों का AI चिप्स को प्राथमिकता देना

चिप निर्माता कंपनियां ज्यादा मुनाफे वाले AI चिप बाजार पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। AI सर्वर में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप की कीमत सामान्य उपभोक्ता डिवाइस में लगने वाली चिप से ज्यादा होती है। इस वजह से कंपनियों की उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा AI सेक्टर की ओर जा रहा है, जिससे मोबाइल और टीवी जैसे प्रोडक्ट के लिए चिप महंगी हो रही है।

आखिर क्यों हो रहा है मेमोरी चिप का संकट? ये हैं 5 बड़े कारण

आखिर क्यों हो रहा है मेमोरी चिप का संकट? ये हैं 5 बड़े कारण

हीलियम की कमी भी बढ़ा रही है चिप इंडस्ट्री की चिंता

मेमोरी चिप संकट की चर्चा में एक और अहम कारण सामने आ रहा है और वह है हीलियम गैस की सप्लाई पर दबाव। सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने की प्रक्रिया में हीलियम का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण चरणों में किया जाता है। खासतौर पर चिप निर्माण के दौरान मशीनों को ठंडा रखने, उत्पादन प्रक्रिया को स्थिर बनाए रखने और कुछ एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में इसकी जरूरत पड़ती है।

हीलियम की कमी भी बढ़ा रही है चिप इंडस्ट्री की चिंता/photo-ai

हीलियम की कमी भी बढ़ा रही है चिप इंडस्ट्री की चिंता/photo-ai

हीलियम एक दुर्लभ गैस है और इसकी सप्लाई सीमित स्रोतों पर निर्भर करती है। दुनिया के कुछ ही देशों में बड़े स्तर पर इसका उत्पादन होता है। जब सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ रही है और AI चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है, तब हीलियम की मांग भी बढ़ गई है।

भारत में मोबाइल, टीवी और लैपटॉप क्यों हो सकते हैं महंगे?

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए काफी हद तक वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है। बड़ी संख्या में मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट विदेशों से आते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में मेमोरी चिप महंगी होती है तो इसका असर भारतीय कंपनियों की लागत पर भी पड़ता है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत को या तो खुद वहन करती हैं या फिर इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। इसका असर खासतौर पर स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, टैबलेट और स्टोरेज डिवाइस की कीमतों पर पड़ सकता है।

क्या एपल समेत बड़ी कंपनियां कीमत बढ़ाएंगी?

कई टेक कंपनियां अभी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एपल जैसी कंपनियां लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करती हैं, लेकिन अगर मेमोरी चिप की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो प्रोडक्ट महंगे होने की संभावना बढ़ जाती है। एंडस्ट्री एक्सपर्ट का मानना है कि AI इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ के कारण आने वाले समय में मेमोरी चिप की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में कीमतों का दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है।

ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

अगर मेमोरी चिप की कीमतें बढ़ती रहीं तो नए मोबाइल, टीवी और लैपटॉप खरीदने वाले ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है, हालांकि कंपनियां कीमतों को संतुलित रखने के लिए नए सप्लायर और उत्पादन बढ़ाने के विकल्प तलाश रही हैं। मेमोरी चिप संकट सिर्फ एक टेक्नोलॉजी समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है।

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