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Exclusive: 'भारत के लिए खेलने का एहसास कभी खत्म नहीं होगा,' पद्म श्री मिलने के बाद सविता पूनिया ने खुशी का किया इजहार

एफआईएच नेशंस कप में मिली खिताबी जीत और पद्म श्री सम्मान से सम्मानित भारत की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया अभिभूत हैं। उन्होंने टाइम्स नाउ के खास बातचीत करते हुए कहा कि वह आज जो कुछ भी हैं, वह सब हॉकी की बदौलत है। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं की रोल मॉडल बनना चाहती हैं।

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सविता पूनिया को मिला पद्म श्री। फाइल फोटो

करिश्मा सिंह, नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम में डबल उपलब्धि का जश्न है। एक तरफ टीम ने एफआईएच नेशंस कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। वहीं, दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम की दिग्गज गोलकीपर सविता पूनिया को भारत सरकार ने पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया। भारत ने जीत के साथ प्रो लीग में वापसी।

एफआईएच नेशंस कप में मिली खिताबी जीत और पद्म श्री सम्मान से सम्मानित भारत की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने टाइम्स नाउ स्पोर्ट्स की एडिटर करिश्मा से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह आज जो कुछ भी हैं उसकी वजह हॉकी है। उन्होंने कहा कि यह मेरे देश के लिए है। सविता ने कहा कि भारत के लिए खेलने का एहसास कभी खत्म नहीं होगा। वह देश की युवा लड़कियों की रोल मॉडल बनना चाहती है।

'मैं जो कुछ भी हूं, हॉकी की वजह से हूं'

टाइम्स नाउ से बात करते हुए सविता ने कहा, यह मेरे देश के लिए है, हॉकी की वजह से ही आज मैं जो कुछ भी हूं, वो सब मुझे इस खेल ने दिया है। भारत का प्रतिनिधित्व करने का एहसास कभी खत्म नहीं होगा, हर बार रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मेरे लिए खुशी दोगुनी है, क्योंकि मैंने नेशंस कप भी जीता है। मैं सभी महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहता हूं।

द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया मिला है नाम

सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की दिग्गज गोलकीपर और पूर्व कप्तान हैं। अपनी बेहतरीन गोलकीपिंग के कारण उन्हें भारतीय हॉकी की 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' कहा जाता है। हरियाणा के सिरसा के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाने तक उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली वह वंदना कटारिया के बाद दूसरी भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी हैं।

18 साल की उम्र में किया डेब्यू

भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने 18 साल की उम्र में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना डेब्यू किया। उन्होंने 2013 में महिला एशिया कप के आठवें संस्करण में भारत को कांस्य पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई थी और वह 2016 में महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थीं। सविता पूनिया 2016 के रियो ओलंपिक में उस भारतीय टीम में शामिल थीं, जो 36 सालों में पहली बार ओलंपिक का हिस्सा बनी।

2018 में अर्जुन पुरस्कार

2017 में FIH महिला विश्व लीग राउंड 2 में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन के बलबूते पर 'गोलकीपर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब हासिल किया। इसके बाद उन्होंने महिला एशिया कप 2017 में टीम के लिए अहम योगदान दिया, जिससे भारत को 13 साल बाद ट्रॉफी जीतने में मदद मिली। भारतीय गोलकीपर ने जकार्ता-पालेमबांग में 2018 एशियाई खेलों के साथ-साथ महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2018 में भारत की रजत पदक जीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कप्तानी में भारत दिलाए कई पदक

सविता को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 2022 में रानी रामपाल की अनुपस्थिति में टीम का नेतृत्व करने का जिम्मा सौंपा गया था, जो लंबे समय तक चोट के कारण बाहर थीं। साल 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में सविता पूनिया ने अपनी कप्तानी में भारतीय हॉकी को कांस्य पदक दिलाया। उनकी कप्तानी में टीम ने 2023 और 2024 में महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती। वह लगातार तीन साल ( 2022, 2023 और 2024) FIH गोलकीपर ऑफ द ईयर का खिताब जीता। अब उन्होंने पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

    Umesh Kumar
    उमेश कुमारauthor

    उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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