बैडमिंटन के दिग्‍गज हस्‍ती का हुआ निधन, प्रधानमंत्र सहित खेल जगत ने जताया शोक

Nandu M Patekar: नंदू नाटेकर ने 1951 से 1963 के बीच थॉमस कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने 16 में से 12 एकल और 16 में से आठ युगल मुकाबले जीते थे। नंदू नाटेकर का करियर शानदार रहा।

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नंदू नाटेकर  |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • दिग्‍गज बैडमिंटन खिलाड़ी नंदू नाटेकर का 88 की उम्र में हुआ निधन
  • नंदू नाटेकर ने अपने करियर में 100 से ज्‍यादा राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय खिताब जीते
  • नंदू नाटेकर के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर खेलमंत्री व अन्‍य हस्तियों ने शोक जताया

नई दिल्‍ली: दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी नंदू नाटेकर का बुधवार को यहां निधन हो गया। वह 1956 में अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी थे। नाटेकर 88 बरस के थे। अपने करियर में 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले नाटेकर उम्र संबंधित बीमारियों से पीड़ित थे। उनके परिवार में बेटा गौरव और दो बेटियां हैं।

गौरव ने पीटीआई को बताया, 'उनका घर में निधन हुआ और हम सभी उनके साथ थे। वह पिछले तीन महीने से बीमार थे।' अपने समय के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में से एक माने जाने वाले नाटेकर दुनिया के पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी थे। पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली में जन्मे नाटेकर को 1961 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।

नाटेकर परिवार ने बयान में कहा, 'बेहद दुख के साथ हम आपको सूचित करते हैं कि हमारे पिता नंदू नाटेकर का 28 जुलाई 2021 को निधन हो गया। कोविड-19 दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए हम शोक सभा का आयोजन नहीं करेंगे। कृपया अपने विचारों और प्रार्थना में उन्हें याद रखें।' नाटेकर ने 15 साल से अधिक के अपने करियर के दौरान 1954 में प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और 1956 में सेलांगर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

उन्होंने 1951 से 1963 के बीच थॉमस कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने 16 में से 12 एकल और 16 में से आठ युगल मुकाबले जीते थे। उन्होंने जमैका में 1965 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

प्रधानमंत्री ने जताया शोक

भारतीय बैडमिंटन के कई दिग्गज खिलाड़ियों के लिए प्ररेणा रहे नंदू नाटेकर के बुधवार को निधन पर बैडमिंटन जगत ने शोक जताया जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट और टेनिस खेलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी बने नाटेकर का बुधवार को पुणे में निधन हुआ।

अपने करियर के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 से अधिक खिताब जीतने वाले 88 साल के नाटेकर उम्र संबंधित बीमारियों से परेशान थे। वह 1961 में अर्जुन पुरस्कार हासिल करने वाले पहले बैडमिंटन खिलाड़ी थे। नाटेकर के निधन पर शोक जताते हुए मोदी ने कहा कि उनकी उपलब्धियां उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

मोदी ने ट्वीट किया, 'नंदू नाटेकर का भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान है। वह शानदार बैडमिंटन खिलाड़ी और बेहतरीन मार्गदर्शक थे। उनकी सफलता उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके निधन से दुखी हूं। इस दुख के समय में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और मित्रों के साथ है। ओम शांति।'

अपने समय के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में से एक माने जाने वाले नाटेकर दुनिया के तीसरे नंबर के पूर्व खिलाड़ी हैं। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने नाटेकर को 'असाधारण बैडमिंटन खिलाड़ी' करार दिया। ठाकुर ने ट्वीट किया, 'उन्हें 1961 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। खिलाड़ियों की एक पीढ़ी ने उनसे प्रेरणा ली। उनके परिवार और मित्रों के प्रति संवेदनाएं।'

राष्ट्रीय मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने उन्हें खेल का 'सच्चा लीजेंड' करार दिया जबकि विमल कुमार ने स्वयं के खेल से जुड़ने का श्रेय उन्हें दिया। गोपीचंद ने पीटीआई से कहा, 'हमारे लिए वह भारतीय बैडमिंटन के सच्चे लीजेंड हैं। वह काफी सम्मानित थे और हमने उनके बारे में कहानियां सुनी। उन्होंने शीर्ष स्तर पर बैडमिंटन ही नहीं बल्कि टेनिस भी खेला। वह ऐसे युग में खेले जब वह सुरेश गोयल, दिनेश खन्ना और प्रकाश पादुकोण के साथ शीर्ष खिलाड़ी थे।' नाटेकर 1951-52 राष्ट्रीय जूनियर टेनिस के फाइनल में रामनाथन कृष्णन के खिलाफ हार के बाद बैडमिंटन से जुड़े।

गोपीचंद ने कहा, 'वह काफी मृदुभाषी और भद्रजन थे। बैडमिंटन में क्या चल रहा है इसमें उनकी काफी रुचि थी। उनके कोणों की बेजोड़ समझ थी, वह एक एथलीट थे क्योंकि वह टेनिस और बैडमिंटन से सामंजस्य बैठा पाए।'

'नाटेकर के कारण बैडमिंटन से जुड़ा'

पूर्व भारतीय कोच विमल ने कहा कि उनके पिता नाटेकर के बड़े प्रशंसक थे और उनके कारण ही वह खेल से जुड़े। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता उनके बड़े प्रशंसक थे और (तब) त्रिवेंद्रम में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उनको देखने के बाद मेरे पिता ने घर के बाहर कोर्ट बनवाया और इस तरह मैं बैडमिंटन से जुड़ा। मैं उन्हें तभी खेलते हुए देख पाया जब उन्होंने 1980 के दशक में वेटरन ऑल इंग्लैंड का खिताब जीता। वह 1950 के दशक में क्रिकेटरों के जितने लोकप्रिय थे और लोग उन्हें खेलते हुए देखने के लिए लाइन लगाते थे।'

महाराष्ट्र की टीम में नाटेकर के साथ खेल चुके अब्दुल शेख की उनसे काफी अच्छी यादें जुड़ी हैं। वर्ष 1967 में कनाडा में बसने वाले और फिर कनाडा बैडमिंटन टीम को कोचिंग देने वाले शेख ने वैंकूवर से पीटीआई से कहा, 'उनके बारे में सुनकर मुझे दुख है। मैंने अपने जीवन में जिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देखा उनमें वह सबसे स्टाइलिश और आकर्षक में से एक थे। मैंने 1960 के दशक में इंडिया ओपन में उनके साथ साझेदारी की। हमें फाइनल में मलेशिया के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। वह उन खिलाड़ियों में से जो मलेशिया के वोंग पेंग सून के शानदार बैकहैंड शॉट को उठा लेते थे। वह शानदार शॉट खेलते थे और उनका फुटवर्क खूबसूरत था।'

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