अध्यात्म

Ugadi 2023: कल मनाया जाएगा उगादी पर्व, दक्षिण भारत में नववर्ष के रूप में मनाया जाता है ये दिन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 21, 2023, 07:15 PM IST

Ugadi 2023 Date And Muhurat: उगादि दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह हर साल चैत्र महीने के शुक्ल प्रतिपदा को सेलिब्रेट किया जाता है, जो अक्सर मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आइए उगादि पर्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Ugadi 2023: उगादी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

Ugadi 2023 Date And Muhurat: उगादि दक्षिण भारत का एक प्रमुख त्यौहार है। उगादी को युगादी के नाम से भी जाना जाता है। युगादी का अर्थ है- एक नए युग की शुरुआत। इसे दक्षिणी राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिल नाडु में नववर्ष के रुप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, उगादि हर साल चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की प्रतिपदा तिथि को सेलिब्रेट किया जाता है। जो कि मार्च या अप्रैल में आता है। उगादि पर्व को वसंत के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से नए साल में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। आइए जानते हैं उगादि पर्व की डेट मुहूर्त और महत्व को जान लेते हैं।

उगादि 2023 तिथि (Gudi Padwa 2023 Date)

पंचांग के अनुसार, उगादि चैत्र माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर की मानें तो यह मार्च और अप्रैल महीने के बीच आता है। उगादि इस साल 22 मार्च, बुधवार को पड़ रही है। इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है।

उगादि 2023 मुहूर्त (Ugadi 2023 Muhurat)

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2023, रात 10:52 बजे से।

प्रतिपदा तिथि समापन: 22 मार्च 2023, रात 8:20 बजे तक।

पूजा मुहूर्त : 22 मार्च 2023, सुबह 06:29 बजे से 07:39 बजे तक।

उगादि महत्व (Ugadi 2023 Significance)

उगादि पर्व का दक्षिण भारत में बहुत महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, उगादि को नव वर्ष का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। वहीं, किसानों के लिए भी यह पर्व बेहद खास माना जाता है। क्योंकि फसल के मौसम की शुरुआत भी इसी दिन से हो जाती है। उगादी को लेकर दूसरी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। कहा जाता है कि भगवान राम और राजा युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था।

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