वृश्चिक संक्रांति 2025 (AI Generated)
Vrishchik Sankranti 2025Puja Muhurat, Puja Vidhi: जब सूर्य राशि परिवर्तन करके वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है, तब उस दिन को वृश्चिक संक्रांति कहते हैं। यह सूर्य के धनु संक्रांति से ठीक पहले की संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव की उपासना, दान-पुण्य, स्नान और तप का विशेष महत्व होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वृश्चिक संक्रांति छात्रों और शिक्षकों के लिए भी बहुत शुभ मानी जाती है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा अर्चना करने व कुछ खास उपाय करने से धन संबंधी समस्याओं का निवारण होता है और धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होती है। तो आज वृश्चिक संक्रांति का ही खास दिन है। आज के दिन पूजा-पाठ और दान करना शुभ है। यहां से आप वृश्चिक संक्रांति की पूजा का शुभ मुहूर्त और साथ ही पूजा की विधि जान सकते हैं। वृश्चिक संक्रांति के मंत्र भी यहां बताए गए हैं।
-ॐ ऐहि सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते.
अनुकंपयेमां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर:।
-ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।
-ॐ घृणि सूर्याय नमः।
-ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।
वृश्चिक संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव का ध्यान करें। एक तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल फूल, अक्षत, गुड़ या शक्कर तथा थोड़ी-सी लाल चंदन की बूंदें मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद सूर्य मंत्र ऊं घृणि सूर्याय नमः या आदित्य हृदय स्तोत्र का जप करें। घर में दीपक जलाकर सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र पर लाल पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। दान-पुण्य विशेष फलदायी माना जाता है, इसलिए आज के दिन लाल वस्त्र, तांबा, गुड़, फल, अन्न आदि जरूरतमंदों को दान करें। संध्या समय पुनः सूर्य को जल चढ़ाकर दिन का संकल्प पूर्ण करें और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और उन्नति की कामना करें।