Kanya Sankranti 2021: सूर्य कब करेंगे सिंह से कन्या राशि में प्रवेश? जानें कन्या संक्रांति की तिथि व महत्‍व

Kanya Sankranti 2021 Date: सनातन धर्म में कन्या संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है। यह तिथि स्नान, दान तथा श्राद्ध के लिए बेहद महत्वपूर्ण और उत्तम मानी गई है।

Kanya Sankranti 2021, Kanya Sankranti 2021 date, Kanya Sankranti 2021 date in india, Kanya Sankranti 2021 date in indian calendar, Kanya Sankranti date 2021, Kanya Sankranti kab hai 2021, Kanya Sankranti 2021 kab hai, Kanya Sankranti, Kanya Sankranti
कन्या संक्रांति 2021 (Pic: Istock) 

मुख्य बातें

  • सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने के समयावधि को कहा जाता है संक्रांति।
  • सिंह राशि के बाद अब कन्या राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य।
  • दान, श्राद्ध और पूजा के लिए बेहद उत्तम है कन्या संक्रांति।

Kanya Sankranti 2021 Date in Indian Calendar: संक्रांति उस समय अवधि को कहा गया है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करने वाले हैं। वर्ष में पड़ने वाली सभी 12 संक्रांतियां दान-पुण्य तथा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी गई हैं। कन्या संक्रांति पर लोग स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, कन्या संक्रांति पर पवित्र नदियों तथा कुंड में स्नान करने से सभी पाप मिट जाते हैं। इस दिन विश्वकर्मा पूजा भी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। 

Kanya Sankranti 2021 Date, कन्या संक्रांति 2021 तिथि एवं महत्व

कन्या संक्रांति तिथि: 17 अगस्त 2021

पुण्य काल मुहूर्त: 17 सितंबर 2021 सुबह 06:17 से दोपहर 12:15 तक 

महा पुण्य काल मुहूर्त: 17 सितंबर 2021 सुबह 06:17 से 08:10 तक

कन्या संक्रांति पर सूर्योदय: 17 सितंबर 2021 सुबह 06:17 

कन्या सक्रांति पर सूर्यास्त: 17 सितंबर 2021 शाम 06:24 

Kanya Sankranti ka Mahatva कन्या संक्रांति का महत्व क्या है?

कन्या संक्रांति तिथि स्नान, दान आदि धार्मिक कार्यों के लिए बेहद लाभदायक मानी गई है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन पूजा करना फायदेमंद माना गया है। कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा पूजन भी किया जाता है जिस वजह से इस तिथि का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। उड़ीसा और बंगाल जैसे क्षेत्रों में इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने इस ब्रह्मांड को रचा था। उन्होंने देवों के महल और शास्त्रों का भी निर्माण किया था। कहा जाता है यह दुनिया उन्हीं की रचना है। 

Times Now Navbharat
Times now
zoom Live
ET Now
Mirror Now
Live TV
अगली खबर