vishwakarma puja 2021: साल 2021 में कब है विश्वकर्मा पूजा? जानें इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja 2021 date: इस बार विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व 17 सितंबर 2021, दिन शुक्रवार को है। इस दिन विधि विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने से व्यापार में बढ़ोतरी और मुनाफा होता है।

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मुख्य बातें

  • इस द‍िन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानो में की जाती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा।
  • विश्वकर्मा को वास्तुकला और शिल्पकला के क्षेत्र में दी गई है गुरु की उपाधि।
  • श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिए यह दिन होता है बेहद खास।

Vishwakarma Puja 2021 date: विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। मान्‍यता है क‍ि इस दिन विधि विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने से व्यापार में बढ़ोत्तरी और मुनाफा होता है। विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है, जिन्होंने ब्रह्मा जी के साथ मिलकर इस सृष्टि का निर्माण किया। जानते हैं साल 2021 में कब है विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व और इसका महत्व।

Vishwakarma Puja 2021 date and muhurat, विश्वकर्मा पूजा 2021 की डेट व मुहूर्त 

विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर साल उस दिन मनाया जाता है जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि मंक प्रवेश करते हैं, इसलिए इस दिन को कन्या संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। इस बार विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2021, दिन शुक्रवार को है। जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।

Vishwakarma Puja 2021 का शुभ मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा 2021 की त‍िथ‍ि – 17 सितंबर 2021

  • विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त – 17 सितंबर 2021, 01:29 am पर।
  • इस दिन सूर्योदय का समय – 6:17 am
  • इस दिन सूर्यास्त का समय – 6:24 pm

विश्वकर्मा पूजा का पौराणिक महत्‍व, Vishwakarma Puja ka mahatva 

कहा जाता है कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी उनका निर्माण ब्रह्मा जी के पुत्र भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था, उन्होंने ही श्रीहरि भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र और भोलेनाथ के लिए त्रिशूल बनाया। यहां तक कि सतयुग का स्वर्गलोक, त्रेता की लंका और द्वापर युग की द्वारका की रचना भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। इस दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा का इतिहास और महत्व, Vishwakarma Puja history and significance 

सनातन हिंदु धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकला और शिल्पकला के क्षेत्र में गुरू की उपाधि दी गई है, उनके कार्यों का उल्लेख ऋग्वेद और स्थापत्य वेद में भी मिलता है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा अस्त्र शस्त्र, घर और महल बनाने में भी निपुण थे, उनके इसी कुशलता के कारण उन्हें पूजनीय माना जाता है। श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद खास होता है।

इस दिन कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में लोग मशीनों और औजारों के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करते हैं। लोग भगवान विश्वकर्मा से अपनी रक्षा तथा आजीविका की सुरक्षा और उन्नति की  प्रार्थना करते हैं। यह पर्व वैसे तो पूरे भारत देश में मनाया जाता है, लेकिन इस दिन उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम, त्रिपुरा में अधिक धूम देखने को मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा विधि, Vishwakarma Puja vidhi in hindi 

विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर कारखानों, कार्यस्थलों और दुकानों में आयोजित की जाती है। इस दिन कार्यस्थल को फूलों से सजाएं तथा एक सुंदर पंडाल बनाएं और मंत्रोच्चार करते हुए भगवान विश्वकर्मा की मूर्ती स्थापित करें। इसके बाद अपने परिवार के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करें। भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना के बाद सभी औजारों पर तिलक लगाएं और धूप दीप करें। पूजा के बाद लोगों द्वारा प्रसाद वितरित किया जाता है। आमतौर पर इस दिन सभी कार्यस्थल बंद रहते हैं और विशेष दावत का आयोजन भी किया जाता है। वहीं कई जगहों पर इस दिन पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। तथा पूजा के अगले दिन किसी पवित्र नदी में भगवान विश्वकर्मा की मूर्ती विसर्जित करें।

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