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Vat Purnima Puja Samagri: वट पूर्णिमा पूजा में जानिए किन सामग्रियों की पड़ेगी जरूरत, ये रही पूरी सामान लिस्ट

Vat Purnima Puja Samagri: वट पूर्णिमा हिन्दू धर्म का एक विशेष पर्व है। इस दिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को रखा जाता है। यहां आप जानेंगे वट पूर्णिमा के दिन क्या-क्या सामान लगेगा।

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Vat Purnima Puja Samagri

Vat Purnima Puja Samagri: वट पूर्णिमा के दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनती हैं। इस शुभ अवसर पर पूजा के लिए विशेष सामग्री एकत्र करना आवश्यक होता है, जिसे वट पूर्णिमा पूजा साहित्य कहा जाता है। वट पूर्णिमा का पर्व नारी शक्ति, त्याग और प्रेम का प्रतीक है। पूजा साहित्य का उचित संग्रह और विधिवत पूजन से इस व्रत का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। इस साल ये व्रत 10 जून को रखा जाएगा। चलिए आपको बताते हैं वट पूर्णिमा की सामग्री लिस्ट।

वट पूर्णिमा पूजा साहित्य की सूची

1. पूजन चौकी और लाल वस्त्र: पूजन के लिए लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है।

2. वट वृक्ष की शाखा या वास्तविक वट वृक्ष: यदि वट वृक्ष तक पहुंचना संभव हो तो वहीं पूजन करें, अन्यथा उसकी टहनी लाकर पूजा की जाती है।

3. कच्चा सूत (राखी या मौली): वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूत को लपेटा जाता है। यह सात या 108 बार भी किया जाता है।

4. हल्दी-कुमकुम, चावल, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा और अक्षत: यह सभी पूजन की मूल सामग्री होती हैं।

5. मिठाई और पंचमेवा: भगवान को भोग लगाने हेतु किसी भी प्रकार की मिठाई, विशेषकर सूखे मेवे।

6. जल से भरा लोटा और पूजा का कलश: कलश में आम के पत्ते और नारियल रखकर शुभता का प्रतीक बनाया जाता है।

7. पूजन थाली व दीपक: घी या तेल का दीपक जलाकर पूजा की जाती है।

8. व्रत कथा की पुस्तक: सत्यवान-सावित्री की कथा पढ़ी और सुनी जाती है।

9. लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, श्रृंगार सामग्री: सुहाग की प्रतीक चीज़ें, जो व्रती महिलाएं व्रत के दौरान पहनती हैं।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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