Vat Purnima Puja Samagri: वट पूर्णिमा के दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनती हैं। इस शुभ अवसर पर पूजा के लिए विशेष सामग्री एकत्र करना आवश्यक होता है, जिसे वट पूर्णिमा पूजा साहित्य कहा जाता है। वट पूर्णिमा का पर्व नारी शक्ति, त्याग और प्रेम का प्रतीक है। पूजा साहित्य का उचित संग्रह और विधिवत पूजन से इस व्रत का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। इस साल ये व्रत 10 जून को रखा जाएगा। चलिए आपको बताते हैं वट पूर्णिमा की सामग्री लिस्ट।
1. पूजन चौकी और लाल वस्त्र: पूजन के लिए लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है।
2. वट वृक्ष की शाखा या वास्तविक वट वृक्ष: यदि वट वृक्ष तक पहुंचना संभव हो तो वहीं पूजन करें, अन्यथा उसकी टहनी लाकर पूजा की जाती है।
3. कच्चा सूत (राखी या मौली): वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूत को लपेटा जाता है। यह सात या 108 बार भी किया जाता है।
4. हल्दी-कुमकुम, चावल, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा और अक्षत: यह सभी पूजन की मूल सामग्री होती हैं।
5. मिठाई और पंचमेवा: भगवान को भोग लगाने हेतु किसी भी प्रकार की मिठाई, विशेषकर सूखे मेवे।
6. जल से भरा लोटा और पूजा का कलश: कलश में आम के पत्ते और नारियल रखकर शुभता का प्रतीक बनाया जाता है।
7. पूजन थाली व दीपक: घी या तेल का दीपक जलाकर पूजा की जाती है।
8. व्रत कथा की पुस्तक: सत्यवान-सावित्री की कथा पढ़ी और सुनी जाती है।
9. लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, श्रृंगार सामग्री: सुहाग की प्रतीक चीज़ें, जो व्रती महिलाएं व्रत के दौरान पहनती हैं।