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Sawan Ka Pahla Somvar 2025 Jal Timing, Puja Vidhi: सावन के पहले सोमवार पर जानें शिवलिंग जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ

Sawan Ka Pahla Somvar 2025 Jal Timing, Puja Vidhi, Vrat Katha, Puja Samagri List, Mantra and Aarti: आज सावन का पहला सोमवार है। भोलेनाथ के भक्तों के लिए ये काफी विशेष दिन है। आज की पूजा और जल अर्पण का भी खास महत्व होता है। यहां से आप सावन के पहले सोमवार की पूजा विधि, पूजा सामग्री, आज का जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ जान सकते हैं।

सृष्टिUpdated Jul 14, 2025, 14:25 IST
Sawan Ka Pahla Somvar 2025 Jal Timing, Puja Vidhi: सावन के पहले सोमवार पर जानें शिवलिंग जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ

Sawan Ka Pahla Somvar 2025 Jal Timing, Puja Vidhi: सावन के पहले सोमवार पर जानें शिवलिंग जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ

Sawan Ka Pahla Somvar 2025 Jal Timing (सावन के पहले सोमवार रुद्राभिषेक पूजा सामग्री लिस्ट, सोमवार व्रत पूजा विधि) Puja Vidhi, Vrat Katha, Puja Samagri List, Mantra and Aarti: शिवभक्तों को सावन के पहले सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं! आज सावन का पहला सोमवार है। आज के दिन पूजा- जलाभिषेक और आरती से भोलेनाथ बेहद प्रसन्न होते हैं। आज मंदिरों में खूब भीड़ देखने को मिलती है। शिव भक्त आज व्रत भी रखते हैं और रुद्राभिषेक भी करवाते हैं। यहां से आप आज जल चढ़ाने का शुभ समय, आज की पूजा विधि, पूजा सामग्री, रुद्राभिषेक की पूजा विधि, शिव मंत्र, शिव आरती समेत सारी जानकारी ले सकते हैं।

आज जल चढ़ाने का शुभ समय

सावन सोमवार की कथा: साहूकार की कहानी...

शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
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हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
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त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
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त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
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सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
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जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
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प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
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भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
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शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
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नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
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कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

सावन की हार्दिक शुभकामनाएं 2025 विशेष, कोट्स इन हिंदी

JUL 14, 2025 13:25 IST

जल चढ़ाते हुए कौन से मंत्र पढ़ने चाहिए?

ॐ नम: शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः
ॐ शर्वाय नम:।
ॐ विरूपाक्षाय नम:।
ॐ विश्वरूपिणे नम:।
ॐ कपर्दिने नम:।
ॐ भैरवाय नम:।
ॐ शूलपाणये नम:।
ॐ ईशानाय नम:।
ॐ महेश्वराय नम:।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ पशुपतये नम:।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
JUL 14, 2025 12:56 IST

साल 2025 के सावन में कितने सोमवार है?


साल 2025 के सावन में 4 सोमवार पड़ने वाले हैं। पहला सोमवार 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई और आखिरी सोमवार 4 अगस्त को होगा।
JUL 14, 2025 12:36 IST

सावन सोमवार भोग

सावन सोमवार की पूजा में आप भगवान शिव हलवा, दही, भांग, पंचामृत, शहद, दूध, सफ़ेद बर्फ़ी, मालपुआ, ठंडाई, लस्सी, सूखा मावा आदि का भोग लगा सकते हैं।
JUL 14, 2025 11:54 IST

सावन का पहला सोमवार: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का तरीका

जल चढ़ाने के लिए हमेशा ताबें के एक साफ लौटे में गंगाजल या ताजा पानी लें। फिर उसमें अक्षत, चंदन और फूल डालकर ही अर्पित करें। शिव मंदिर में पूर्व दिशा की ओर या फिर ईशान कोण की तरफ मुख करके खड़े हों। इस दिशा में ही खड़े होकर जल चढ़ाया जाता है। आप कभी भी एकदम सीधे खड़े होकर शिवलिंग पर जल न चढ़ाएं। हमेशा थोड़ा झुककर जल का अर्पण करें, जिससे शिवलिंग से गिरता जल आपके पैरों को न छुए। जल का पैर पर गिरना शुभ नहीं होता।
JUL 14, 2025 11:23 IST

Sawan Ka Pahla Somwar 2025 Live: शिवलिंग की फोटो

Sawan Ka Pahla Somwar 2025 Live: शिवलिंग की फोटो
JUL 14, 2025 11:02 IST

शिवलिंग पर जल के साथ और क्या चढ़ा सकते हैं।

सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, बेलपत्र, भांग-धतूरा और शहद- मिसरी चढ़ाया जाता है।
JUL 14, 2025 10:47 IST

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi: शिव चालीसा

दोहा ॥
श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥
JUL 14, 2025 10:20 IST

सोमवार की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान कर शिवलिंग की पूजा के लिए मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करके श्रद्धा और नियम से पूजन करें। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद पुष्प, धतूरा, आक, अक्षत और भस्म अर्पित करें। फिर भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाएं और तीन बार ताली बजाते हुए उनका नाम स्मरण करें।
JUL 14, 2025 09:51 IST

Pehla Sawan Somwar: शिव भजन

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम

खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम

देवो के हित विष पी डाला, नील कंठ को कोटि प्रणाम, नील कंठ को कोटि प्रणाम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम

शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम

करनी का सुख तेरे हाथों, शिव के हाथों में परिणाम, शिव के हाथों में परिणाम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम

शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम

शिव को भजले सुख पायेगा, मन को आएगा आराम, मन को आएगा आराम

सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥

सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
JUL 14, 2025 09:30 IST

Sawan Ka Pehle Somwar 2025 Live: जय शिव शंकर

Sawan Ka Pehle Somwar 2025 Live: जय शिव शंकर
JUL 14, 2025 09:19 IST

सावन के पहले सोमवार को क्या चढ़ाना चाहिए?

सावन के पहले सोमवार पर शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, बेलपत्र, भांग-धतूरा और शहद- मिसरी चढ़ाया जाता है।
JUL 14, 2025 08:56 IST

आज जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त क्या है?

ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04.42 बजे से 05.26 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12.18 बजे से 04.11 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07.18 बजे से 07.40 बजे तक
अमृत काल- रात 11.21 से 15 जुलाई की रात 12.55 बजे तक
JUL 14, 2025 08:31 IST

सावन के पहले सोमवार पर शिव पूजा विधि

सुबह स्नान कर शिवलिंग की पूजा के लिए मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करके श्रद्धा और नियम से पूजन करें। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद पुष्प, धतूरा, आक, अक्षत और भस्म अर्पित करें। फिर भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाएं और तीन बार ताली बजाते हुए उनका नाम स्मरण करें।
JUL 14, 2025 08:28 IST

जलाभिषेक के मंत्र क्या हैं?

ॐ नम: शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः
ॐ शर्वाय नम:।
ॐ विरूपाक्षाय नम:।
ॐ विश्वरूपिणे नम:।
ॐ कपर्दिने नम:।
ॐ भैरवाय नम:।
ॐ शूलपाणये नम:।
ॐ ईशानाय नम:।
ॐ महेश्वराय नम:।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ पशुपतये नम:।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
JUL 14, 2025 07:58 IST

Pahla Sawan Somwar 2025 Live Updates: सावन सोमवार व्रत कथा, हिंदी में

एक समय की बात है। एक नगर में साहूकार रहता था। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। इसी वजह से वह हर समय दुखी रहता था। संतान की प्राप्ति के लिए वो सोमवार के व्रत को किया करता था और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा श्रद्धा भाव के साथ किया करता था। इसी भक्ति को देखते हुए एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को उसकी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए कहा। माता पार्वती के कई बार कहने पर भगवान शिव ने कहा, इस संसार में व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल मिलता है, जिसके भाग्य में जो लिखा होता है उसे वही भोगना पड़ता है। लेकिन पार्वती जी ने भगवान शिव की बात न मानते हुए साहूकार की इच्छा को पूरा करने का निर्णय लिया। माता के कहने पर भगवान शिव को भी साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान देना पड़ा। लेकिन उन्होंने बोला की वह बालक सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा। 12 साल के बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी। इस बात को साहूकार सुन रहा था, इसलिए उसने इस बार पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। वह पहले की तरह की भगवान शिव की पूजा करने लगा। कुछ समय बाद साहूकार की पत्नि ने सुंदर पुत्र को पैदा किया। वह बालक जब ग्यारह साल का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए साहूकार ने काशी भेज दिया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बहुत सा धन देकर कहा कि मेरे बेटे की सारीविद्या काशी में रहकर ही प्राप्त होगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि तुमलोग रास्ते में यज्ञ और ब्राह्मणों को भोजन करवाते हुए जाना। वह काशी पहुंचने से पहले एक राज्य में पहुंचे। वहां पर राजा की कन्या का विवाह एक ऐसे राजकुमार के साथ हो रहा था जो एक आंख से काना था। ऐसे में राजकुमार के पिता ने सोचा की क्यों न साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर राजकुमारी का विवाह करा दिया जाए। विवाह के बाद धन देकर इसे राज्य से जाने को कह दिया जाएगा। लड़के ने राजकुमार के पिता की बात को मानकर दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से विवाह कर लिया। लेकिन साहूकार का पुत्र इमानदार था। इसलिए उसने सही अवसर देखकर राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के संग तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। जब राजकुमारी ने यह चीजें पढ़ी तो इसकी जानकारी सबसे पहले उसने अपने माता पिता को बताई। इसके बाद राजा ने अपनी पुत्री का विवाह रुकवा दिया। फिर उन्होंने उस बालक से पूछा तुम यहां कैसे, तो उसने बताया कि मैं तो काशी पढ़ने जा रहा हूं। इसके बाद मामा और भांजा वहां से चला गया और काशी जाकर उन्होंने यज्ञ किया। जिस दिन लड़का 12 साल का हुआ। उस दिन खास यज्ञ का आयोजन किया गया था। लेकिन लड़का उस यज्ञ में बैठने से मना कर देता है। वह कहता है कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। कुछ समय बाद भगवना शिव के वरदानुसार कुछ समय बाद बालक के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देखकर मामा ने विलाप करना शुरू कर दिया। उसी समय माता पार्वती और भगवान शिव वहीं से होकर जा रहे थे। पार्वती माता ने भोलेनाथ से कहा- स्वामी, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा, आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें।जब भगवान शिव मृत बालक को देखा तो वो बोले की यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे 12 साल जीवित रहने का वरदान मिला था। इसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती इस बात को नहीं मानी और कहने लगीं की इसकी आयु आपको बढ़ानी होगी। वरना इसके माता पिता इसके वियोग में तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। माता पार्वती के कई बार कहने के बाद भगवान शिव को उस बालक को जीवित करना पड़ा। इसके बाद बालक अपनी शिक्षा को पूरी करने के बाद अपने माता पिता के वापस चला गया। वहीं साहूकार अपने पुत्र की बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन दोनों ने प्रण किया हुआ था कि अगर हमें अपने पुत्र का समाचार मिलेगा तो हम अपने प्राण त्याग देंगे। लेकिन जब वह जीवित घर पहुंचा तो वह काफी प्रसन्न हुए। उसी समय भगवान शिव ने स्वपन में दर्शन देकर कहा श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु दी है। इसी प्रकार जो कोई सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता और पढ़ता है उसके सभी दुख दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
JUL 14, 2025 07:53 IST

Pahla Sawan Somwar 2025 Live Updates: रुद्राभिषेक पूजन मंत्र

रुद्राभिषेक करते समय विशेष रूप से "रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:" मंत्र का जाप किया जाता है।
JUL 14, 2025 07:36 IST

शिवलिंग पर कैसे चढ़ाया जाता है बेलपत्र?

बेलपत्र को उल्टा चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा के साथ लक्ष्मी जी का भी आशीर्वाद बना रहता है। ये भी कहा जाता है कि बेलपत्र में कई औषधीय गुण होते हैं और इसकी चिकनी सतह शिवलिंग को ठंडक प्रदान करती है, जिससे शिवलिंग की ऊर्जा संतुलित रहती है।
JUL 14, 2025 07:24 IST

Pahla Sawan Somwar 2025 Live Updates: जल चढ़ाने से पहले जानें, अभिजीत मुहूर्त कितने बजे तक है?

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12.18 बजे से 04.11 बजे तक
JUL 14, 2025 07:15 IST

Pahla Sawan Somwar 2025 Live Updates: आज ब्रह्म मुहूर्त में जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त क्या है?

आज ब्रह्म मुहूर्त में आप प्रात: 04.42 बजे से 05.26 बजे तक जल चढ़ा सकते हैं।
JUL 14, 2025 06:53 IST

महिलाओं को शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाना चाहिए?

महिलाओं को हमेशा उत्तर दिशा में और दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। करके ही जल अर्पित करना चाहिए। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय उन्हें शिवलिंग को सीधे छूने से बचना चाहिए, लेकिन वे जलहरी के पास बैठकर या खड़े होकर जल चढ़ा सकती हैं। इसके अलावा, जल चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना चाहिए।