अध्यात्म

Sakat Chauth 2026 Vrat Katha Hindi: सकट चौथ व्रत कथा, आज जरूर पढ़ें गरीब कुम्हार की कहानी

Sakat Chauth 2026 Vrat katha (सकट चौथ 2026 व्रत कथा) Ganesh Chauthi ki kahani (kumhaar vali) Tilkut Puja ki katha Hindi Mein: सकट चौथ व्रत करवा चौथ व्रत की तरह ही कठिन होता है। बस अंतर सिर्फ इतना है कि जहां करवा चौथ का उपवास महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं तो वहीं सकट का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। आज यही खास व्रत है और आज के दिन कुम्हार की कहानी जरूर पढ़ी जाती है। यहां से आप सकट चौथ व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं।

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सकट चौथ व्रत कथा (pc: canva)

Sakat Chauth 2026 Vrat katha (सकट चौथ व्रत कथा): सकट चौथ की पौराणिक कथा अनुसार, एक गांव में एक कुम्हार रहता था। वह मिट्टी के अत्यन्त सुन्दर पात्र बनाता था और उन्हें भट्टी में पकाकर कठोर करता था। एक वर्ष जब कुम्हार ने पात्रों को पकाने के लिए भट्टी में डाला, तो उसने देखा की अग्नि पात्रों को पकाने में सक्षम नहीं थी। कुम्हार के निरन्तर कोशिश करने के बाद भी मिट्टी के पात्र पक नहीं पा रहे थे। फिर कुम्हार ने सहायता के लिए राजा से सम्पर्क किया। कुम्हार की व्यथा सुनने के पश्चात् महाराज ने राजपुरोहित से विचार-विमर्श किया, उनसे इस विचित्र समस्या का समाधान मांगा। राजपुरोहित ने सुझाव दिया कि प्रत्येक समय पात्रों को पकाने के लिए भट्टी तैयार करने के अवसर पर एक बालक की बलि दी जाये।

राजपुरोहित का सुझाव सुनकर, महाराज ने राज्य में यह घोषित कर दिया कि सदैव भट्टी तैयार होने के अवसर पर प्रत्येक परिवार को बलि के लिए एक बालक प्रदान करना होगा। महाराज के आदेश का पालन करने के लिए समस्त परिवारों ने एक-एक करके अपनी एक सन्तान को देना आरम्भ कर दिया।

कुछ दिवस पश्चात् एक वृद्ध स्त्री की बारी आयी, जिसका एक ही पुत्र था। उस दिन सकट चौथ का पर्व था। उस वृद्ध स्त्री के कुटम्ब में उसका पुत्र ही उसके अन्तिम क्षणों का एकमात्र सहायक था। महाराज के आदेश की अवेहलना नहीं की जा सकती थी। वृद्ध स्त्री इस विचार से भयभीत थी की सकट के शुभः अवसर पर उसकी एकमात्र सन्तान का वध कर दिया जायेगा।

वह वृद्ध स्त्री, सकट माता की अनन्य भक्त थी। अतः उसने अपने पुत्र को प्रतीकात्मक सुरक्षा कवच के रूप में सकट की सुपारी तथा "दूब का बीड़ा" दिया। वृद्ध स्त्री ने अपने पुत्र से भट्टी में प्रवेश करते समय सकट देवी की प्राथना करने को कहा तथा यह विश्वास दिलाया कि सकट माता की कृपा से यह वस्तुयें भट्टी की अग्नि से उसकी रक्षा करेंगी।

बालक को भट्टी में बैठाया गया। उसी समय वृद्ध स्त्री ने अपने एकमात्र पुत्र की रक्षा हेतु देवी सकट की आराधना आरम्भ कर दी। भट्टी में अग्नि दहन करने के पश्चात् उसे आगामी दिनों में तैयार होने हेतु छोड़ दिया गया।

जिस भट्टी को पकने में अनेक दिनों का समय लगता था, सकट देवी की कृपा से वह एक रात्रि में ही तैयार हो गयी। अगले दिन जब कुम्हार भट्टी का निरीक्षण करने आया तो वह आश्चर्यचकित रह गया। उसने ने पाया कि उस वृद्ध स्त्री का पुत्र तो जीवित एवं सुरक्षित है ही, वह समस्त बालक भी पुनः जीवित हो चुके थे जिनकी बलि भट्टी तैयार करने से पूर्व दी गयी थी।

इस घटनाक्रम के पश्चात् समस्त नगरवासियों ने सकट माता की शक्तियों एवं उनके करुणामय स्वभाव की महिमा को स्वीकार कर लिया। सकट माता के प्रति अटूट निष्ठा और अखण्ड विश्वास के लिए नगरवासियों ने उस बालक और उसकी मां की अत्यधिक प्रसंशा की। सकट चौथ पर्व सकट देवी के प्रति आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर मातायें सकट माता की पूजा-अर्चना करती हैं एवं अपनी सन्तानों की समस्त प्रकार की अप्रिय घटनाओं से रक्षा हेतु माता से प्रार्थना करती हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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