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Ramadan Roza Rakhne Or Kholne Ki Dua In Hindi: रमजान में रोजा रखते और खोलते समय जरूर पढ़ें ये दुआ

Ramadan Roza Rakhne Or Kholne Ki Dua In Hindi (रमजान में रोजा रखने और खोलने की दुआ): रमजान का पवित्र महीना भारत में 2 मार्च से शुरू हो रहा है। इस पूरे महीने में मुस्लिम लोग उपवास रखते हैं। जिसे रोजा कहा जाता है। रोजा रखने और खोलते समय एक खास दुआ पढ़ी जाती है। चलिए जानते हैं इसके बारे में।

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Ramadan Fasting Dua In Hindi, English And Arabic

Ramadan Roza Rakhne Or Kholne Ki Dua In Hindi (रमजान में रोजा रखने और खोलने की दुआ): रमजान का मुबारक महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है। इस महीने में मुस्लिम लोग रोजा रखते हैं और पांच वक्त की खास नमाज अदा की जाती है। कहते हैं इस महीने में अल्लाह की इबादत करने का दोगुना सवाब मिलता है। इसके अलावा इस पाक महीने में जरूरतमंदों की सहायता करने का भी खास महत्व माना गया है। 2025 में रमजान का पाक महीना 2 मार्च से शुरू होगा। यहां आप जानेंगे रोजा रखने और खोलते समय कौन सी दुआएं पढ़ी जाती हैं।

रोज़ा रखने की दुआ हिंदी में (Roza Rakhne Ki Dua In Hindi)

'व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमज़ान'

तर्जुमा- यह दुआ अरबी भाषा में है जिसका मतलब होता है मैं रमज़ान के इस रोज़े की नियत करता/ करती हूं।

रोजा रखने की दुआ अंग्रेजी में (Roza Rakhne Ki Dua In English)

'Wa bisawmi ghaddan nawaiytu min shahri ramadan'

रोजा रखने की दुआ अरबी में (Roza Rakhne Ki Dua In Arabic)

Ramadan Fasting Dua in arabic

Ramadan Fasting Dua in arabic

रोजा रखने की दुआ कब पढ़नी चाहिए (Roza Rakhne Ki Dua Kab Padhi Jati Hai)

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि सहरी खाने के बाद यानि फज्र की अज़ान से पहले इस दुआ को जरूर पढ़ना चाहिए।

रोजा खोलने की दुआ (Roza Kholne Ki Dua in Hindi)

'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू'

तर्जुमा- यह दुआ अरबी भाषा में है जिसका मतलब होता है ऐ अल्लाह। मैंने तेरी रजा के लिए रोज़ा रखा है और तेरे ही कहने पर रोज़ा खोल रहा/ रही हूं।

रोजा खोलने की दुआ अंग्रेजी में (Roza Kholne Ki Dua In English)

'Allahumma inni laka sumtu wa bika amantu wa 'alayka tawakkaltu wa 'ala rizqika aftartu'

रोज़ा खोलने से पहले हर मुसलमान को यह दुआ पढ़ना वाजिब है। यह दुआ खजूर खाने से पहले पढ़ी जाती है और दुआ खत्म होने के बाद ही कुछ खाया जाता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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