Nag Panchami kyon manae jaati hai (नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है): भारत की परंपराओं और मान्यताओं से गहराई से जुड़ा पर्व है नाग पंचमी। भारत की संस्कृति में यह प्रकृति, जीवों और देवत्व से जुड़ा है। इस दिन नाग देवता की पूजा कर उनसे सुख, समृद्धि और लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगा जाता है। नाग पंचमी पर घरों में नागों की आकृति बनाकर उनकी पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से सर्प दंश का भय नहीं रहता है। यहां से पढ़ें कि नाग पंचमी कब मनाई जाती है। साथ ही जानें नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है और नाग पंचमी कैसे मनाई जाती है।
नाग पंचमी कब मनाई जाती है
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तारीख जुलाई और अगस्त के मध्य में रहती है। 2025 में नाग पंचमी (Nag Panchami 2025 date) 29 जुलाई को मनाई जाएगी। जबकि 2024 में नाग पंचमी का पर्व (last year nag Panchami date) 9 अगस्त, दिन शुक्रवार को मनाया गया था। 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।
नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है
पुराणों में नागों को देवता स्वरूप माना गया है। इनमें शेषनाग, वासुकी, तक्षक जैसे नाग दिव्य और पूज्य बताए जाते हैं। भगवान विष्णु जहां शेषनाग की शैय्या पर विश्राम करते हैं वहीं शिव जी ने नाग को गले में नाग धारण किया है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर नाग पूजन से सर्प दंश का भय भी दूर होता है और नागों से घर भी सुरक्षित रहता है।
नाग पंचमी मनाने का एक कारण महाभारत काल से भी जुड़ा है। माना जाता है कि अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए जनमेजय ने सांपों का अंत करने के लिए सर्प यज्ञ आरंभ किया था। यह यज्ञ आस्तिक मुनि ने रुकवाया था। जिस दिन यज्ञ रुका , उस दिन सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथी थी। यहीं से नागों की पूजा का चलन भी प्रारंभ हुआ।
एक और वजह से नाग पंचमी का महत्व माना जाता है। नागों को धरती का रक्षक भी माना गया है। साथ ही वे खेतों की रक्षा भी करते हैं। इस वजह से उनको देवतुल्य सम्मान देकर नाग पंचमी पर उनकी पूजा की जाती है।
नाग पंचमी कैसे मनाई जाती है
नाग पंचमी पर घर के द्वार पर नाग चित्र बनाकर पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर नाग-कृपा से सुरक्षित रहता है। घर में मीठे पकवान बनते हैं। इस दिन नागों को दूध-लावा भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सांपों को दूध से स्नान-पूजन कराने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं सपेरों को भी इस दिन दान दिया जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूजा होती है। नागों से सुरक्षा पाने के लिए पूजा, मंत्र जाप भी होता है।
