Karwa Chauth 2026 Vrat During Shukra Asta: करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस बार त्योहार से पहले शुक्र अस्त होने के कारण सोशल मीडिया पर कई प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा ये रील्स वायरल हो रही है कि जिन नवविवाहितों का यह पहला करवाचौथ है उनको इस बार व्रत नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे का मुख्य कारण शुक्र का अस्त होना बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी शुक्र अस्त के दौरान व्रत शुरू करने को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या नवविवाहित महिलाएं इस बार करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं या शुक्र अस्त होने की वजह से उन्हें इंतजार करना चाहिए?
ज्योतिषाचार्य पं सत्यम विष्णु अवस्थी के अनुसार, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र को प्रेम, विवाह और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह माना जाता है। शुक्र अस्त होने पर विवाह और कुछ मांगलिक संस्कारों के मुहूर्त टालने की परंपरा है, लेकिन करवाचौथ का व्रत रखना और विवाह संस्कार करना एक ही बात नहीं है।
क्या नवविवाहित महिलाएं इस बार पहला करवाचौथ रख सकती हैं
पंडित सत्यम विष्णु अवस्थी ने बताया कि इस बार नवविवाहित महिलाएं करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। शुक्र अस्त होने के कारण पहला करवाचौथ छोड़ने की कोई ऐसी सर्वमान्य मनाही नहीं है, जिसे सभी परिवारों पर लागू किया जाए। इस व्रत में महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा करती हैं।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को शुक्र अस्त होने की बात सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपके परिवार में करवाचौथ रखने की परंपरा है, तो आप उसी के अनुसार व्रत और पूजा कर सकती हैं। अगर आपके कुलाचार में पहली बार व्रत शुरू करने के लिए कोई विशेष नियम बताया जाता है, तो परिवार के पुरोहित से उसकी पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।
शुक्र अस्त का व्रत पर क्यों नहीं पड़ता सीधा असर
ज्योतिष में शुक्र को विवाह, प्रेम, आकर्षण और दांपत्य सुख से जुड़ा ग्रह माना जाता है। इसी वजह से शुक्र के अस्त होने पर शादी और कुछ अन्य मांगलिक संस्कारों के शुभ मुहूर्त को लेकर सावधानी बरती जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दौरान हर पूजा या व्रत पर रोक लग जाती है।
करवाचौथ एक वार्षिक व्रत है। इसमें महिलाएं चतुर्थी तिथि पर उपवास रखती हैं, शाम को पूजा करती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। इस पूजा के लिए शुक्र के अस्त होने को अपने आप में बाधा मानना सही नहीं है। इस साल नवविवाहित महिलाओं के व्रत रखने पर रोक संबंधी दावे भ्रामक हैं। इन पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
करवाचौथ के दिन उदय हो जाएंगे शुक्र
द्रिक पंचांग के अनुसार,शुक्र तारा 12 अक्टूबर 2026 की शाम 6 बजकर 19 मिनट पर अस्त हुआ था। इसका अस्त काल 29 अक्टूबर की सुबह 6 बजे समाप्त हो जाएगा। यानी करवाचौथ के दिन शुक्र उदय भी हो जाएंगे।
हालांकि, कुछ पंचांगों और ज्योतिषीय परंपराओं में शुक्र के उदय के बाद शुरुआती दिनों को लेकर भी अलग नियम माने जाते हैं। यह नियम मुख्य रूप से विवाह जैसे मांगलिक संस्कारों के मुहूर्त में ध्यान रखे जाते हैं। करवाचौथ के व्रत पर इन नियमों को उसी तरह लागू करना जरूरी नहीं माना जाता है।
इस कारण केवल शुक्र अस्त होने या उसके उदय के आसपास की स्थिति देखकर करवाचौथ का व्रत छोड़ने का फैसला न करें। व्रत का विधान, स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है।
नहीं रोकें करवाचौथ की पूजा
शुक्र अस्त होने के कारण करवाचौथ की पूजा रोकने की जरूरत नहीं है। महिलाएं इस दिन भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं, करवाचौथ की कथा सुन सकती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोल सकती हैं।
पूजा के दौरान करवा, दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और जल जैसी सामग्री रखी जाती है। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा करके पति की खुशहाली और परिवार के सुख-शांति की कामना की जाती है। इसके बाद चंद्रोदय होने पर चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं और अर्घ्य दिया जाता है।
करवाचौथ 2026 की तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल करवाचौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। दिल्ली और नोएडा के लिए द्रिक पंचांग में पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक दिया गया है। दिल्ली में चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर होने का अनुमान है। दूसरे शहरों में पूजा और चंद्र दर्शन का समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।
व्रत रखने वाली महिलाएं दिन में अपनी परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करें, फिर दिनभर व्रत रखें। शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा के दर्शन करें, अर्घ्य दें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। चंद्रमा दिखने के बाद ही व्रत का पारण करें।
नवविवाहित महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
पहली बार करवाचौथ रखने वाली महिलाएं पूजा की सामग्री पहले से तैयार कर लें और अपने परिवार में प्रचलित व्रत की विधि जान लें। अगर सरगी, सोलह श्रृंगार या पूजा के क्रम को लेकर कोई परंपरा है, तो उसी का पालन कर सकती हैं। व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। अगर गर्भावस्था, डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा। धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।
