जितिया का व्रत खोलने का शुभ समय क्या होगा, यहां जानें कथा, मंत्र, सहित सारी जानकारी
जितिया व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास महत्व रखता है। क्योंकि इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रख भगवान से प्रार्थना करती हैं। चलिए आपको बताते हैं जितिया व्रत पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ।
जितिया का व्रत खोलने का शुभ समय क्या होगा, यहां जानें कथा, मंत्र, सहित सारी जानकारी
Jitiya Vrat 2024 Katha, Aarti Lyrics, Puja Vidhi in Hindi
जितिया व्रत पूजा मुहूर्त 2024 (Hindu Panchang Ke Anusar Jitiya Vrat Muhurat)
हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 25 सितंबर 2024 की शाम 4 बजे से शुरू होकर 6 बजे तक रहेगा।
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जितिया व्रत विधि (Jitiya Vrat Vidhi)
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर एक समय भोजन करती हैं। इसके बाद अगले दिन निर्जला व्रत रहती हैं। शाम में जितिया की पूजा करती हैं और कथा सुनी जाती है। इसके बाद अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
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जितिया पूजा विधि (Jitiya Puja Vidhi in Hindi)
जितिया व्रत के दिन प्रदोष काल में महिलाएं पूजन स्थल को गोबर से लीपकर साफ करती हैं। वहीं पर एक छोटा-सा तालाब भी बनाती हैं और इस तालाब के पास पाकड़ की डाल खड़ी कर दी जाती है। इसके बाद तालाब के जल में जीमूतवाहन की मूर्ति स्थापित की जाती है। ये मूर्ति कुशा से बनी होती है। इसके बाद धूप-दीप, अक्षत, रोली, फल, फूल आदि से विधि विधान पूजन किया जाता है। इस दिन महिलाएं मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्तियां भी जरूर बनाती हैं। इन मूर्तियों को टीका लगाने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा पढ़ी या सुनी जाती है।
जितिया व्रत का पारण कब और कैसे करें (Jitiya Vrat 2024 Parana Date And Time)
इस साल जितिया व्रत का पारण कुछ महिलाएं 25 सितंबर की शाम को करेंगी तो वहीं कुछ 26 सितंबर की सुबह में करेंगी। जितिया व्रत के पारण से पहले विधि विधान पूजा की जाती है। फिर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग आदि चीजें खाकर व्रत खोल लिया जाता है।
जितिया मंत्र
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते,
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः
जितिया व्रत पारण विधि (Jitiya Vrat Paran Vidhi)
जितिया व्रत खोलने का समय: jitiya vrat kholne ka samay
jitiya paran me kya khana chahiye: जितिया पारण में क्या खाना चाहिए
जितिया व्रत कथा: jitiya vrat katha
जितिया व्रत पूजा विधि (Lord Jimutavahana Puja Vidhi)
सूर्य देव को जल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की दीपक जलाकर पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha) का पाठ करें और मंत्रों का जप करें।
फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
प्रभु से संतान की प्राप्ति और उनकी सुरक्षा के लिए कमाना करें।
इसके अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
अंत में लोगों में श्रद्धा अनुसार दान करें।
jitiya mai ka katha
कहानी अलग-अलग बोली भाषा में अपने अंचल के हिसाब से सुनाई जाती है जो भोजपुरी में कुछ यूं है- ए अरियार त का बरियार, श्री राम चंद्र जी से कहिए नू कि फलां के माई खर जीयूतिया भूखल बड़ी.
सवाल यही है कि आखिर ये बरियार है कौन? तो बरियार एक ऐसा पौधा है जिसे भगवान राम का दूत माना जाता है. कहा जाता है कि यह छोटा सा बरियार (बलवान पेड़) भगवान राम तक हमारी बात दूत बनकर पहुंचाता है. अर्थात मां को अपनी संतान के जीवन के लिए कहे हुए वचनों को भगवान राम से जाकर सुनाता है और इस तरह श्री राम चंद्र तक उसके दिल की इच्छा पहुंच जाती है. संतान और घर परिवार का कल्याण हो जाता है
jitiya vrat kahani in hindi (जितिया व्रत की कहानी)
जितिया व्रत पूजा मुहूर्त 2024 दिल्ली (Jitiya Puja Muhurat 2024 Delhi)
jitiya me kiske puja hoti hai: जितिया में किसकी पूजा होती है
जितिया व्रत पूजा विधि (Lord Jimutavahana Puja Vidhi)
सूर्य देव को जल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की दीपक जलाकर पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha) का पाठ करें और मंत्रों का जप करें।
फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
प्रभु से संतान की प्राप्ति और उनकी सुरक्षा के लिए कमाना करें।
इसके अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
अंत में लोगों में श्रद्धा अनुसार दान करें।
Jitiya Vrat ke niyam: जितिया व्रत नियम
व्रत के दिन किसी को भी अपशब्द न कहें और ना ही मन में दूसरों के लिए बुरे विचार लाएं.
व्रत वाले दिन व्रती को पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चहिए. मन,वचन और कर्म से शुद्ध रहकर व्रत रखने से यह व्रत सफल माना जाता है
जितिया व्रत कथा pdf : Jitiya Vrat Katha In Hindi
लेकिन भगवान कृष्ण ने अपने पुण्य का फल उत्तरा की मृत संतान को देकर उसे फिर से जीवित कर दिया। इस तरह मर कर पुनः जीवित होने की वजह से ही इस बच्चे का जीवित्पुत्रिका रखा गया। कहते हैं उसी समय से बच्चों की लंबी उम्र की कामना करते हुए जितिया का व्रत रखे जाने की परंपरा शुरू हो गई।
चिल्हो सियारो की कथा (Jitiya Vrat Katha Chilo Siyaro)
Jitiya Puja Muhurat 2024: जितिया व्रत पूजा मुहूर्त 2024
जितिया व्रत की आरती- jitiya vrat ke aarti
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
जितिया का पारण कितने बजे है
Jitiya Vrat Kyun Manaya Jata Hai : जितिया व्रत क्यों मनाया जाता है
jimutvahan vrat katha: जीमूतवाहन व्रत कथा
जैसे जीमूतवाहन ने वृद्धा की हालत देखी उन्होंने उसे आश्वासन दिया कि वो उसके पुत्र के प्राणों की रक्षा जरूर करेंगे। अपने कहे हुए वचनों के अनुसार, जीमूतवाहन पक्षीराज गरुड़ के समक्ष गए और गरुड़ उन्हें अपने पंजों में दबोच कर साथ ले गए। उस दौरान उन्होंने जीमूतवाहन के कराहने की आवाज सुनी और वे एक पहाड़ पर रुक गए, जहां जीमूतवाहन ने उन्हें पूरी घटना बताई।
तब पक्षीराज उनके साहस और परोपकार को देखकर दंग रह गए और प्रसन्न होकर उन्होंने जीमूतवाहन को प्राणदान दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे अब किसी नाग को अपना आहार नहीं बनाएंगे। तभी से संतान की सुरक्षा और उन्नति के लिए जीमूतवाहन की पूजा का विधान है, जिसे लोग आज जितिया व्रत के नाम से भी जानते हैं। कहा जाता है कि इस कथा के बिना जितिया व्रत (Jivitputrika Parv Ke Niyam) अधूरा होता है, इसलिए इसका पाठ जरूर करना चाहिए।
jitiya vrat geet: जितिया व्रत गीत
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
रहीह तू हरदम सबका से आगे
पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो उमर तोहरा के लग जाए
रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
पावन परब हम तोहरे ला करिले
कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
