अध्यात्म

जया किशोरी ने बताया सच्चे प्यार का असली अर्थ, जानिए प्रेम की गहराई

Jaya Kishori On Love: आज के युग में जहां प्रेम अक्सर स्वार्थ, अपेक्षा और अधिकार का रूप ले लेता है, वहीं जया किशोरी की यह सीख हमें याद दिलाती है कि सच्चा प्रेम निःस्वार्थ, निर्मल और पवित्र होता है। वह प्रेम जो केवल पाने की नहीं, बल्कि देने की भावना से भरा हो — वही सच्चा प्यार कहलाता है।

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जया किशोरी ने बताया सच्चे प्यार का असली अर्थ

Jaya Kishori On Love: भारत की लोकप्रिय भजन गायिका, आध्यात्मिक वक्ता और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी जीवन और रिश्तों को लेकर अक्सर कुछ न कुछ नई सीख देती रहती हैं। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा करके सच्चे प्यार का असली मतलब बताया है। जया किशोरी सच्चे प्रेम के बारे में बताते हुए कहती हैं 'कि एक बार एक व्यक्ति के शहर में एक बहुत ही ज्ञानी पुरुष आते हैं वो व्यक्ति उनके पास जाकर पूछता है कि आज के समय जब हर जगह इतना स्वार्थ है लोग प्यार भी स्वार्थ के लिए करते हैं, रिश्ते स्वार्थ के लिए बनाते हैं तो आपके ज्ञान के माध्यम से बताइए कि प्यार और प्रेम में क्या फर्क है। ज्ञानी पुरुष कहते हैं खुद के पास जो भी है उसे दूसरे को दे देना प्यार कहलाता है। लेकिन जब हम खुद को ही अर्पण कर देते हैं उसे प्रेम कहते हैं।'

आगे जया किशोरी कहती हैं कि चाहे फिर वो रिश्तों में हो या भगवान में हो। जब आप जिसे प्रेम करते हैं उसे पूर्ण रूप से खुद को समर्पित कर देते हैं तब उसे प्रेम कहते हैं कि आपके पास और कुछ देने को बचा ही नहीं है। भगवान और रिश्तों से ऐसा ही प्रेम करना चाहिए अगर आप चाहते हैं कि आपके रिश्ते हमेशा के लिए चलें।

What Is Real Love

What Is Real Love

सरल शब्दों में समझें तो कथावाचक जया किशोरी यहां ये समझाने की कोशिश कर रही हैं सच्चा प्रेम अपेक्षा नहीं करता, वह समर्पण करता है। जब आप किसी को सच्चे दिल से चाहते हैं, तो उसकी खुशी, उसका सम्मान और उसका आत्म-सम्मान आपकी प्राथमिकता बन जाता है। यही कारण है कि "राधा-कृष्ण" का प्रेम आज तक प्रेम की सर्वोच्च मिसाल माना जाता है — जिसमें समर्पण है, एहसास है, लेकिन स्वामित्व नहीं।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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