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Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: ऐसे करें भगवान कृष्ण की पूजा, पूरी होगी मनोकामना

Janmashtami Puja Vidhi, Samagri List, Mantra, Vrat Paran Timing Live Updates: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने के बाद रात 12 विशेष पूजा की जाती है, लेकिन सुबह भी पूजा का विधान होता। ये पूजा कैसे करें आइए जानते हैं।

Prabhat SharmaUpdated Sep 3, 2026, 18:45 IST
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Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: ऐसे करें भगवान कृष्ण की पूजा, पूरी होगी मनोकामना

Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi Live: ऐसे करें भगवान कृष्ण की पूजा, पूरी होगी मनोकामना

Janmashtami 2026 Vrat Puja Vidhi, Mantra, Aarti, Stroat, Chalisa Puja Samagri List Live Updates: जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिन है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में हुआ था। मान्यता है कि जब धरती पर अत्याचार बढ़ने लगा और कंस का आतंक लोगों के लिए परेशानी बन गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। इसी खुशी में हर साल जन्माष्टमी का त्योहार बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के समय मंदिरों और घरों में घंटे-घड़ियाल बजाए जाते हैं और भक्त जन्मोत्सव की खुशी मनाते हैं।

जन्माष्टमी के व्रत और पूजा की तैयारी पहले से शुरू हो जाती है। इस दौरान सात्विक भोजन करने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की परंपरा है। जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद हाथ में जल, फल, कुश और गंध लेकर व्रत का संकल्प लें।

सुबह की पूजा के बाद दोपहर में स्नान करके माता देवकी की पूजा करें। स्नान के पानी में काले तिल डालना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद घर में एक छोटा सा सूतिकागृह बनाकर वहां बाल गोपाल की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। साथ में माता देवकी और देवी लक्ष्मी को भी स्थान दें।

रात में कृष्ण जन्म से पहले पूजा की तैयारी कर लें। धूप-दीप जलाकर भगवान को फूल, अक्षत, चंदन, रोली, नैवेद्य और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। कृष्ण जन्म के समय बाल गोपाल को पालना जरूर झुलाएं। उन्हें माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। पूजा में माता देवकी, वसुदेव, बलराम, नंद बाबा, यशोदा मैया और माता लक्ष्मी का स्मरण भी करें।

जन्माष्टमी का व्रत केवल खाना छोड़ने का नाम नहीं है। इस दिन क्रोध, झूठ, अपशब्द और किसी की निंदा से बचना भी जरूरी माना जाता है। दिनभर कान्हा का नाम लें, बच्चों के साथ झांकी सजाएं और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को फल या भोजन दान करें। बड़ी सजावट न हो तो भी कोई बात नहीं। सच्ची श्रद्धा से जलाया गया एक दीपक और माखन-मिश्री का भोग भी कान्हा को प्रिय माना जाता है।

SEPT 03, 2026 18:45 IST

व्रत का पारण



पूजा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जा सकता है। हालांकि पारण का सही समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार देखना बेहतर होता है। श्रद्धा के साथ भगवान कृष्ण का स्मरण करते हुए व्रत पूरा करें।
SEPT 03, 2026 18:34 IST

जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को क्या भोग लगाएं



भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री बेहद प्रिय माने जाते हैं। इसलिए जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाया जाता है। इसके अलावा फल, मिठाई, दूध से बनी चीजें, पंजीरी और धनिया की पंजीरी भी भोग में रखी जा सकती है। भोग में तुलसी दल रखना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते साफ हों और उन्हें श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित करें।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

सुबह से रात तक ऐसे करें पूजा की तैयारी



सुबह घर और पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद बाल गोपाल को स्नान कराकर साफ कपड़े पहनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाएं और वहां भगवान कृष्ण का झूला रख सकते हैं। दिनभर भजन, मंत्र जाप और श्रीकृष्ण की कथाओं का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

जन्माष्टमी व्रत के लिए पूजा सामग्री



पूजा के लिए बाल गोपाल की मूर्ति, पंचामृत, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, मिश्री, तुलसी दल, रोली, अक्षत, चंदन, फूल, धूप, दीपक और माखन-मिश्री जैसी चीजें रख सकते हैं। भगवान के लिए नए वस्त्र और आभूषण भी रखे जा सकते हैं। पूजा की थाली में फल और सात्विक प्रसाद जरूर रखें।
SEPT 03, 2026 18:07 IST

जन्माष्टमी 2026 पर कब रखें व्रत?



जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला, फलाहार या सात्विक व्रत रखा जा सकता है। अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी है तो व्रत रखने से पहले सावधानी जरूर बरतें। व्रत के दौरान मन को शांत रखें और भगवान कृष्ण के नाम का जाप करें।