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Janaki Jayanti 2026: जानकी जयंती आज, नोट करें सीता अष्टमी की तिथि, मुहूर्त और महत्व

  • Authored by: Srishti
  • Updated Feb 9, 2026, 05:49 AM IST

Janaki Jayanti 2026 Date, Sita Ashtami Kab Hai (जानकी जयंती कब है): जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाती हैं। साल 2026 ये खास दिन कब है, इसकी सही तारीख आप यहां से जान सकते हैं। इसकी डेट के साथ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में भी बताया गया है।

जानकी जयंती कब है साल 2026 में? (pc: pinterest)

जानकी जयंती कब है साल 2026 में? (pc: pinterest)

Janaki Jayanti 2026 Date, Sita Ashtami Kab Hai (जानकी जयंती कब है): जानकी जयंती माता सीता के प्राकट्य का पावन पर्व है, जिसे वैवाहिक सुख, सौभाग्य और आदर्श दांपत्य जीवन के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। जानकी जंयती को ही सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा और व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम, विश्वास और मधुरता बढ़ती है। तो साल 2026 में जानकी जयंती किस दिन है, ये आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही यहां जानकी जयंती के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

जानकी जयंती कब है 2026 में?

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 फरवरी 2026, को सुबह 05 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 10 फरवरी 2026, को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में 9 फरवरी को जानकी जयंती मनाई जाएगी। सीता अष्टमी कल यानी 9 फरवरी को है।

जानकी जयंती शुभ मुहूर्त 2026-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:21 ए एम से 06:12 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:04 पी एम से 06:30 पी एम
  • अमृत काल- 10:04 पी एम से 11:51 पी एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:46 ए एम से 07:04 ए एम
  • विजय मुहूर्त- 02:26 पी एम से 03:10 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:07 पी एम से 07:24 पी एम

जानकी जयंती पूजा विधि

जानकी जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और उस पर माता सीता व भगवान श्रीराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण कर व्रत का संकल्प लें। माता सीता का पुष्प, अक्षत, सिंदूर और वस्त्र से श्रृंगार करें तथा धूप-दीप जलाएं। फल, मिठाई और पंचामृत का भोग अर्पित करें। इसके बाद सीता अष्टमी व्रत कथा का पाठ करें और सीता-राम मंत्रों का जप करें। आखिर में आरती कर सभी के सुख, सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मंगल कामना करें तथा श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण करें।

जानकी जयंती का महत्व

माता सीता त्याग, धैर्य, शील और नारी शक्ति की प्रतीक हैं, इसलिए यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। सीता अष्टमी यानी जानकी जयंती पर की गई पूजा से पारिवारिक कलह शांत होती है और घर में सुख-शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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