Guru Gobind Singh Ji Jayanti 2024 Date: 2024 में गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती 17 जनवरी को मनाई जाएगी। ये इनकी 357वां जन्म वर्षगांठ होगी। पंचांग अनुसार गुरु गोविंद सिंह जी की का जन्म पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन हुआ था (Guru Gobind Singh Ji Birthday 2024)। गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के आखिरी गुरु हैं। उन्होंने ही सिखों के पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब को' पूर्ण कर सिक्खों के गुरु के रूप में स्थापित किया था (Guru Gobind Singh Ji Prakash Purab 2024)। अर्थात गुरु गोबिंद सिंह जी के बाद सिखों का नेतृत्व करने का जिम्मा गुरु ग्रन्थ साहिब को दे दिया गया। जानिए गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन परिचय।
गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती कितनी तारीख की है (Guru Gobind Singh Ji Jayanti 2024 Date)
- गुरु गोबिन्द सिंह की 357वां जन्म वर्षगांठ
- गुरु गोबिन्द सिंह जयन्ती 17 जनवरी 2024, बुधवार को मनाई जाएगी।
- सप्तमी तिथि 16 जनवरी 2024 को 11:57 PM बजे से शुरू होगी।
- सप्तमी तिथि की समाप्ति 17 जनवरी 2024 को 10:06 PM पर होगी।
गुरु गोबिंद सिंह का जन्म (Guru Gobind Singh Ji Birthday)
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म गुरु तेग बहादुर जी के घर में पटना में हुआ था। गुरु तेगबहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे। गुरु गोबिंद सिंह जी की माता का नाम गुजरी देवी था। पटना के जिस घर में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था उसी जगह पर आज ‘तखत श्री पटना साहिब’ स्थित है।
गुरु गोबिंद सिंह जी की रचनाएं (Creations of Guru Gobind Singh Ji)
दसम ग्रंथ, जाप साहिब, अथ पख्यां चरित्र लिख्यते, अकाल उस्तत, चण्डी चरित्र, जफरनामा, शास्त्र नाम माला, खालसा महिमा।
गुरु गोविंद सिंह जी की शिक्षाएं (Guru Gobind Singh ji Teachings)
- असहाय लोगों पर अपनी तलवार या शक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। वरना विधाता तुम्हारा खून स्वयं बहाएगा।
- मनुष्य से प्रेम करना ही ईश्वर के प्रति आपकी सच्ची भक्ति है।
- अच्छे कर्मों से ही तुम्हें सच्चे गुरु की प्राप्ति होती है, साथ ही ईश्वर की कृपा से आपको उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
- मनुष्य को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा हमेशा दान करना चाहिए।
गुरु गोबिंद सिंह जयंती महत्व (Guru Gobind Singh Ji Jayanti Mahatva)
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर सिख धर्म के लोग उनकी द्वारा दी गई शिक्षाओं को याद करते हैं। इस मौके पर देश भर के गुरुद्वारों में गोबिंद सिंह जी की कविताओं को सुना जाता है। गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन काल में जो भी उपलब्धियां प्राप्त की थी उसके बारे में भी इस दिन याद किया जाता है। इस दिन जगह-जगह लंगरों का आयोजन करते हैं और निस्वार्थ भाव से सभी को भोजन कराते हैं।
