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Govardhan Puja Samagri List: गोवर्धन पूजा में क्या-क्या सामग्री की जरूरत पड़ेगी, यहां मिलेगी सही जानकारी

Govardhan Puja Samagri: गोवर्धन पूजा का त्योहार मुख्य रूप से ब्रज भूमि में मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण, गोवर्धन महाराज और गायों की पूजा की जाती है। चलिए आपको बताते हैं गोवर्धन पूजा में क्या-क्या सामग्री लगेगी।

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Govardhan Puja Samagri

Govardhan Puja Samagri (गोवर्धन पूजा सामग्री pdf): गोवर्धन पूजा का त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 2 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान कृष्ण, गोवर्धन महाराज, गायों, वरुण देवता, इंद्र देवता और अग्नि आदि देवताओं की पूजा होती है। ये त्योहार सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ा है। इस दिन लोग प्रकृति का आभार व्यक्त करत हैं। चलिए आपको बताते हैं गोवर्धन पूजा में किन सामग्रियों की जरूरत पड़ती है।

गोवर्धन पूजा सामग्री (Govardhan Puja Samagri)

  • थाली
  • रोली
  • चावल
  • अक्षत
  • बताशे
  • धूप
  • तेल का दीपक
  • कलश में जल
  • केसर
  • नैवेद्य
  • धूप
  • मिठाई
  • गंगाजल
  • पान
  • फूल
  • दही
  • शहद
  • फूल माला
  • खीर
  • गोवर्धन पर्वत का चित्र

गोवर्धन पूजा के दिन क्या करते हैं (Govardhan Puja Kaise Manate Hai)

गोवर्धन पूजा का त्योहार प्रकृति और भगवान श्री कृष्ण को समर्पित होता है। ऐसे में इस मौके पर देशभर के मंदिरों में धार्मिक आयोजन होते हैं और जगह-जगह भंडारे होते हैं। पूजन के बाद लोगों में भोजन प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इसके अलावा इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाने का भी बड़ा महत्व है। मान्यता है इससे कृष्ण भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट उत्सव (Govardhan Puja Annakut Utsav)

गोवर्धन पूजा के दिन मंदिरों में अन्न कूट का आयोजन किया जाता है। अन्न कूट कई प्रकार के अन्न का मिश्रण होता है जिसे भगवान कृष्ण को भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है।कुछ स्थानों पर इस दिन विशेष रूप से बाजरे की खिचड़ी बनाई जाती है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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