Gangapur Puja Time, Vidhi 2026 (गणगौर पूजा मुहूर्त, विधि) LIVE: गणगौर के पूजा गीत, आज गणगौर का पूजा टाइम, गणगौर के फोटोज - यहां देखें इस पर्व की सारी जानकारी
Gangapur Puja Vidhi, Vrat Katha, Samagri List, Puja Ka Shubh Muhurath, Aarti, Mantra, Chalisa in Hindi LIVE Updates: गणगौर पूजा सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व है, जो माता गौरी और भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने की कामना करती हैं। पूजा में मिट्टी या लकड़ी की गौरी-शंकर प्रतिमा, श्रृंगार सामग्री, फूल, जल और प्रसाद का विशेष महत्व होता है। यह पर्व खासतौर पर राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है और होली के बाद शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया को संपन्न होता है। यहां देखें आज गणगौर का टाइम क्या है, गणगौर कितने बजे मनेगा, गणगौर की पूजा कैसे करें, गणगौर माता की फोटो, गणगौर की कथा, गणगौर की आरती आदि। यहां देखें इस पर्व से जुड़ी सारी जानकारी।
Gangapur Puja Time, Vidhi 2026 (गणगौर पूजा मुहूर्त, विधि) LIVE: गणगौर के पूजा गीत, आज गणगौर का पूजा टाइम, गणगौर के फोटोज - यहां देखें इस पर्व की सारी जानकारी
गणगौर की पूजा सामग्री
गणगौर व्रत में क्या न करें?
- अपशब्द से बचें
- गरीबों को खाली हाथ न जाने दें
- सोने से बचें
- तासमिक आहार से बचें
गणगौर व्रत का महत्व
गणगौर व्रत 2026 पूजा विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें और साफ वस्त्र धारण कर लें।
- गणगौर व्रत की पूजा करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति मिट्टी से बनाई जाती है।
- पूजा घर में चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें और सबसे पहले माता पार्वती को रोली, कुमकुम से तिलक लगाएं।
- भगवान शिव का चंदन से तिल करें और घी का दीपक अवश्य जलाएं।
- माता पार्वती को वस्त्र व श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इसके बाद, फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। साथ ही, दूर्वा भी अर्पित करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए।
ओड़ो कोड़ो- गणगौर के गीत
ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल
ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल
बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार
बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार
अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार
चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,
गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,
वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए
पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो
गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो
गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,
(इस गीत को गाते समय आपको अपने घर वालों के नाम लेने है )
गणगौर की तिथि 2026
गणगौर पूजा मंत्र
गणगौर पूजा सामग्री लिस्ट
- लकड़ी की चौकी
- तांबे का कलश
- गणगौर माता की प्रतिमा
- दो मिट्टी के बर्तन
- मिट्टी के दीये
- काली मिट्टी या होली की राख
- कुमकुम
- चावल
- पूजा थाली
- फूल
- घास
- दो मिट्टी के कुंडे/गमले
- हल्दी
- मेहन्दी
- गुलाल
- अबीर
- मिठाई
- चावल
- मूंग
- माता की चुनरी
- काजल
- लाल या पीले रंग का कपड़ा
- घी
- आम के पत्ते
- पानी से भरा बर्तन
- पान के पत्ते
- बेताल और अशोक चले जाते हैं
- गणगौर के कपड़े
- गेहूं
- लकड़ी की टोकरी
- नारियल
गणगौर पर पति को डंडे से क्यों पीटती है पत्नियां?
म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या गीत
गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
(यहां आपको सभी घर वालों के नाम लेने हैं )
गणगौर व्रत की कथा
पूजन के बाद उन्होंने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की और पूरे विधि विधान के साथ पूजा संपन्न की। माता पार्वती की भक्ति और समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उसी पार्थिव शिवलिंग से प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया। भगवान शिव ने कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा। साथ ही वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी। यह वरदान देकर भगवान शिव वहां से अंतर्ध्यान हो गए।
पूजा में समय लग जाने के कारण माता पार्वती लौटने में थोड़ी देर हो गईं। जब वे भगवान शिव के पास पहुंचीं, तो वहां देवर्षि नारद भी उपस्थित थे। भगवान शिव ने उनसे देरी का कारण पूछा। माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि नदी किनारे उनके मायके के लोग मिल गए थे। उन्होंने आग्रह करके माता को दूध-भात ग्रहण करने और थोड़ी देर विश्राम करने को कहा।
भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भी उस भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं और तुरंत नदी की ओर चल पड़े। माता पार्वती मन ही मन चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि वे उनकी प्रतिष्ठा और व्रत की रक्षा करें।
नदी तट पर पहुंचने पर माता पार्वती ने एक विशाल और भव्य महल देखा। महल में प्रवेश करने पर उनके भाई-भौजाई और कुटुम्ब जन वहां उपस्थित थे। उन्होंने भगवान शिव का भव्य सत्कार किया और उनकी स्तुति की। प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां दो दिन तक रुके। तीसरे दिन माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन शिव जी और अधिक समय रुके रहना चाहते थे। माता पार्वती ने अकेले ही वहां से प्रस्थान किया, और अंततः भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़े।
चलते-चलते भगवान शिव को याद आया कि उन्होंने अपनी माला वहीं छोड़ दी है। माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोकते हुए देवर्षि नारद को भेजा। नारद जी जब नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां कोई महल नहीं है। जगह पर घना जंगल था, जिसमें कई हिंसक जानवर विचरण कर रहे थे। नारद जी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी को एक वृक्ष पर भगवान शिव की माला लटकी दिखाई दी। उन्होंने माला उठाई और भगवान शिव को पूरी घटना सुनाई। नारद जी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे संभव हुआ कि महल और लोग गायब होकर जंगल में बदल गए।
इस पर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है। उन्होंने अपने पूजन और व्रत को गुप्त रखने के लिए यह मायावी दृश्य रचा। माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब उनकी नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ।
देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना करते हुए कहा कि वे पतिव्रताओं में सर्वोत्तम हैं। उनके स्मरण मात्र से स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होता है। नारद जी ने आगे कहा कि गुप्त पूजन सामान्य पूजा से अधिक फलदायी होता है। जो महिलाएं अपने पति की भलाई और मंगलकामना के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा। इसी प्रकार जो कन्याएं यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा।
सूर्य को अर्घ्य देने का गीत
आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी
ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो
अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ
सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा
सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा
सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।
गणगौर को पानी पिलाने का गीत
म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।
म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो
म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।
म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।
(यहां आपको बह्मदास जी की जगह अपने पिता और ईशरदास जी की जगह अपने पुत्र का नाम लेना हैं )
गणगौर के गीत
गोर ए गणगौर माता खोल किंवाडी,
बाहर ऊबी थारी पूजन वाली,
पूजो ए पुजावो संइयो कांई-कांई मांगा,
मांगा ए म्हें अन-धन लाछर लिछमी जलहर जामी बाबुल मांगा,
रातां देई मांयड, कान्ह कंवर सो बीरो मांगा, राई (रुक्मणी) सी भौजाई,
ऊंट चढ्यो बहनोई मांगा, चूनडवाली बहना,
पून पिछोकड फूफो मांगा, मांडा पोवण भूवा,
लाल दुमाल चाचो मांगा, चुडला वाली चाची,
बिणजारो सो मामो माँगा, बिणजारी सी मामी,
इतरो तो देई माता गोरजा ए, इतरो सो परिवार,
दे ई तो पीयर सासरौ ए,
सात भायां री जोड
परण्यां तो देई माता पातळा (पति)
ए सारां में सिरदार
गणगौर 2026 फोटो
गणगौर को पानी प्यान का गीत इन हिंदी
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
ब्रह्मदास बीरा,
ईसरदास राज घाट्यांरी मुकुट करो।
ब्रह्मदासजी रा कानीराम,
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
म्हारी गोरां न पाणीड़ा प्याई ओ,
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
गणगौर शुभ मुहूर्त 2026
- ब्रह्म मुहूर्त - 05:07 AM से 05:54 AM
- प्रातः सन्ध्या - 05:31 AM से 06:42 AM
- अभिजित मुहूर्त - 12:21 PM से 01:10 PM
- गोधूलि मुहूर्त - 06:48 PM से 07:12 PM
- सायाह्न सन्ध्या - 06:50 PM से 08:01 PM
- अमृत काल - 05:58 PM से 07:27 PM
गणगौर की फोटो
नीव ढलती बेलड़ी जी गणगौर गीत
मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी,
मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी।
आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी,
डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी,
आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी।
बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी।
माता पार्वती जी की आरती
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
ओड़ो कोड़ो- गणगौर के गीत
ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल
ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल
बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार
बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार
अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार
चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,
गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,
वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए
पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो
गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो
गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो
गणगौर के गीत
गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
(यहां आपको सभी घर वालों के नाम लेने हैं )
