फरवरी 2026 में प्रदोष व्रत कब है, फरवरी में प्रदोष किस तारीख को है, जानें डेट्स
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 25, 2026, 10:06 PM IST
Pradosh Vrat February 2026 Calendar (प्रदोष व्रत कब है फरवरी 2026 में): प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। प्रदोष व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं और साथ ही ये व्रत ग्रह दोषों को भी शांत करने में सहायक माना जाता है। लेकिन फरवरी में प्रदोष कब है, इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूजन है। ऐसे में आप यहां से प्रदोष व्रत का कैलेंडर देख सकते हैं।
फरवरी 2026 में प्रदोष व्रत कब है? (pc:canva)
Pradosh Vrat February 2026 Calendar (प्रदोष व्रत कब है फरवरी 2026 में): प्रदोष व्रत हर महीने 2 बार आता है। एक बार ये कृष्ण पक्ष तो एक बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शिव जी के साथ शनिदेव की कृपा भी अधिक मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो जीवन में शनि दोष, अशांति, परेशानी या बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं। शनि प्रदोष व्रत से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में शांति, सुख-संपत्ति और संतुलन आता है। प्रदोष व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं। इस व्रत को करने से घर में कलह, संकट, बीमारी, कष्ट कम होते हैं। तो फरवरी के महीने में प्रदोष व्रत किस-किस दिन आ रहा है, इसकी जानकारी आप यहां से ले सकते हैं। यहां प्रदोष व्रत की तारीख बताई गई है।
फरवरी 2026 प्रदोष व्रत कैलेंडर-
| प्रदोष व्रत | तारीख | दिन |
| पहला प्रदोष व्रत | 14 फरवरी 2026 | शनिवार |
| दूसरा प्रदोष व्रत | 28 फरवरी 2026 | शनिवार |
पहला प्रदोष व्रत
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आने वाला प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल की तिथि शाम लगभग 6:10 बजे से 8:44 बजे तक है। इस दिन प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करें। फिर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, बिल्व पत्र, फूल, धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। 14 फरवरी का प्रदोष व्रत शनिवार के दिन ै तो इसे शनि प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा। शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि देव के लिए तेल, काला तिल का दान भी शुभ माना जाता है।
दूसरा प्रदोष व्रत
प्रदोष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को आने वाला प्रदोष व्रत 28 फरवरी को है। इसकी तिथि 28 फरवरी को सुबह लगभग 8:43 PM से रात 9:10 PM तक रहेगी। इस दिन का व्रत भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जाता है। ये प्रदोष जीवन में सफलता, मानसिक संतुलन, कर्तव्यों में सुचारुता तथा अशुभ विचारों से मुक्ति लाने का उपाय है। भक्ति से किया गया व्रत मन और जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इस दिन पूजा करने के लिए शाम को या प्रदोष काल के समय स्नान करें। शिवलिंग पर पंचोपचार (जल, दूध, दही, घी, शहद) तुलसी, बिल्व पत्र, फल, नैवेद्य अर्पित करें। फिर शिव स्तुति पढ़ें और शिव जी की आरती करें।