सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है, गणपति के ये दोनों व्रत गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 6, 2026, 06:32 PM IST
सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है (गणेश चतुर्थी का व्रत सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी से कैसे अलग है): गणेश जी के भक्त जनवरी में जहां सकट चौथ का व्रत रखते हैं, वहीं हर महीने संकष्टी चतुर्थी का। अगस्त-सितंबर के महीने में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। जानें ये व्रत एक ही भगवान के होते हुए भी अलग-अलग महत्व क्यों रखते हैं।
सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी कैसे अलग हैं
सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है (गणेश चतुर्थी का व्रत सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी से कैसे अलग है): हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और उनसे जुड़े कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी प्रमुख हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है और ये दोनों व्रत गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
सकट चौथ क्या है, कब आती है
सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे विशेष रूप से माताएं संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए करती हैं। यह व्रत संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन सकट माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं औा रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
संकष्टी चतुर्थी क्या है, कब आती है
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। यह व्रत भी भगवान गणेश को समर्पित होता है जो जीवन के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। संकष्टी का अर्थ है - कष्टों को दूर करने वाली। यह व्रत पुरुष और महिलाएं दोनों रखते हैं। इसमें केवल भगवान गणेश की पूजा होती है और हर महीने की संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम और महत्व होता है। यह व्रत भी चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
आप ऐसे समझ सकते हैं कि सकट चौथ को साल की सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी माना जाता है।
सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?
| पॉइंट | सकट चौथ | संकष्टी चतुर्थी |
| तिथि | माघ कृष्ण चतुर्थी | हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी |
| महत्व | संतान की रक्षा और आयु | कष्टों और बाधाओं से मुक्ति |
| पूजा | सकट माता व गणेश जी | केवल गणेश जी |
| कौन करता है व्रत | अधिकतर माताएं | स्त्री-पुरुष दोनों |
| मान्यता | उत्तर भारत में अधिक | पूरे भारत में |
गणेश चतुर्थी क्या है, कब आती है
वहीं गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और 10 दिन तक चलता है। यह उत्सव और पूजा का पर्व माना जाता है और इसमें व्रत का इतना विधान नहीं है। इसमें गणेश जी की स्थापना, आरती और विसर्जन किया जाता है। इसे पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस व्रत में चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता भी अलग होती है। कहते हैं कि इस तिथक पर चांद देखने वाले को मिथ्या दोष लगता है।
सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं?
| पॉइंट | सकट चौथ / संकष्टी चतुर्थी | गणेश चतुर्थी |
| प्रकृति | व्रत और उपासना | उत्सव और स्थापना |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| समय | रात में चंद्र दर्शन | दिन में पूजा |
| अवधि | एक दिन | 1 से 10 दिन |
| उद्देश्य | मनोकामना पूर्ति | गणेश जन्मोत्सव |