अध्यात्म

सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है, गणपति के ये दोनों व्रत गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं

सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है (गणेश चतुर्थी का व्रत सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी से कैसे अलग है): गणेश जी के भक्त जनवरी में जहां सकट चौथ का व्रत रखते हैं, वहीं हर महीने संकष्टी चतुर्थी का। अगस्त-सितंबर के महीने में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। जानें ये व्रत एक ही भगवान के होते हुए भी अलग-अलग महत्व क्यों रखते हैं।

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सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी कैसे अलग हैं

सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है (गणेश चतुर्थी का व्रत सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी से कैसे अलग है): हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और उनसे जुड़े कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी प्रमुख हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है और ये दोनों व्रत गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।

सकट चौथ क्या है, कब आती है

सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे विशेष रूप से माताएं संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए करती हैं। यह व्रत संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन सकट माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं औा रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

संकष्टी चतुर्थी क्या है, कब आती है

संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। यह व्रत भी भगवान गणेश को समर्पित होता है जो जीवन के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। संकष्टी का अर्थ है - कष्टों को दूर करने वाली। यह व्रत पुरुष और महिलाएं दोनों रखते हैं। इसमें केवल भगवान गणेश की पूजा होती है और हर महीने की संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम और महत्व होता है। यह व्रत भी चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

आप ऐसे समझ सकते हैं कि सकट चौथ को साल की सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी माना जाता है।

सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?

पॉइंटसकट चौथसंकष्टी चतुर्थी
तिथिमाघ कृष्ण चतुर्थीहर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी
महत्व संतान की रक्षा और आयुकष्टों और बाधाओं से मुक्ति
पूजासकट माता व गणेश जीकेवल गणेश जी
कौन करता है व्रतअधिकतर माताएंस्त्री-पुरुष दोनों
मान्यताउत्तर भारत में अधिकपूरे भारत में

गणेश चतुर्थी क्या है, कब आती है

वहीं गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और 10 दिन तक चलता है। यह उत्सव और पूजा का पर्व माना जाता है और इसमें व्रत का इतना विधान नहीं है। इसमें गणेश जी की स्थापना, आरती और विसर्जन किया जाता है। इसे पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस व्रत में चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता भी अलग होती है। कहते हैं कि इस तिथक पर चांद देखने वाले को मिथ्या दोष लगता है।

सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी गणेश चतुर्थी से अलग कैसे हैं?

पॉइंटसकट चौथ / संकष्टी चतुर्थीगणेश चतुर्थी
प्रकृतिव्रत और उपासनाउत्सव और स्थापना
पक्षकृष्ण पक्षशुक्ल पक्ष
समयरात में चंद्र दर्शनदिन में पूजा
अवधिएक दिन1 से 10 दिन
उद्देश्यमनोकामना पूर्तिगणेश जन्मोत्सव
इस तरह सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी दोनों ही कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर पड़ने वाले व्रत हैं और भगवान गणेश की उपासना से जुड़े हैं। इनमें सकट चौथ का संबंध विशेष रूप से संतान की मंगलकामना से है, जबकि संकष्टी चतुर्थी सामान्य जीवन की बाधाओं को दूर करने का व्रत है। गणेश चतुर्थी एक उत्सव है, जो गणपति के जन्मोत्सव के रूप में शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।
Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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