अध्यात्म

शव पर क्यों लगाया जाता है इत्र, क्या है इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Why Perfume Applied On Dead Body : हिंदू, मुस्लिम या ईसाई धर्म हो, सभी में शवों पर सुगंधित पदार्थ लगाने की परंपरा है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है।

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शव पर इत्र लगाने के पीछे क्या है कारण

Why Perfume Applied On Dead Body : मृत्यु जीवन का एक ऐसा सत्य है, जिसके बाद हर धर्म में व्यक्ति को सम्मान और श्रद्धा के साथ अंतिम विदाई देने की परंपरा रही है। हिंदू , मुस्लिम, ईसाई या यहूदी धर्म में अंतिम संस्कार या दफन से पहले शरीर को पवित्र करने और सम्मान देने की परंपरा है। इसी परंपरा का एक हिस्सा है शव पर सुगंधित पदार्थों का प्रयोग करना है।

हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और यहूदी परंपराओं में सुगंधित पदार्थों का प्रयोग अलग-अलग रूपों में मिलता है। कहीं चंदन और पुष्पों का प्रयोग होता है, तो कहीं लोबान, गंधरस और पवित्र तेलों का। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ व्यावहारिक कारण भी जुड़े हुए हैं। आइए जानते हैं कि शव पर इत्र लगाने की परंपरा के पीछे क्या कारण हैं?

अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार

हिंदू धर्म में क्यों लगाया जाता है शव पर सुगंधित पदार्थ

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को जीवन के प्रमुख संस्कारों में से एक माना गया है। मृत्यु के बाद शरीर को स्नान कराया जाता है, नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और फूलों से सजाया जाता है। कई क्षेत्रों में शव पर चंदन, पुष्प और सुगंधित पदार्थ लगाने की परंपरा भी रही है। इसके साथ ही गृह्य सूत्रों जैसे आश्वलायन गृह्यसूत्र में भी शव पर सुगंध लगाने की परंपरा मिलती है।

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की क्रियाओं और अंत्येष्टि संस्कार का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसमें शव को सम्मानपूर्वक तैयार करने, शुद्धता बनाए रखने और विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने की बात लिखा है। वैदिक परंपरा में सुगंध का विशेष महत्व रहा है। ऋग्वेद सहित कई वैदिक परंपराओं में सुगंधित वनस्पतियों और पवित्र द्रव्यों का महत्व बताया गया है। पूजा में चंदन, धूप और पुष्पों का प्रयोग इसी भावना से किया जाता है। गरुड़ पुराण में भी शव पर सुंगध लगाने का उल्लेख है। प्रेत कल्प के अंतर्गत दसवें अध्याय अन्त्येष्टि संस्कार और दाह संस्कार विधि के अनुसार शव पर चंदन का लेप करना चाहिए। वहीं, कुछ जगहों पर शव की नाक में रुई में इत्र लगाकर भी रखा जाता है। अंतिम संस्कार में चंदन और फूलों का प्रयोग मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान, प्रेम और श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम माना जाता है।

तदफीन

तदफीन

मुस्लिम परंपरा में शव पर खुशबू लगाने की है परंपरा

इस्लामी परंपरा में मृत व्यक्ति को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने के लिए शव को साफ-सफाई और सुगंध के साथ तैयार करने की परंपरा मिलती है। हदीसों में अंतिम स्नान और शव को खुशबू देने से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। सहीह अल-बुखारी और सहीह मुस्लिम में उल्लेख मिलता है कि पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी हज़रत ज़ैनब रजियल्लाहु अन्हा के इंतकाल के समय उन्होंने अंतिम स्नान कराने वाली महिलाओं को पानी में कपूर (काफूर) मिलाने का निर्देश दिया था। कपूर को एक सुगंधित पदार्थ माना जाता है, जो शरीर को ठंडक और खुशबू प्रदान करता है।

इस्लामी फिक्ह (धार्मिक नियमों) में शव को दफनाने से पहले खुशबू लगाने की परंपरा को भी महत्व दिया गया है। इसे हनूत कहा जाता है, जिसमें इत्र, कस्तूरी और कपूर जैसे सुगंधित पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। कई इस्लामी विद्वानों के अनुसार, शव के कुछ अंगों और जोड़ों पर भी खुशबू लगाने की परंपरा रही है। इसमें माथा, नाक, बगल और घुटनों के पीछे जैसे स्थानों का उल्लेख मिलता है।

इसके अलावा कफन को सुगंधित करने के लिए ऊद (सुगंधित लकड़ी) या धूप देने की परंपरा भी कई इस्लामी परंपराओं में मिलती है। इसका उद्देश्य मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान और अंतिम विदाई के समय पवित्र वातावरण बनाए रखना माना जाता है।

हालांकि इस्लाम में कुछ विशेष परिस्थितियों में खुशबू लगाने से मनाही भी बताई गई है। जैसे अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हज या उमराह के दौरान एहराम की स्थिति में होती है, तो उसे इत्र या सुगंधित पदार्थ लगाने से मना किया गया है। सहीह अल-बुखारी में एहराम की अवस्था से जुड़े ऐसे नियमों का उल्लेख मिलता है। इस प्रकार इस्लामी परंपरा में शव पर सुगंध का प्रयोग केवल खुशबू के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता, सम्मान और पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई गई परंपराओं के पालन से जुड़ा हुआ माना जाता है।

Christian Funeral

Christian Funeral

ईसाई और यहूदी धर्म में भी है शव पर सुगंधित पदार्थ लगाने की है परंपरा

ईसाई परंपरा में भी अंतिम संस्कार से पहले शव को सुगंधित पदार्थों से तैयार करने की प्राचीन परंपरा रही है। विशेष रूप से लोबान (Frankincense), गंधरस (Myrrh), एलो (Aloes) और पवित्र सुगंधित तेलों (Anointing Oils) का प्रयोग किया जाता रहा है।

ईसाई और यहूदी परंपरा में भी अंतिम संस्कार से पहले शव को सुगंधित पदार्थों से तैयार करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। बाइबल (Bible) में शवों पर सुगंधित पदार्थों के प्रयोग और दफनाने की रीति का मुख्य उल्लेख यूहन्ना (John) 19:39-40 में मिलता है। इसके अलावा मरकुस (Mark) 16:1 और लूका (Luke) 23:56 में भी इसका वर्णन किया गया है।

यूहन्ना 19:39-40 के अनुसार, जब यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद दफनाया गया, तब उनके एक अनुयायी निकुदेमुस (Nicodemus) लगभग 30 किलो (75 पाउंड) गंधरस (Myrrh) और अगर (Aloes) का मिश्रण लेकर आए। इस सुगंधित पदार्थ को कफन के साथ यीशु मसीह के शव पर लगाया गया। बाइबल में बताया गया है कि यह उस समय की यहूदियों की दफनाने की रीति के अनुसार किया गया था।

इसके अलावा मरकुस 16:1 और लूका 23:56 में उल्लेख मिलता है कि यीशु मसीह के दफनाए जाने के बाद मरियम मगदलीनी और अन्य महिलाओं ने भी उनके शव पर लगाने के लिए सुगंधित मसाले और तेल तैयार किए थे। यह उस समय की धार्मिक परंपरा का हिस्सा था, जिसमें मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए सुगंधित पदार्थों का प्रयोग किया जाता था।

इस प्रकार ईसाई और यहूदी परंपरा में शव पर सुगंधित पदार्थों का प्रयोग केवल खुशबू के लिए नहीं, बल्कि मृत व्यक्ति के प्रति सम्मान, प्रेम और धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन का प्रतीक माना जाता रहा है।

क्या है वैज्ञानिक कारण

धार्मिक मान्यताओं के अलावा शव पर सुगंधित पदार्थ लगाने के पीछे व्यावहारिक कारण भी रहे हैं। पुराने समय में शव संरक्षण के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे। इसलिए प्राकृतिक सुगंधित पदार्थ जैसे चंदन, कपूर, लोबान, गंधरस और तेलों का उपयोग किया जाता था। इन पदार्थों की तेज खुशबू कुछ समय तक शरीर से आने वाली अप्रिय गंध को कम करने में मदद करती थी। साथ ही अंतिम संस्कार में उपस्थित लोगों के लिए वातावरण को शांत और सहज बनाने में भी यह सहायक होती थी।

अंतिम सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक

हिंदू धर्म में चंदन और पुष्प, मुस्लिम परंपरा में खुशबू, ईसाई और यहूदी परंपरा में लोबान, गंधरस और पवित्र तेलों का प्रयोग एक ही भावना को दर्शाता है और यह मृत व्यक्ति को सम्मान और गरिमा के साथ अंतिम विदाई देने के लिए किया जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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